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SSC Exam : 35 फर्जी अभ्यर्थियों पर FIR कराने वाले का खेल जानकर पुलिस भी चौंकी; प्रोफेसर बताया, स्टाफ भी नहीं

Wed, 18 Dec 2024 02:00 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 18 Dec 2024 02:00 PM IST
सार

Bihar News : बिहार की राजनीति में खेला का भले इंतजार करना पड़े, परीक्षाओं में यह खूब होता है। अब एसएससी एमटीएस एग्जाम के फर्जीवाड़े में भी फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिसने प्राथमिकी दर्ज कराई, वही फर्जी निकल आया है।

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Bihar News : ssc mts exam case fir lodged by Suresh prasad yadav but he is not a professor Purnea university
पूर्णिया में परीक्षा के दौरान सामने आयी थी गड़बड़ी, लेकिन अब प्राथमिकी कराने वाला जांच के घेरे में। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

एसएससी की एमटीएस परीक्षा परीक्षा में फर्जीवाड़े मामले में पूर्णिया से गिरफ्तार 35 अभ्यार्थी को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। मामले में जिस प्रोफेसर ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, वही खुद फर्जी निकला। उसने खुद की पहचान आरएल कॉलेज माधवनगर में समाजशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में दी थी। छानबीन के दौरान सामने आया कि को-ऑर्डिनेटर सुरेश यादव आरएल कॉलेज माधवनगर के प्रोफेसर ही नहीं हैं। वह सहरसा के सौर बाजार के बरसम का रहने वाला है। परीक्षा में सुरेश यादव कैसे को-ऑर्डिनेटर बनाया गया या किसके आदेश पर यह हुआ, इसका कोई रिकॉर्ड कॉलेज या विश्वविद्यालय के पास नहीं है। सुरेश यादव को पुलिस खोज रही है, लेकिन वह अब गायब है।
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कॉलेज में किसी ने न पहचाना, न ही इस नाम का रिकॉर्ड मिला
पूर्णिया के साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए SSC परीक्षा केंद्र के को-ऑर्डिनेटर सुरेश प्रसाद यादव ने बताया था कि वह सरकारी नौकरी में हैं और उनकी पोस्टिंग आरएल कॉलेज माधवनगर पूर्णिया में है। उसने यह भी जानकारी दी थी कि वह संप्रति पूर्णिया विश्वविद्यालय में परीक्षा विभाग में नियुक्त है। प्राथमिकी के आधार पर पड़ताल बढ़ी तो कॉलेज ने सुरेश प्रसाद यादव नाम के किसी प्रोफेसर के अपने यहां होने की पुष्टि नहीं की। कॉलेज प्रिंसिपल कमाल खान ने सभी स्टाफ को अपने कार्यालय में बुलाया और सुरेश को सभी के सामने पेश किया गया। पता चला कि कार्यालय में मौजूद स्टाफ इस नाम के किसी भी व्यक्ति को नहीं जानते हैं। इस नाम के व्यक्ति का कॉलेज में न तो अटेंडेंस बनता है, न ही कोई नियुक्ति पत्र है, न ही रिलीविंग लेटर है और न ही सैलरी दी जाती है।
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अस्थायी का कागज भी 2006 तक; उसके बाद विवि में सेवा कैसे दी?

इस संबंध में सुरेश प्रसाद यादव से बात की गई तो उसने कुछ डॉक्यूमेंट्स दिखाए। कागजातों के अनुसार, 1984 में कॉलेज की तदर्थ कमेटी ने उनकी अस्थायी नियुक्ति की थी, लेकिन 2006 के बाद कॉलेज में उनसे किसी प्रकार की सेवा नहीं ली गई। सुरेश यादव से जब सैलरी स्लिप मांगी गई तो वे उपलब्ध नहीं करा पाए। इसी पूछताछ में सामने आया कि वह 2006 के बाद अवैध रूप से विश्वविद्यालय में काम करने लगे। पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पवन कुमार झा ने भी बताया कि सुरेश प्रसाद यादव से विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने 2021 तक काम लिया है। वर्ष 2021 तक उन्हें को-ऑर्डिनेटर बनाया गया है। वहीं, आरएल कॉलेज माधवनगर के प्रिंसिपल कमाल खान ने कहा कि सुरेश प्रसाद यादव फ्रॉड है। यह सब गड़बड़ी पूर्णिया यूनिवर्सिटी और वहां के परीक्षा विभाग में हुई है, क्योंकि कॉलेज से 2006 के बाद उसका कोई वास्ता नहीं रहा। वह विवि में 2006 से 2021 तक भी कैसे रहा और अब 2024 में भी वह यूनिवर्सिटी के नाम पर कैसे पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचा, इसकी जांच होगी तो सब खेल सामने आ जाएगा।

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