Bihar News : गया में मनाई गई पितृ दीपावली, जगमग हो उठा देवघाट; जानिए इसको क्यों कहते हैं पितरों का तीर्थ
Bihar : आस्था के प्रति लोगों का यह मानना है कि आज के दिन दीपदान करने से पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। दीप जलाकर पितरों को प्रसन्न किया जाता है, जिससे वह प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गया में आयोजित पितृपक्ष मेला के दौरान लाखों की संख्या में तीर्थयात्री गया धाम पहुंचकर अपने पितरों को मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान, तर्पण एवं कर्मकांडों को पूरा कर रहे हैं। विष्णुपद मंदिर के समीप फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसे देखकर लोगों का मन प्रसन्न होरहा है। पितृपक्ष के 14वें दिन की शाम विष्णुपद मंदिर के समीप देवघाट पर पितृ दिवाली मनाई गई है।
पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय होता है
आस्था के प्रति लोगों का यह मानना है कि आज के दिन दीपदान करने से पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। दीप जलाकर पितरों को प्रसन्न किया जाता है। पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए महिला-पुरुष तीर्थयात्रियों ने अपने पुरखों की आत्मशांति के लिए कामना करते हुए पितरों के लिए घी के दीये जलाए। पितृ दीपावली पर हजारों की संख्या में दीप जलने के बाद पूरा घाट जगमग हो उठा। देवघाट के कोने-कोने में दीप जल रहा है। काफी संख्या तीर्थयात्री पहुंचे हैं।
क्यों कहा जाता है इस पितरों का तीर्थ
स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान विष्णु की नगरी और मोक्ष की भूमि को गया जी कहा जाता है। यहां भगवान विष्णु स्वयं पितृ देव के रूप में विराजमान रहते हैं, इसलिए इसे पितरों का तीर्थ भी कहा जाता है। इस मेला की शुरुआत 17 सितंबर को हुई थी और 2 अक्टूबर को इसका समापन होगा।