{"_id":"6867ef1d969d1b54180dcb04","slug":"bihar-election-before-announcing-bihar-s-blockade-tejashwi-yadav-reached-election-commission-sought-answers-2025-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar Election : बिहार का चक्काजाम एलान से पहले तेजस्वी यादव पहुंचे चुनाव आयोग, पुनरीक्षण पर मांगे जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar Election : बिहार का चक्काजाम एलान से पहले तेजस्वी यादव पहुंचे चुनाव आयोग, पुनरीक्षण पर मांगे जवाब
Fri, 04 Jul 2025 08:59 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Fri, 04 Jul 2025 08:59 PM IST
सार
बिहार में INDIA गठबंधन के नेताओं ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मुलाकात की और बिहार विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम 2025 के तहत केवल 11 दस्तावेजों को मान्य मानने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
विज्ञापन
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बिहार में INDIA गठबंधन के नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मुलाकात कर बिहार विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम 2025 से जुड़ी कई गंभीर आशंकाएं और आपत्तियाँ दर्ज कीं। मुलाकात के दौरान गठबंधन के नेताओं ने निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह केवल 11 दस्तावेजों के आधार पर ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सत्यापन की प्रक्रिया चला सकता है?
तेजस्वी यादव ने आयोग से पूछा कि यदि संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में इस बाबत कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है, तो यह 11 दस्तावेजों की सूची किस प्रक्रिया से बनी और क्या यह न्यायसंगत है? उन्होंने कहा कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड जैसे अन्य सरकारी दस्तावेजों को अमान्य ठहराना गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी नागरिकों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 326 केवल आयु और नागरिकता के आधार पर वयस्क मताधिकार की बात करता है, लेकिन दस्तावेजों को लेकर कोई सीमित सूची नहीं दी गई है। ऐसे में आयोग किस संवैधानिक या विधिक आधार पर सिर्फ 11 दस्तावेजों को ही मान्य मानता है?
तेजस्वी यादव द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल
विज्ञापन
तेजस्वी यादव ने चेताया कि यदि निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती और वंचित तबकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अन्य वैध दस्तावेजों को भी स्वीकार नहीं किया गया, तो जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। गठबंधन दलों ने एक स्वर में कहा कि निर्वाचन आयोग संविधान के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन वह कानून के ऊपर नहीं हो सकती। दस्तावेजों की सूची यदि आंतरिक गाइडलाइन या प्रशासनिक आदेश से बनाई गई है, तो उसे लोकतंत्र पर प्रभाव डालने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
तेजस्वी यादव ने आयोग से पूछा कि यदि संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में इस बाबत कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है, तो यह 11 दस्तावेजों की सूची किस प्रक्रिया से बनी और क्या यह न्यायसंगत है? उन्होंने कहा कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड जैसे अन्य सरकारी दस्तावेजों को अमान्य ठहराना गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी नागरिकों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 326 केवल आयु और नागरिकता के आधार पर वयस्क मताधिकार की बात करता है, लेकिन दस्तावेजों को लेकर कोई सीमित सूची नहीं दी गई है। ऐसे में आयोग किस संवैधानिक या विधिक आधार पर सिर्फ 11 दस्तावेजों को ही मान्य मानता है?
विज्ञापन
तेजस्वी यादव द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल
- निर्वाचन आयोग को केवल 11 दस्तावेजों की स्वीकृति का विशेषाधिकार किस आधार पर?
- सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज अस्वीकार क्यों?
- आधार कार्ड, जो सरकार द्वारा ही जारी है, को खुद सरकार क्यों नकार रही है?
- यदि कोई विधिक प्रावधान नहीं है, तो यह सूची कैसे बनी और किसके आदेश से लागू हुई?
- बिहार के 4 करोड़ प्रवासी नागरिकों को 18 दिन में सत्यापन की क्या कोई व्यवहारिक योजना है?
- रंगीन फोटो, सफेद पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की फोटोकॉपी की बाध्यता गरीब मतदाता के लिए आर्थिक बोझ क्यों बन रही है?
- निर्वाचन आयोग क्यों नहीं जारी करता डैशबोर्ड के माध्यम से रोज़ाना की सत्यापन और अस्वीकृति रिपोर्ट?
विज्ञापन
तेजस्वी यादव ने चेताया कि यदि निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती और वंचित तबकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अन्य वैध दस्तावेजों को भी स्वीकार नहीं किया गया, तो जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। गठबंधन दलों ने एक स्वर में कहा कि निर्वाचन आयोग संविधान के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन वह कानून के ऊपर नहीं हो सकती। दस्तावेजों की सूची यदि आंतरिक गाइडलाइन या प्रशासनिक आदेश से बनाई गई है, तो उसे लोकतंत्र पर प्रभाव डालने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं दी जा सकती।