फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar Election Result 2020: Three big reasons for NDA victory, Trust in Modi, fear of Jungle Raj and women voters

एनडीए की फतह के तीन कारण: मोदी पर भरोसा, जंगलराज का डर और महिला मतदाता

Wed, 11 Nov 2020 10:32 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 11 Nov 2020 10:32 AM IST
विज्ञापन
Bihar Election Result 2020: Three big reasons for NDA victory, Trust in Modi, fear of Jungle Raj and women voters
बिहार चुनाव परिणाम 2020 - फोटो : Amar Ujala

बिहार चुनाव में देर रात आए नतीजों के बाद जीत की तस्वीर साफ हो गई। राज्य में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। 

विज्ञापन


भले ही एनडीए ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन इस चुनाव में विपक्षी ‘महागठबंधन’ का नेतृत्व कर रहा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटें अपने नाम करके सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरा है। मतगणना के शुरुआती घंटों में बढ़त बनाती नजर आ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद 74 सीटों के साथ दूसरा स्थान मिला। 
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


विपक्षी महागठबंधन ने कुल 110 सीटें जीतीं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद के सर्वाधिक सीटें हासिल करने के बावजूद महागठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया।

एनडीए के बहुमत हासिल करने के साथ ही नीतीश कुमार के लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह साफ हो गई है। हालांकि इस बार उनकी पार्टी जदयू को 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है। जदयू को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं। उस समय कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव जीता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा समेत एनडीए पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका हैं। इसलिए भले ही कुमार की पार्टी का प्रदर्शन गिरा है, कुमार चौथी बार सरकार का नेतृत्व करेंगे।

जदयू को हुआ नुकसान

जदयू को चिराग पासवान की लोकतांत्रिक जनता पार्टी (लोजपा) के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया।

त्यागी बोले, नीतीश के खिलाफ अभियान चला
जदयू के प्रवक्ता के सी त्यागी ने बताया कि एक साजिश के तहत नीतीश कुमार के खिलाफ अपमानजनक अभियान चलाया गया। उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा, इसमें अपने भी शामिल थे और बेगाने भी। 

उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही एनडीए सरकार का नेतृत्व करेंगे।

नीतीश ही होंगे सीएम: भाजपा

भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने गठबंधन की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा, एनडीए ने अपनी गरीब हितैषी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण जीत दर्ज की। जनता ने मोदी के नेतृत्व पर एक बार फिर विश्वास जताया है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री को लेकर कोई बदलाव किया जाएगा, क्योंकि भाजपा को अपने गठबंधन सहयोगी जदयू से अधिक सीटों पर विजय मिली है तो जायसवाल ने कहा कि दोनों दल एक साथ लड़े और चुनाव से पहले ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था।

महिलाओं का ज्यादा मतदान निर्णायक

एनडीए को जिस तरह की जीत बिहार में मिली है, उसके पीछे का बड़ा साथ राज्य की मौन और महिला मतदाताओं का रहा। बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं के वोट हमेशा नीतीश के पक्ष में ही जाते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। वहीं, पीएम मोदी और उनकी सरकार द्वारा चलाई गई कई योजनाओं पर भी महिलाओं ने विश्वास जताया और एनडीए के पक्ष में वोट किया। 

केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई कुछ महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर महिलाओं को ही होता है। इसमें उज्जवला योजना, शौचालय का निर्माण,  पक्का घर, मुफ्त राशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा नीतीश सरकार द्वारा की गई शराबबंदी से भी महिला वोटर प्रभावित हुईं। इस तरह राज्य की 50 फीसदी आबादी का वोट एनडीए को मिला।

इस बार 57.05 फीसदी वोटिंग हुई, जबकि 2015 में 56.6 फीसदी लोगों ने वोट दिया था। 11 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां महिलाओं का मतदान 70 फीसदी से ज्यादा रहा और 141 सीटों पर 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। वहीं, पुरुष मतदाता पीछे रहे। शराबबंदी और केंद्र की उज्ज्वला जैसी योजनाओं से एनडीए को फायदा मिला।

 
मतदाता    2020    2015    2010
महिला    59.4    60.5    54.5
पुरुष    54.7    53.3    51.1
(आंकड़े प्रतिशत में)

महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी पार, पुरुष वोटर पिछडे़
दिलचस्प तथ्य यह है कि 2020 के बिहार चुनाव में तीनों चरणों में कुल वोटिंग 57.05 फीसदी हुई, जबकि 2015 में कुल वोटिंग 56.6 फीसदी रही थी। 2020 में 11 विधानसभा सीटें ऐसी रहीं, जहां महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी से ज्यादा रहा और 141 सीटें ऐसी थीं, जहां पर 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। वहीं, पुरुष मतदाता महिलाओं से इस मामले में पीछे रहे। सिर्फ 37 विधानसभा सीटें ही ऐसी रहीं, जहां पुरुष मतदान 60 फीसदी से ज्यादा रहा। किसी सीट पर पुरुष मतदान 70 फीसदी पार नहीं जा पाया।

मोदी पर भरोसा, जंगलराज का डर

बिहार चुनाव में आखिरी चरण के मतदान के बाद जब एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए, तो महागठबंधन फूले नहीं समा पा रहा था। लेकिन चुनावी नतीजों ने जिस तरह बिहार के सत्ता की चाबी एनडीए को सौंपी, उसके बाद से महागठबंधन में निराशा का मौहाल है। 

ऐसा नहीं है कि एकदम से बिहार में चुनावी नतीजे पलट गए। बिहार की जनता नीतीश कुमार के खिलाफ गुस्से में थी, लेकिन जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी कमान अपने हाथों में ली। वैसे ही राज्य का सियासी माहौल बदल गया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार में करीब एक दर्जन रैलियों को संबोधित किया। कई रैलियों का नीतीश संग साझा संबोधन किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने नीतीश की तारीफ की। पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि राज्य के विकास के लिए नीतीश सरकार की जरूरत है। 

पीएम मोदी ने अपनी जनसभाओं में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने विपक्ष को राष्ट्रीय मुद्दों से लेकर राज्य के मुद्दों तक पर घेरा। पीएम मोदी अपने संबोधन में लगातार जंगलराज का जिक्र करते रहे। उन्होंने तेजस्वी को जंगलराज का युवराज तक बताया। 

प्रधानमंत्री मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व के जरिए एनडीए ने अपने चुनावी प्रचार अभियान को तेज किया। इससे ही जीत और हार का अंतर तय हुआ। नतीजे भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। भाजपा को जदयू के मुकाबले अधिक सीटें मिली हैं। इस तरह भाजपा ने एनडीए को बहुमत तक अपने दम पर ही पहुंचा दिया। 



भाजपा का मत प्रतिशत घटा, सीटें बढ़ीं 
2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर करीब पांच फीसदी कम हुआ है। भाजपा को आम चुनाव में 24.06 फीसदी वोट मिले थे। जबकि, इस बार 19.3 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं, 2015 के विस चुनाव के मुकाबले उसका वोट 5.12 फीसदी कम हुआ है, लेकिन सीटें बढ़ी हैं।
 

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता का भरोसा
  • युवा तेजस्वी के मुकाबले अनुभवी मोदी-नीतीश पर यकीन
  • उज्ज्वला, मुफ्त शौचालय, नकदी राहत जैसी केंद्रीय योजनाएं
  • 15 साल पूर्व लालू-राबड़ी के समय के जंगलराज का भय
  • महिलाओं और मौन मतदाताओं का समर्थन

ओवैसी की पार्टी ने कांग्रेस व राजद का नुकसान किया

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सीमांचल में महागठबंधन का नुकसान किया है। एआईएमआईएम बसपा और रालोसपा के साथ चुनाव लड़ी और 20 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। इनमें पांच सीटों पर उसके प्रत्याशी जीते हैं। पार्टी को करीब सवा फीसदी वोट मिले, इनमें ज्यादातर मुस्लिम बहुल क्षेत्र के हैं। इसका सीधा नुकसान राजद और कांग्रेस को माना जा रहा है।


महागठबंधन पिछड़ा : अनुभव की कमी, कोई रोडमैप नहीं

  • लालू की गैरमौजूदगी और तेजस्वी में अनुभव की कमी
  • आधार न होने के बावजूद कांग्रेस को जरूरत से ज्यादा सीटें
  • सहयोगी दलों को जाना, विपक्ष को एकजुट न कर पाना
  • अनुभवी नेताओं की कमी, सरकार विरोधी मत बांध नहीं सके
  • कई विपक्षी दलों का अलग-अलग मोर्चा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed