Lok Sabha Election : दूसरे चरण में क्यों बढ़ा मतदान प्रतिशत- जानें यह सरकारी आंकड़ा; बिहार में किसने बदला गणित
Election 2024 : लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 49 प्रतिशत के आसपास मतदान के बाद अचानक दूसरे चरण में 10 प्रतिशत का इजाफा किसके पक्ष में हुआ, यह तो चार जून को पता चलेगा। फिलहाल यह सामने आ गया है कि चमत्कार की वजह कौन है?
विस्तार
भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव में अबतक हुए मतदान का प्रतिशत अंतिम तौर पर जारी कर दिया है। अब यह आंकड़ा बदलने वाला नहीं है। इस आंकड़े के अनुसार बिहार में दूसरे चरण के तहत 26 अप्रैल को पांच सीटों पर औसतन 59.45 प्रतिशत मतदान हुआ था। पूरे देश की 88 लोकसभा सीटों पर औसतन यह 66.71 प्रतिशत रहा था। बिहार में पहले चरण के तहत चार सीटों पर 19 अप्रैल को 49.26 प्रतिशत ही वोट पड़ा था। पहले चरण में देशभर की 102 सीटों पर औसतन 66.14 प्रतिशत मतदान हुआ था। बिहार में पहले चरण के मुकाबले मतदान प्रतिशत में 10 प्रतिशत से भी ज्यादा का उछाल आया। यह चमत्कार किसके लिए हुआ और क्यों? यह चार जून को परिणाम के समय पता चलेगा, फिलहाल यह जानना सुखद है कि यह चमत्कार नारी शक्ति ने किया है।
वोट प्रतिशत गिरने से ज्यादा चिंतित थी भाजपा
माना जाता है कि वोट प्रतिशत का गिरना मौजूदा सरकार के लिए खराब संकेत होता है। पहले चरण में जब बिहार में महज 49.26 प्रतिशत मतदान हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के मुख्य दल भारतीय जनता पार्टी की चिंता स्वाभाविक रूप से दिखी। भाजपा ने बिहार में कई स्तर पर वोट प्रतिशत बढ़ाने पर काम किया। भारत निर्वाचन आयोग ने भी कई स्तर पर तैयारियों को ताकत दी। किसकी ताकत का कितना असर हुआ, यह भी समझना मुश्किल है। लेकिन, यह तो साफ है कि करीब 49.26 की जगह दूसरे चरण में 59.45 प्रतिशत मतदान होना सुखद था।
पहले चरण में भी बहुत कुछ चौंकाने वाला था
पहले चरण में सर्वाधिक वोट 52.76 प्रतिशत मतदान गया में हुआ था। यहां का आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि कुल 52.76 में से 53.89 प्रतिशत पुरुष और 51.55 फीसदी महिला वोटर के आंकड़े के साथ 'अन्य' लिंग समूह से 15 प्रतिशत वोटर थे। पहले चरण के मतदान में दूसरे नंबर पर जमुई था, जहां कुल 51.25 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस वोटिंग में महिलाओं की भूमिका पुरुषों के मुकाबले ज्यादा थी। जमुई की कुल वोटिंग में 50.11 फीसदी पुरुष, जबकि 52.50 प्रतिशत महिलाएं थीं। औरंगाबाद में कुल 50.35 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें से 51.22 प्रतिशत हिस्सेदारी पुरुषों की थी। महिलाओं की महज 49.41 प्रतिशत। सबसे कम मतदान वाले नवादा में भी महिलाएं पीछे ही रहीं। यहां कुल 43.17 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस वोटिंग में पुरुषों की भागीदारी 43.70 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की 42.61 फीसदी रही थी। अन्य लिंग वर्ग के वोटरों ने हर जगह भागीदारी निभाई, लेकिन इसमें गया सबसे आगे रहा।
दूसरे चरण में नारी शक्ति का प्रमाण देखिए
मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों का असर महिलाओं पर ठीक से पड़ा। नहीं पड़ता तो वोट प्रतिशत फिर धम्म से गिर जाता। दूसरे चरण में सबसे ज्यादा वोट कटिहार में पड़े। कटिहार में कुल 63.76 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें से पुरुष वोटर 58.87 प्रतिशत ही थे, महिलाओं की भागीदारी 69.07 फीसदी थी। किशनगंज को पीछे छोड़ते हुए पूर्णिया दूसरे नंबर पर रहा। पूर्णिया में कुल 63.08 प्रतिशत मतदान हुआ था, इनमें से पुरुषों की भागीदारी 60.44,प्रतिशत, तो महिलाओं की हिस्सेदारी 65.89 रही। किशनगंज में कुल 62.84 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा थी। किशनगंज के कुल मतदान में पुरुषों का प्रतिशत 58.89, जबकि महिलाओं की भागीदारी 67.06 फीसदी रही। बांका में कुल 58.48 प्रतिशत वोटिंग हुई तो वह भी नारी शक्ति के कारण ही। यहां कुल मतदान में से पुरुषों की भागीदारी 51.05 प्रतिशत तो महिलाओं की 58.31 फीसदी रही। लगभग बराबरी में भागलपुर रहा, जहां कुल 53.50 प्रतिशत वोटिंग हुई तो पुरुषों की भागीदारी 53.11 मुकाबले थोड़ा आगे 53.93 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले।