CAA India : पूर्वी पाकिस्तान में दंगे के बाद भागकर आए थे बिहार, सीएए पास होते ही इनकी हो गई होली
Bihar : पूर्वी पाकिस्तान और आज के वर्तमान बांग्लादेश से 1956- 1958 के बीच आए 32 हिंदू बंगाली परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। सीएए पास होने के बाद लोग जश्न मनाने लगे और एक दूसरे को गुलाल लगाकर और मिठाई खिला कर बधाई देने लगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश दुनिया में जश्न का माहौल बना हुआ है। मुजफ्फरपुर के रिफ्यूजी कॉलोनी में पूर्वी पाकिस्तान और आज के वर्तमान बांग्लादेश से 1956- 1958 के बीच आए 32 हिंदू बंगाली परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई । वहां पर बंटवारे के बाद से जारी दंगा और गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को टारगेट कर भगाया गया था, जिसके बाद इन लोगों ने मुजफ्फरपुर में शरण लिया था। सीएए पास होते ही लोग जश्न मनाने लगे और एक दूसरे को गुलाल लगाकर और मिठाई खिला कर बधाई देने लगे। इन लोगों ने भारत सरकार के इस प्रस्ताव पर आभार जताया है।
पूर्वी बांग्लादेश में हुई भड़की हिंसा के बाद लिया था शरण
वर्ष 1958 से 60 के समय में पूर्वी पाकिस्तान से लौटे अमरनाथ सिन्हा ने बताया की भारत सरकार के आज के निर्णय से हम सभी बंगाली हिंदू परिवार में खुशी का माहौल है। हमारे परिवार के लोगो ने यहां आकर शरण लिया था। हम लोग 32 परिवार पूर्वी बांग्लादेश में हुई भड़की हिंसा और गैर मुसलमानों को टारगेट किया जाने के बाद अपनी जान बचाकर वहां से भागे थे, जिसके बाद भारत सरकार ने मुजफ्फरपुर के रिफ्यूजी कॉलोनी वर्तमान गनीपुर में शरण दिया था। अब इस कानून के लागू होने से खुशी है।आज हजारे लिए यह बड़ा ही महत्व का दिन है और लोगो को इसे लेकर मिठाई बांट रहे हैं और खुशी मना रहे हैं।
पर्व की तरह मना रहे हैं आज का दिन
इसके साथ ही पूर्वी पाकिस्तान से आए हुए दिलीप सिकदर ने बताया कि भारत सरकार ने आज इस कानून को लागू कर हम लोगों के लिए सुरक्षा का एक बड़ा काम किया है। अपने तमाम संपत्तियों को छोड़कर और अपनी जान को बचाकर यहां भागकर आये थे और यहां पर सुरक्षित महसूस कर रहे थे। आज इस कानून ने हमारे अधिकार को और भी मजबूत कर दिया है। वहीं पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान बागलदेश से लौटी हुई और मुजफ्फरपुर में अपने परिवार के साथ रह रही एकमात्र महिला ऋतुर देवी ने बताया कि यह बेहद ही ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन है। भारत जैसे सुरक्षित देश में अब हमारे हिंदू और दूसरे धर्म के लोग यहां पर रह सकेंगे इसको हम लोग पर्व के रूप में मना रहे हैं और खुशी जता रहे है।