डीएम ने बच्चों के बीच बैठकर खाया दलित विधवा के हाथ से बना खाना
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युवा आईएएस अधिकारियों द्वारा काम के प्रति लगन और उनके अलग नजरिए के बहुत किस्से देखने को मिलते हैं लेकिन ये किस्सा कुछ अलग है। बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज के प्राथमिक स्कूल से प्रिंसिपल द्वारा महिला रसोइया को दलित और विधवा कहकर हटाने की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर खुद स्कूल पहुंचे और महिला के हाथ का खाना खाया।
उन्होंने महिला रसोइया को बहाल करते हुए प्रिंसिपल को भी निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। युवा आईएएस की यह कर्तव्यनिष्ठा काफी चर्चा का विषय बनी हुई है।
एनडीटीवी की खबर के अनुसार जब दलित विधवा उर्मिला कुंवर अपनी शिकायत लेकर जिला कलेक्टर कंवल तनुज के पास पहुंची तो उन्होंने 24 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अगले दिन सुबह होते ही कलेक्टर तनुज ने अपनी कार उठाई और 45 किलोमीटर का सफर तय कर उस स्कूल में पहुंचे जहां से उर्मिला को तीन साल पहले निकाल दिया गया था। उन्होंने उर्मिला को बहाल करते हुए उसे बच्चों के लिए मिड डे मील बनाने के निर्देश दिए।
जिला कलेक्टर ने आरोपी प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमे के आदेश दिए
इसके बाद जब उर्मिला ने खाना बनाया तो जिले के सबसे बड़े अधिकारी कंवल तनुज ने बच्चों के साथ नीचे बैठकर ही वह खाना खाया। उनके साथ शिक्षा विभाग के अन्य बड़े अधिकारियों ने भी नीचे बैठकर उर्मिला द्वारा बनाया गया खाना खाया।
इसके बाद कंवल तनुज ने वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों को स्कूल प्रिंसिपल को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।
बता दें कि 36 साल की उर्मिला के पति की मौत तीन साल पहले हो गई थी। उर्मिला का आरोप है कि तीन साल पहले स्कूल के प्रिंसिपल ने उसे रसोइया के पद से दलित और विधवा बताकर हटा दिया था। महिला ने इसकी शिकायत तमाम अधिकारियों से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
महिला का आरोप था कि प्रधानाचार्य ने उसे वापस काम पर रखने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत भी मांगी थी। बाद में उसने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर कंवल तनुज से की जिन्होंने उसे जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कलेक्टर ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आरोपी प्रिंसिपल के खिलाफ एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराने के भी निर्देश दिए।