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Sawan 2024: कृष्णा बम पिछली बार नहीं गई थीं बाबाधाम, इस बार जाएंगी? क्यों खास हैं बाबा बैद्यनाथ की यह भक्त

Fri, 19 Jul 2024 10:01 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 19 Jul 2024 10:01 AM IST
सार

Baba Dham Bihar News : सावन महीने के दौरान बिहार के भागलपुर में अजगैबीनाथ से झारखंड में देवघर की पैदल यात्रा करने वाली प्रसिद्ध भोलेभक्त कृष्णा माता बम पिछली बार बाबा बैद्यनाथ के दरबार में नहीं जा सकीं थी। इस बार वह यात्रा के लिए बिहार लौट आई हैं।

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Bihar News: Krishna mata Bam will travel from bhagalpur Sultanganj to Deoghar in sawan 2024 who is krishna bam
कृष्णा माता बम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवो के देव महादेव का अत्यंत प्रिय माह सावन की बात हो और सुप्रसिद्ध कृष्णा माता बम की बात और चर्चा न हो, यह हो ही नहीं सकता है। बीते 40 वर्ष से बाबा बैद्यनाथ को पैदल जलाभिषेक करने वाली अनोखी भक्त है। कृष्णा बम को देखने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए सुल्तानगंज से लेकर बाबा धाम तक होड़ लगी रहती है। मान्यता है कि महादेव की विशेष कृपा प्राप्त कृष्णा माता बम पर है एक बड़ी रोचक कहानी। इस वर्ष वह 41वीं बार महादेव का जलाभिषेक करेंगी। मुजफ्फरपुर निवासी 72 वर्षीय कृष्णा माता बम किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वह प्रति वर्ष बाबा बैद्यनाथ और अन्य ज्योतिर्लिंग का दर्शन करती हैं। वर्ष 1976 में पहली बार बाबा गरीबनाथ पर जलाभिषेक करने वाली कृष्णा माता बम को 1982 में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में गईं। इसके बाद से लेकर 2022 तक लगातार वह बतौर डाक बम के रूप में सुलतानगंज से गंगा जल लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ जाती हैं। वहां जलाभिषेक करती आई हैं। वर्ष 2023 में दुर्घटना में पैर टूटने की वजह से नहीं जा सकी थीं किंतु शिव के प्रति आस्था ने उन्हें एक बार फिर से खड़ा कर दिया है और इस बार भी जा रही हैं। देवघर के बाद ओंकारेश्वर और फिर महाकाल मंदिर में जाकर जलाभिषेक कर आशीर्वाद लेंगी। यही नहीं बल्कि हर सोमवार को अलग अलग अलग धाम विशेषकर बाबा के ज्योतिर्लिंग का दर्शन पूजन करती आई हैं। 

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दूसरी, तीसरी और चौथी सोमवार को अलग-अलग ज्योतिर्लिंग का दर्शन
72 साल की कृष्णा माता बम ने कहा कि मैं कुछ नहीं करती बस महादेव सब कुछ करवा देते हैं। मेरा कुछ भी नहीं है जो है वह सब महादेव का दिया हुआ है। वही देते हैं और वही लेते हैं। वर्ष 1982 से लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए निकलने वाली कृष्णा बम सावन माह की पहली सोमवार को अपनी शुरूआत करती है और सावन माह के दूसरी, तीसरी और चौथी सोमवार को अलग अलग ज्योतिर्लिंग का दर्शन पूजन करती हैं।  इस वर्ष बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक करने के बाद एमपी के ओंकारेश्वर का दर्शन करके नर्मदा नदी का जलभोझी करके बाबा महाकाल का दर्शन पूजन करेंगी और फिर आगे का पड़ाव जारी रखेंगी। बम कृष्णा बताती हैं कि जीवन के सबसे बड़े और अद्भुत क्षण में से एक कैलाश पर्वत का दर्शन करना और मानसरोवर का दर्शन करना रहा है। यह अलौकिक है और सनातन धर्म में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व भी है। इसकी चर्चा महादेव ने शिवपुराण में की है। महादेव से जो भक्त  दिल से जो भी मांगता है, वह उसकी मुराद अवश्य पूरा कर देते हैं।
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पाकिस्तान जाकर कर चुकी हैं जलाभिषेक, सरकार ने दी थी अनुमति 
वर्ष 2019 के कृष्णा माता बम भारत सरकार से मिली अनुमति के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर से 180किली की दूरी पर अवस्थित कटास राज मंदिर महादेव का दर्शन पूजन कर चुकी हैं। यही नहीं उस दौरान में पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें विशेष भेंट भी दिया था। जिसको आज भी बहुत संजोए कर रखी हुई हैं। कृष्णा माता बम ने कह कि महाभारत काल के दौरान में युधिष्ठिर द्वारा दिए गए उत्तर के बाद तालाब का जल ग्रहण किया था और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। दुनिया भर में कटास जी महाराज मंदिर और राजस्थान के पुष्कर में पुष्कर झील का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव के दो आंसू इन्ही दो जगहों पर गिरे थे। 
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देश भर में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम पैदल कर चुकी हैं यात्रा 
कृष्णा माता बम न सिर्फ ज्योतिर्लिंग का बल्कि पैदल और साइकिल से गंगोत्री से रामेश्वरम तक एक माह में दर्शन और यात्रा कर चुकी हैं। यही नहीं नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर और जनकपुर और असम के कामाख्या से लेकर गुजरात के पोरबंदर तट के पास द्वारका का दर्शन कर चुकी हैं। देश का कोई भी ऐसा बड़ा धार्मिक स्थल नहीं हैं, जहां यह नहीं गई हैं। 72 वर्षीय कृष्णा माता बम बंगाल से लेकर कश्मीर और फिर अलग अलग प्रांत में स्थित प्रत्येक मंदिर का दर्शन कर कई कीर्तिमान स्थापित कर चुकी हैं। 


कृष्णा माता बम बोलीं- पूर्वजों से मिली प्रेरणा, भक्ति से मिलती है मुझे शक्ति
कृष्णा माता बम कहती हैं कि यह प्रेरणा मुझे अपने पूर्वजों से मिली। उन्होंने ही शिव और भक्ति की अहमियत को बताया था। जिस परंपरा का आज भी निर्वहन कर रहे हैं। मेरे परिवार में आई हुई हर कठिनाई के बाद भी शिव के लिए समर्पण का भाव और भक्ति ने शक्ति प्रदान किया। यही वज़ह है आज भी इस उम्र में अपने आप यह शक्ति आ जाती है। बीते साल पटना में जाने के दौरान में पैर टूट गई जिस वजह से नहीं जा सकी किंतु इस बार पूरी तरह से तैयार हूं।
(इनपुट- विशाल कुमार @ मुजफ्फरपुर)

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