चुनावी अखाड़े में बाहुबलियों की बीवियां
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बिहार की चालीस लोकसभा सीटों में से कई पर बाहुबली नेताओं की पत्नियाँ चुनाव मैदान में है। इनमें से खगड़िया, वैशाली व मुंगेर की तीन महिला प्रत्याशियों की दलील सुनने और उनका चुनाव प्रचार क़रीब से देखने पर इस राज्य की राजनीतिक-सामाजिक विडंबनाएं सामने आती हैं।
पूर्वी बिहार के अपराधग्रस्त क्षेत्र खगड़िया में यादवों का ख़ासा प्रभाव है। यहां से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस गठबंधन की कृष्णा कुमारी यादव चुनाव लड़ रही हैं। दिलचस्प ये है कि कृष्णा यादव के पति रणवीर यादव और बड़ी बहन पूनम यादव, जदयू में है।
कृष्णा के लिए चुनाव प्रचार रणवीर और पूनम कर रहे हैं। पूनम खगड़िया से जदयू की विधायक है। यानी एक ही परिवार में दो विरोधी दलों के सांसद मौजूद हैं।
बाहुबली माने जाते हैं रणबीर यादव
दिलचस्प यह भी है कि कृष्णा और पूनम दोनों रणवीर यादव को अपना पति मानती हैं। बहनों का एक 'पति' के साथ एक छत के नीचे रहना, अलग-अलग दलों में होना और चुनाव जीतने के लिए एकजुट हो जाना, किसी को चौंका सकता है। कृष्णा के पति बाहुबली रणवीर यादव पिछले 25 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। जदयू से जुड़े रहे हैं। लक्ष्मीपुर-तौफिर दियारा नरसंहार (1985) के दोषी भी हैं। इस नरसंहार में नौ लोगों की मौत हुई थी।
कृष्णा अच्छी एथलीट रह चुकी है। दौड़ की कई राष्ट्रीय स्पर्धाएं जीत चुकी हैं, लेकिन अब वे राजनीति की ट्रैक पर हैं। दोनों बहनों के पति एक ही है। यह संयोग बना कैसे? बड़ी बहन पूनम जवाब देती हैं, "बस फ़िफ्टी-फ़िफ्टी जैसा समझ लीजिए। हम एक ही छत के नीचे रहते हैं। संयोग के बारे में रणवीर जी से पूछिए।" राजनीति के अपराधीकरण पर कृष्णा का जवाब था, "जब से दीदी विधायक बनी हैं, खगड़िया अपराधमुक्त है।"
दूसरी तरफ़ स्थानीय निवासी तारिक़ का कहना था कि खगड़िया में अपराध व अपराधियों के बीच तालमेल जारी है।
वैशाली से बाग़ी प्रत्याशी
पटना से दक्षिण स्थित वैशाली संसदीय क्षेत्र की पहचान प्राचीन भारत के लिच्छवि गणराज्य से जुड़ी हैं। राजपूत बहुल इस क्षेत्र से मुख्य प्रत्याशियों में राजद-कांग्रेस गठबंधन के वर्तमान सांसद डॉ। रघुवंश प्रसाद सिंह समेत लोजपा-भाजपा गठबंधन के बाहुबली नेता रामा सिंह और जदयू के विजय साहनी हैं।
लालगंज से जदयू की विधायक अन्नु शुक्ला को पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह बाग़ी प्रत्याशी बन गईं। इनके पति मुन्ना शुक्ला हैं। पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में सज़ायाफ़्ता हैं। उनका चुनावी नाम अन्नु-मुन्ना है। अन्नु शुक्ला नहीं, अन्नू-मुन्ना क्यों? इस सवाल पर कहती हैं, यह नाम क्षेत्र की पहचान है। यह वैशाली के हक़ की आवाज़ है। दोनों नाम आम आदमी की सेवा से जुड़ा है। इसे दो नहीं, एक ही नाम कहिए।
जदयू से नाराज़गी का कारण? अन्नु कहती हैं, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार बनी तो उस दौरान उनका (मुन्ना शुक्ला) सहयोग लिया गया। रैली में भीड़ या गाड़ी की व्यवस्था करनी हो तो इनकी याद आती है।" वह आगे बताती हैं, "जब टिकट देने की बारी आई तो पार्टी की पसंद कोई और हो जाता है। नीतीश विकास पुरुष नहीं हैं, वह अपने ही लोगों को नकारते हैं।"
राजनीति के अपराधीकरण का सवाल अन्नु को असहज करने वाला लगा। थोड़ा विस्तार से पूछने पर वे ग़ुस्से के अंदाज़ में खड़ी हो जाती हैं। वो कहती हैं, "सर ज़्यादा मत पूछिए।" फिर माहौल को हल्का करने के लिए मुस्करा कर हाथ मिलाती है।
मुंगेर की स्थिति
पूर्वी बिहार के मुंगेर संसदीय क्षेत्र का इलाक़ा पिछड़ेपन के साथ-साथ आपराधिक व नक्सली गतिविधियों की मार झेल रहा है। इस क्षेत्र से जदयू के वर्तमान सांसद राजीव रंजन सिंह, लोजपा-भाजपा गठबंधन की वीणा देवी और राजद-कांग्रेस गठबंधन के प्रगति मेहता मुख्य उम्मीदवार हैं।
वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह बाहुबली नेता माने जाते है। सूरजभान सांसद भी रह चुके हैं। हत्या के एक मामले में दोषी क़रार दिए गए हैं। बालिका वधू रह चुकी वीणा की पढ़ाई आठवीं कक्षा से आगे नहीं बढ़ सकी। लेकिन इनकी राजनीतिक समझ अब परिपक्व हो चुकी है।
उनकी पार्टी की स्थिति पिछले लोकसभा चुनाव में ज़ीरो पर आउट होने जैसी थी। इस चुनाव में पार्टी को उबारने की चुनौती थी। वीणा ने पति के ज़रिए पार्टी पर भाजपा से गठबंधन का दबाव बनाया। यह हुआ भी।
'गंवई मासूमियत'
वीणा देवी अपने प्रतिद्वंद्वियों के आरोपों का जवाब तो देती हैं। लेकिन, उनकी बातों में गंवई मासूमियत की झलक साफ़ दिखती है। कहती हैं, हम अपने काम से मतलब रखते है। किन्तु, विरोधी हवा बिगाड़ने की कोशिश कर रहे है।
वीणा गृहिणी हैं। सो अच्छा खाना भी पका लेती हैं। खुशबूदार मीट-चावल के बारे में तो क्या कहना, ऐसा खाने वालों का दावा है। जायकेदार मीट-चावल के स्वाद का मजा लेने में वर्तमान सांसद राजीव रंजन सिंह भी पीछे नहीं रहे।
वीणा की कहती हैं, "सांसद घर में अक्सर आकर मीट-चावल खाते थे। बताइए जिसके यहां खाना खाए हैं उनके ऊपर अनर्गल आरोप कैसे लगा सकते है।" भजन गाने की शौकीन वीणा देवी को अक्सर भगवान सपने में आते हैं। वह कहती हैं, "हमको तो कई बार बैठे-बैठे भगवान का दर्शन हो जाता है।"
अगल-बगल बैठे लोगों से कहते हैं, "देखो हमको भगवान वहां दिख रहे है। सच बोलते हैं लेकिन, लोग हंस देते हैं।" वीणा सफ़ाई देती हुए कहती हैं, "अपराधी हों या नक्सली, दोनों को सरकार ही पैदा करती हैं। सरकार ही बढ़ावा देती है। अगर इन्हें काम-रोज़गार दिया जाए तो खुद ही सुधर जाएंगे।"