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पीएम मोदी बोले- अब भी है कोरोना संक्रमण, जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं

Sun, 13 Sep 2020 02:14 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 13 Sep 2020 02:14 PM IST
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bihar election 2020 PM modi dedicate three key petroleum projects to nation nitish kumar gas pipeline
प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बिहार को तीन पेट्रोलियम परियोजनाओं की सौगात दी। इस परियोजना में पारादीप-हल्दिया-दुर्गापुर गैस पाइपलाइन का दुर्गापुर बांका खंड सहित दो एलपीजी बॉटलिंग प्लांट शामिल हैं। उन्होंने 17 फरवरी 2019 को इन पाइपलाइन का शिलान्यास किया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे ऊपर कहीं न कहीं बिहार का कर्ज है। उन्होंने बिहार को ऊर्जा का पावरहाउस करार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए कहा कि इसका संक्रमण आज भी हमारे बीच मौजूद है। उन्होंने कहा, 'जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।'

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पढ़ें प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें-

- देश और बिहार में गैस आधारित व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। इतना ही नहीं इन प्रोजेक्ट्स में जितने लोग पहले काम कर रहे हैं, वो तो वापस लौटे ही हैं, इनकी वजह से रोजगार के नए अवसरों की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
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- कोरोना संक्रमण अभी भी हमारे बीच में मौजूद है। 'जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।' दो गज की दूरी। साबुन से हाथ की नियमित सफाई। यहां-वहां थूकने से मनाही। चेहरे पर मास्क। इन जरूरी बातों का हमें खुद भी पालन करना है और दूसरों को भी याद दिलाते रहना है।
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- कोरोना के इस कालखंड में अब एक बार फिर पेट्रोलियम से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों ने गति पकड़ ली है। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनेकों परेशानियां लेकर आई है। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी देश रुका नहीं है, बिहार रुका नहीं है, बिहार थमा नहीं है।
- बिहार में बिजली की क्या स्थिति थी, ये भी जगजाहिर है। गांवों में दो-तीन घंटे बिजली आ गई तो भी बहुत माना जाता था। शहर में रहने वाले लोगों को भी 8-10 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिलती थी। आज बिहार के गांवों में, शहरों में बिजली की उपलब्धता पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हुई है।
- नतीजा ये हुआ कि बिहार के नौजवान बाहर जाकर पढ़ाई और नौकरी करने के लिए मजबूर हो गए। आज बिहार में शिक्षा के बड़े-बड़े केंद्र खुल रहे हैं। अब एग्रीकल्चर कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, बिहार के नौजवानों के सपनों को ऊंची उड़ान देने में मदद कर रहे हैं।
- बिहार के कुछ लोग कभी ये कहते थे कि बिहार के नौजवानों पढ़-लिख कर क्या करोगे, उन्हें तो खेत में ही काम करना है। ऐसी सोच ने बिहार की प्रतिभाशाली युवाओं के साथ बहुत अन्याय किया है। इसी सोच की वजह से बिहार में बड़े शिक्षण संस्थाओं को खोलने के लिए ज्यादा काम ही नहीं किया गया था।
- यही तो बिहार है, यही तो बिहार की अद्भुत क्षमता है। इसलिए, ये हमारा भी कर्तव्य है, और मैं तो कहूंगा कि कहीं न कहीं हमारे ऊपर बिहार का कर्ज है, कि हम बिहार की सेवा करें।
- बिहार की कला, यहां का संगीत, यहां का स्वादिष्ट खाना, इसकी तारीफ तो पूरे देश में होती ही है। आप किसी दूसरे राज्य में भी चले जाइए, बिहार की ताकत, बिहार के श्रम की छाप आपको हर राज्य के विकास में दिखेगी। बिहार का सहयोग सबके साथ है।
- जब मैं कहता हूं कि बिहार देश की प्रतिभा का पावरहाउस है, ऊर्जा केंद्र है तो ये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बिहार के युवाओं की यहां की प्रतिभा का प्रभाव चारो तरफ है। भारत सरकार में भी बिहार के कितने बेटे-बेटियां हैं जो देश की सेवा कर रहे हैं।
- जो समाज में हाशिए पर थे, पीड़ित थे, वंचित थे, पिछड़े थे, अतिपिछड़े थे, उन्हें कोई पूछता नहीं था। उनके दु:ख, उनकी तकलीफों को देखकर भी नजरअंदाज कर दिया जाता था। लेकिन बिहार में अब ये अवधारणा बदल चुकी है।
- एक समय था जब बिहार में एलपीजी गैस कनेक्शन होना बड़े संपन्न लोगों की निशानी होती था। एक-एक गैस कनेक्शन के लिए लोगों को सिफारिशें लगवानी पड़ती थीं। जिसके घर गैस होती थी, वो माना जाता था कि बहुत बड़े घर-परिवार से है।
- गैस कनेक्टिविटी से जहां एक तरफ फर्टिलाइजर, पावर और स्टील इंडस्ट्री की ऊर्जा बढ़ेगी वहीं दूसरी तरफ सीएनजी आधारित स्वच्छ यातायात और पाइप से सस्ती गैस आसानी से लोगों के किचन तक पहुंचेगी। इसी कड़ी में आज बिहार और झारखंड के अनेक जिलों में पाइप से सस्ती गैस देने की शुरुआत हुई है।
- उज्जवला योजना की वजह से आज देश के आठ करोड़ गरीब परिवारों के पास भी गैस कनेक्शन मौजूद है। इस योजना से गरीब के जीवन में क्या परिवर्तन आया है, ये कोरोना के दौरान हम सभी ने फिर महसूस किया है।
- प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत पूर्वी भारत को पूर्वी समुद्री तट के पारादीप और पश्चिमी समुद्री तट के कांडला से जोड़ने का भागीरथ प्रयास शुरु हुआ। करीब 3 हजार किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन से सात राज्यों को जोड़ा जा रहा है जिसमें बिहार का भी प्रमुख स्थान है।
- एक समय था जब रेल, रोड, इंटरनेट कनेक्टिविटी ये सब प्राथमिकताओं में थे ही नहीं। आज जब देश के अनेकों शहरों में सीएनजी पहुंच रही है, पीएनजी पहुंच रही है, तो बिहार के लोगों को पूर्वी भारत के लोगों को भी ये सुविधाएं उतनी ही आसानी से मिलनी चाहिए। इसी संकल्प के साथ हम आगे बढ़े।
- गैस बेस्ड इंडस्ट्री और पेट्रो-कनेक्टिविटी, ये सुनने में बड़े टेक्निकल से लगते हैं, लेकिन इनका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ता है, जीवन स्तर पर पड़ता है। गैस बेस्ड इंडस्ट्री और पेट्रो-कनेक्टिविटी रोजगार के भी लाखों नए अवसर बनाती है।
- बिहार सहित पूर्वी भारत में ना तो सामर्थ्य की कमी है और ना ही प्रकृति ने यहां संसाधनों की कमी रखी है। बावजूद इसके बिहार और पूर्वी भारत विकास के मामले में दशकों तक पीछे ही रहा। इसकी बहुत सारी वजहें राजनीतिक थी, आर्थिक थीं, प्राथमिकताओं की थीं।
- जगदीशपुर-हल्दिया पाइपलाइन प्रोजेक्ट का जो हिस्सा बिहार से गुजरता है, उस पर भी काम पिछले साल मार्च में ही समाप्त कर लिया गया है। मोतीहारी अमलेखगंज पाइपलाइन पर भी पाइपलनाइन से जुड़ा काम पूरा कर लिया गया है।
- इससे पहले पटना एलपीजी प्लांट के विस्तार और स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने का काम हो, पूर्णिया के एलपीजी प्लांट का विस्तार हो, मुजफ्फरपुर में नया एलपीजी प्लांट हो, ये सारे प्रोजेक्ट पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।
- बिहार के लिए जो प्रधानमंत्री पैकेज दिया गया था, उसमें पेट्रोलियम और गैस से जुड़े 10 बड़े प्रोजेक्ट थे। इन प्रोजेक्ट्स पर करीब-करीब 21 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। आज ये सातवां प्रोजेक्ट है जिसमें काम पूरा हो चुका है, जिसे बिहार के लोगों को समर्पित किया जा चुका है।

- इस सेक्शन की लंबाई करीब 200 किमी है। मुझे बताया गया है कि इस रूट पर पाइप लाइन बिछाकर काम करना बहुत चुनौतीपूर्ण था।
- कुछ वर्ष पहले जब बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई थी, तो उसमें बहुत फोकस राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर पर था। मुझे खुशी है कि इसी से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट के दुर्गापुर-बांका सेक्शन का लोकार्पण करने का अवसर मुझे मिला है।

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