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Bihar News : पटना उच्च न्यायालय ने संस्थान कर्मियों के हक में सुनाया फैसला, 20 साल बाद मिला न्याय
Tue, 24 Sep 2024 04:09 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Tue, 24 Sep 2024 04:09 PM IST
सार
Bihar : शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी और गैरकानूनी रवैया से तंग होकर ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एव सामाजिक परिवर्तन संस्थान के कर्मियों ने पटना हाई कोर्ट में मामला दायर किया। कोर्ट ने संस्थान के कर्मियों के हक में फैसला सुनाया है।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एव सामाजिक परिवर्तन संस्थान के कर्मियों के लिए अच्छी खबर है। पटना हाई कोर्ट ने उन्हें बहुत बड़ी राहत दी है। राहत इसलिए क्यों कि
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पटना उच्च न्यायालय ने ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एव सामाजिक परिवर्तन संस्थान के कर्मियों को सेवानिवृति लाभ एवं पेंशन भुगतान का आदेश दिया है। पटना हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आर्थिक विकास एव सामाजिक परिवर्तन संस्थान के कर्मियों में खुशी का माहौल हो गया। संस्थान के प्रोफेसर एवं याचिकाकर्ता एस डी सिंह ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश का सम्मान करते हुए संस्थान के शैक्षणिक और गैर- शैक्षणिक कर्मियों के सेवांत लाभ के साथ-साथ पेंशन का भी भुगतान करने का आदेश निर्गत करें।
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20 साल बाद आया फैसला
बिहार सरकार ने शिक्षा विभाग के लिए 13 नवम्बर 1990 को संस्थान के प्रबंधन और संचालन के लिए ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान नियमावली, 1990 आधिसूचित की गई। परन्तु शिक्षा विभाग, बिहार (प्रशासी विभाग) ने 2017 तक संस्थान के शैक्षणिक एव गैर- शैक्षणिक कर्मियों के लिए कोई प्रभावकारी सेवा-शर्त नियमावली नही बनाई। फलस्वरूप संस्थानकर्मी वर्ष 1986 से 2017 तक विभाग द्वारा नियुक्त होते रहे और बिना सेवांत लाभ के सेवानिवृत होते रहे। संस्थान के कर्मियों ने सरकार से लगातार गुहार लगाते रहे। पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न न्यायादेश के बाद 28 जून 2017 को शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या 7781 द्वारा 'संस्थान कर्मियो की सेवा-शर्त से संबंधित ललित नारायण मिश्र, आर्थिक विकास', सेवा सामाजिक परिवर्तन संस्थान सेवा शर्त नियमावली, 2017 गजट अधिसूचित हुई, जिसके नियम 9 में संस्थान कर्मियों के सेवा-निवृति लाभ का प्रावधान रखा गया। परन्तु विभागीय पदाधिकारियों के मनमाने रवैये से 07 सितंबर 2017 को विभागीय अधिसूचना संख्या 1114 जारी कर पूर्व के नियमावली को थान था ठंढ़े बस्मेंते में डाल दिया। इतना ही नहीं अधिसूचना संख्या 1466 दिनांक के तहत 19 दिसंबर 2017 से संस्थान कर्मियों के सेवा- शर्त नियमावली 2017 में संशोधन कर नियम 9 को ही समाप्त कर दिया गया, जिसके कारण संस्थान कर्मी बिना सेवा-निवृति लाभ के ही सेवा-निवृत होते रहे।
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अब तक कई कर्मचारियों की हो चुकी है मौत
इस लड़ाई को लड़ने वाले कई शिक्षकों एवं गैर शिक्षक कर्मचारियों की अब मौत भी हो चुकी है, जो इसको लेकर संघर्ष करते रहे। उन लोगों में गुनानद मिश्रा, इन्द्रकांत झा, रंजीत कुमार झा, सुशील कुमार झा, अमरनाथ ठाकुर के अलावे कई गैर शिक्षक भी थे। गैर शिक्षकों में इब्राहिम, मोहम्मद हाफिज, गोपाल झा सहित अन्य कई कर्मी थे, जो इस लड़ाई में शामिल थे। आज हाई कोर्ट ने ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एव सामाजिक परिवर्तन संस्थान के पक्ष में फैसला आने का श्रेय डॉ शिवदेव सिंह और डॉ चन्द्र सिंह का अहम् योगदान रहा।
पटना उच्च न्यायालय में की थी अपील
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी और गैरकानूनी रवैया से तंग आकर संस्थान कर्मियों ने पटना उच्च न्यायालय में अलग-अलग पांच ( सी.डब्लू. जे० सी० नम्बर - 644/2023 10463/18, 172/63/18, 20846/18 6/9 22613/18) दायर किया। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सभी पांच याचिकाओं का एक साथ सुनवाई करते हुए दिनांक 24 अगस्त 2024 को अपने 37 (सैतीस) पृष्ठों का ऐतिहासिक न्यायादेश पारित कर संस्थान कर्मियों की सेवा- शर्त नियमावली 2017 को बहाल करते हुए नियमावली के नियम 9 तहत सभी कर्मियों को सेवांत लाभ और पेंशन भुगतान का आदेश दिया है।
संस्थान कर्मियों और उनके परिवार वालों में खुशी का माहौल
न्यायालय के इस आदेश के बाद संस्थान कर्मियों और उनके परिवार जनों में काफी खुशी का माहौल है। संस्थान के प्रोफेसर एवं याचिकाकर्ता एस डी सिंह ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि पटना उच्च न्यायालय के न्यायदेश का सम्मान करते हुए संस्थान के शैक्षणिक और गैर- शैक्षणिक कर्मियों को सेवांत लाभ के साथ साथ पेंशन भुगतान कराने की कार्रवाई की जाए।