Bihar News: चारपाई से गिरने से हुई बच्चे की मौत, तांत्रिक महिला ने किया जिंदा करने का दावा; शव कब्र से निकाला
Bihar: घटना की जानकारी मिलते ही बगहा थाना अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शव को पुनः दफनाया और तांत्रिक महिला ज्ञानती देवी को हिरासत में ले लिया। हालांकि, महिला की गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की
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पश्चिम चंपारण बगहा अनुमंडल के खैर पोखरा गांव में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास के चलते एक मृत बालक का शव दोबारा कब्र से बाहर निकाल लिया गया। मामला शुक्रवार का है, जब गांव के सुखदेव पटेल के 12 वर्षीय पुत्र संदीप कुमार की चारपाई से गिरने के कारण मौत हो गई। परिजन उसे तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल, बगहा लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव को गांव में ही दफनाया गया।
लेकिन शनिवार को मामला अंधविश्वास की ओर मुड़ गया। गांव में ज्ञानती देवी नामक एक तांत्रिक महिला पहुंची और दावा किया कि वह मृत बालक को दोबारा जीवित कर सकती है। शोकाकुल परिजन उसकी बातों में आ गए। ग्रामीणों की मदद से बच्चे का शव फिर से कब्र से बाहर निकाला गया।
इसके बाद तांत्रिक महिला ने शव को जमीन पर रखकर उसके चारों ओर एक रेखा खींची, अगरबत्तियां जलाईं और मंत्रोच्चार शुरू कर दिया। उसने सरसों के दाने समेत अन्य तांत्रिक वस्तुएं शव पर फेंकीं। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां तक कि रेलवे ट्रैक पर भी लोग पहुंच गए, जिससे रेल यातायात भी प्रभावित हुआ। भीड़ में मौजूद किसी ने भी इस अंधविश्वास पर सवाल नहीं उठाया।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही बगहा थाना अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शव को पुनः दफनाया और तांत्रिक महिला ज्ञानती देवी को हिरासत में ले लिया। हालांकि, महिला की गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद हालात काबू में आए।
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पुलिस ने अंधविश्वास के खिलाफ जताई सख्ती
थानाध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज के लिए अत्यंत घातक हैं। अंधविश्वास और झूठे दावों से लोग खुद को और समाज को नुकसान पहुंचाते हैं। हमने तांत्रिक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अंधविश्वास का वीभत्स चेहरा
यह घटना केवल एक बच्चे की दुखद मौत तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समाज में गहराई तक फैले अंधविश्वास की भयावह हकीकत को भी उजागर करती है। दुख की इस घड़ी में जब परिजनों को सहानुभूति और संवेदनशील सहयोग की जरूरत थी, तब तांत्रिक महिला ने उन्हें झूठी आशा देकर और पीड़ा दी। अब यह प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कर लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।