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Purnea Lok Sabha : राहुल गांधी ने दूरी बनाकर भी पप्पू को फायदा तो नहीं दिया? क्या कह रहा पूर्णिया में गिरा वोट

Sat, 27 Apr 2024 04:43 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना / पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना / पूर्णिया Published by: आदित्य आनंद Updated Sat, 27 Apr 2024 04:43 PM IST
सार

Bihar Lok Sabha Election 2024 : भारतीय जनता पार्टी कहती रही है कि राहुल गांधी जहां जाते हैं, वहां उसे फायदा होता है। लेकिन, बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट पर मतदान तक राहुल की सभा नहीं होने से किसे फायदा मिला? गिरा वोट प्रतिशत क्या बता रहा? जानें...

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Bihar News : weatther report and vote percentage in purnea lok sabha election 2024 rahul gandhi ignored voter
पूर्णिया का वोट प्रतिशत दोपहर के बाद उछलने की वजह पर निर्भर करेगा रिजल्ट। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

पूर्णिया लोकसभा सीट पर शुक्रवार को मतदान खत्म होने के करीब 22 घंटे बाद तस्वीर बहुत कुछ साफ नजर आने लगी है। बिहार की पांच लोकसभा सीटों पर शुक्रवार को मतदान था, जिसमें पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में वोट का प्रतिशत 61.39 तक पहुंचा। पिछली बार यह वोट 65.37 प्रतिशत था। वोट प्रतिशत में गिरावट के लिए गर्मी को दोषी माना जा सकता है, लेकिन देखने वाली बात है कि इस क्षेत्र में शुक्रवार को हुए मतदान में राष्ट्रीय जनता दल के कोर MY वोटर (मुस्लिम-यादव) जहां आगे बढ़कर वोट करते नजर आए, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नैसर्गिक अगड़े वोटरों ने प्रत्याशियों को लेकर उदासीनता दिखाई। तो, क्या MY के आधार पर राजद की बीमा भारती आगे रहेंगी? इस सवाल का जवाब लोग रोचक अंदाज में देते हैं- "राहुल गांधी का नहीं आना अच्छा रहा।" यह अच्छा कैसे रहा? क्या यह वोट पप्पू यादव के समर्थन में गया? तो, लोग चुप मार जाते हैं। मतलब, कुल मिलाकर गर्मी में मताधिकार का उपयोग करने वालों की जय होगी।

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इस चरण में सबसे चर्चित क्यों रहा पूर्णिया, उसी में सारा खेल
पूर्णिया लोकसभा सीट को राष्ट्रीय जनता दल का नैसर्गिक सीट नहीं माना जाता है, लेकिन यहां से राजद ने प्रत्याशी दिया। बीमा भारती सांसदी के लिए राजद प्रत्याशी घोषित हुईं तो सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड की विधायकी से इस्तीफा देकर पूरी ताकत से कूदीं। लालू प्रसाद यादव के बेटे और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नहीं चाहते थे कि पप्पू यादव यहां से उतरें। उन्होंने कांग्रेस पर भारी दबाव बनाए रखा कि वह नए-नए कांग्रेसी बने राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पूर्णिया से दूर रखे। पार्टी ने पप्पू को कुछ सोचकर ही जोड़ा था, लेकिन तेजस्वी यादव की जिद के कारण यह सीट कांग्रेस को नहीं मिली। बताया जाता है कि कांग्रेस के अंदर भी एक खेमा पप्पू यादव को आगे नहीं बढ़ने देने और पूर्णिया से उतरने से रोकने के पक्ष में था। यही कारण है कि उन्हें बगावत का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। अपनी पार्टी को खत्म कर कांग्रेस में जाने के बावजूद निर्दलीय उतरे पप्पू यादव ने पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र को रोचक बना दिया। प्रशासनिक अधिकारी को धमकाने से लेकर तेजस्वी यादव की सभाओं में पप्पू यादव जिंदाबाद के नारे लगाए जाने तक, इस निर्दलीय प्रत्याशी ने सबसे ज्यादा चर्चा हासिल की। उनका आपराधिक इतिहास भी उछला। ऐसे में वह फायदे में रहे या नुकसान में- कहना आसान नहीं। इधर, यहां के जदयू सांसद संतोष कुशवाहा अपने पुराने नेटवर्क के साथ उतरे थे। उन्हें सीएम नीतीश कुमार से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की जनसभा का फायदा-नुकसान भी मिलना है।
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वोट प्रतिशत गिरने में गर्मी का असर कितना, यह देखें
शुक्रवार को जिन पांच सीटों पर मतदान हुआ, उनमें पूर्णिया न तो सबसे कम तापमान वाला था और न सबसे ज्यादा। सबसे कम 38 डिग्री तापमान किशनगंज में दर्ज किया गया था, जहां दूसरे चरण में सर्वाधिक 64 प्रतिशत मतदान हुआ था। सबसे ज्यादा 42.7 डिग्री तापमान बांका संसदीय क्षेत्र में रिकॉर्ड हुआ, जहां रात साढ़े 10 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार 54.61 प्रतिशत मतदान हुआ था। तापमान 41 डिग्री कटिहार और भागलपुर में रहा। रात साढ़े 10 बजे तक के जारी आंकड़ों के अनुसार कटिहार का वोट प्रतिशत 64.60 रहा, जबकि भागलपुर का 52 प्रतिशत रहा। पूर्णिया में इन तीनों से कम तापमान 40.5 डिग्री दर्ज किया गया और इस लोकसभा सीट पर रात साढ़े 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार 61:9 प्रतिशत वोटिंग हुई। शाम छह बजे तक यहां 59 प्रतिशत से कुछ ज्यादा वोटिंग हुई थी, लेकिन मतदान का समय खत्म होने के बावजूद भारी संख्या में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में लोग कतारबद्ध थे। बूथ पर कतारबद्ध हो चुके लोगों को मताधिकार के उपयोग से रोका नहीं जाता है और यही कारण है कि करीब दो फीसदी की वृद्धि अंतिम समय में भी हो गई।

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