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Bihar Police : गुनाह करने वाले हो जाएं सावधान; अब फिंगरप्रिंट नाफिस डाटाबेस से होगी अपराधियों की पहचान
Sat, 29 Jun 2024 08:19 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Sat, 29 Jun 2024 08:19 PM IST
सार
Bihar : बिहार पुलिस 1 जुलाई से तीन नये कानून के तहत एक तकनीक शुरू कर रही है। इस तकनीक के तहत अपराधी के फिंगरप्रिंट का मिलान किया जायेगा, जिसके बाद पूरे देश में गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट डाटाबेस से असली अपराधी का पूरा डिटेल्स दिख जायेगा।
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डीजीपी आर एस भट्टी।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
गुनाह करने वाले अपराधी अब सावधान हो जाएं ,क्यों कि बिहार पुलिस ने तीन नये कानून के तहत अपराधियों पर नकेल कसने के लिए नई तकनीक का प्रयोग करेगी। इस तकनीक को फिंगरप्रिंट नाफिस डाटाबेस कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि इससे मिलान करते ही पूरे देश में गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट डाटाबेस से यह असली अपराधी का पूरा डिटेल्स दिख जायेगा। इसमें सभी गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट उपलब्ध रहते हैं। और यह बिहार में प्रत्येक जिला में लागू है।
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फिंगरप्रिंट नाफिस डाटाबेस कैसे करेगा काम
प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति का फिंगरप्रिंट NAFIS डाटाबेस में दर्ज किया जायेगा। इससे अपराधिक घटनास्थल पर मिलने वाले फिंगरप्रिंट का त्वरित मिलान फिंगरप्रिंट ब्यूरो के द्वारा किया जायेगा। इससे मिलान करते ही पूरे देश में गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट डाटाबेस से यह असली अपराधी का पूरा डिटेल्स दिख जायेगा। यह मुख्य रूप से अपराध के उद्भेदन एवं अभियुक्तों को सजा दिलाने में सहायक होगा।
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बयान के आधार पर गलत दोषारोपण पर लग जाएगी रोक
प्रत्येक जिले में Mobile Forensic Science Unit की व्यवस्था के साथ-साथ विधि-विज्ञान विशेषज्ञों की प्रतिनियुक्ति की गयी है। अब गंभीर घटना में Forensic Unit विशेषज्ञों एवं उपकरणों के साथ घटनास्थल पर त्वरित पहुंच कर फोटोग्राफी, वीडियोंग्राफी, फिंगरप्रिंट एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन करेंगे, जिससे न्याय व्यवस्था मजबूत होंगे और दोषियों को सजा मिल सकेगी। इससे बयान के आधार पर गलत दोषारोपण पर भी रोक लगेगा।
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ऑडियो या वीडियो के माध्यम से न्यायालय में त्वरित पेश हो सकेंगे साक्ष्य और गवाह
प्रत्येक पुलिस पदाधिकारी को स्मार्टफोन और लैपटॉप की सुविधा दी जा रही है। इससे वह आपराधिक घटनास्थल के वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी एवं पीड़ित्त एवं गवाहों के बयान ऑडियो या वीडियो के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे और न्यायालय में त्वरित पेश कर सकेंगे।
कांडो के उद्भेदन एवं अनुसंधान की गुणवत्ता में होगी वृद्धि
पुलिस पदाधिकारी लैपटॉप से किसी भी समय CCTNS/ICJS का उपयोग अनुसंधान / जांच में कर सकेंगे, जिससे कांडो के उद्भेदन एवं अनुसंधान की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
एक जुलाई से लागू हो रहे हैं तीन नये क़ानून
1 जुलाई से देशभर में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो रहे हैं। नये अपराधिक कानून में किये गये बदलाव के अनुरूप ही बिहार पुलिस की वेबसाइट https://police.bihar.gov.in/ में भी बदलाव किया गया है। अब वेबसाइट पर तीनों आपराधिक कानून हिन्दी एवं अंग्रेजी वर्जन में उपलब्ध है। वेबसाइट के होम पेज पर नये आपराधिक कानून का आईकन बना हुआ है, जिसे क्लिक करने पर तीनों नये आपराधिक कानून से जुड़ी जानकारी मिलेगी। साथ ही शिकायत एवं सुझाव के लिए भी एक आईकन बना हुआ है, जिसमें राज्य के सभी थानों के नम्बर एवं ई-मेल आईडी की जानकारी दी गयी है। थानों के ई-मेल आईडी के माध्यम से संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।