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सेल्यूट: लकवे को मात देकर गोल्डन गर्ल बन गई 50 साल की बेटी

Wed, 30 Mar 2016 09:22 AM IST
कृष्ण सिवाच/अमर उजाला, लाखनमाजरा।
कृष्ण सिवाच/अमर उजाला, लाखनमाजरा। Updated Wed, 30 Mar 2016 09:22 AM IST
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निर्मला आर्या को सम्मानित करते डॉ. एसएन सुब्बाराव और अन्य। - फोटो : amarujala
न खेलने की उम्र होती न पढ़ने की, जुनून हो तो कोई भी मुकाम किसी भी उम्र में हासिल किया जा सकता है। लोग अकसर ढलती उम्र का बहाना बनाकर खुद को कमजोर समझने लगते हैं लेकिन महम चौबीसी की एक बेटी ने लकवे जैसी बीमारी को न केवल मात दी बल्कि घर में सोने का ढेर लगा दिया और वह भी 50 साल की उम्र में। निर्मला आर्या टिटौली गांव की बहू है और निंदाना की बेटी।
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निंदाना में रामपाल शास्त्री के घर जन्मी निर्मला की शादी टिटौली निवासी नरदेव आर्य के साथ हुई है। निर्मला खाद्य आपूर्ति विभाग में बतौर इंस्पेक्टर कार्यरत है। दो साल पहले उसको लकवे की शिकायत हुई। जिस पर उसने पीजीआई में इलाज करवाया। यहां डॉक्टरों ने न सिर्फ  उसका इलाज किया बल्कि उसकी जिंदगी ही बदल दी। बतौर निर्मला डॉक्टरों ने उन्हें हर रोज सुबह शाम प्रेक्टिस करने की बात कही और प्रेक्टिस भी ऐसी जिसमें खूब पसीना बहे। इसके बाद व्यायाम करने के लिए स्टेडियम में जाना शुरू किया।
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यहां प्रेक्टिस के दौरान बच्चों को पसीना बहाते हुए देखा तो मन में आया कि मैं भी इतनी मेहनत कर सकती हूं। वहां जाकर निर्मला ने शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और हैमर थ्रो में हर रोज मेहनत करनी शुरू की। खुद को लकवा ग्रस्त नहीं बल्कि एक खिलाड़ी समझने लगी। मन में ठान लिया कि अब केवल बीमारी को ठीक करने का ही मकसद नहीं रहा है मेरा। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह सब सालों से नहीं किया बल्कि सब दो साल की मेहनत और उसका फल है जिसमें उसने मेहनत भी की और मेडल भी जीते।
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निर्मला ने बताया कि 2014-15 और 2015-16 में उसने 15 से 16 मेडल जीते हैं। इसमें सात गोल्ड मेडल हैं। 26 और 27 मार्च को जींद में हुई नेशनल मास्टर एथलीट में शॉटपुट, हैमर थ्रो और डिस्कस थ्रो में तीन गोल्ड मेडल जीते हैं। रोहतक और लखनऊ में हुई प्रतियोगिता में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीते हैं तथा रिले रेस में तीसरे स्थान पर तथा ट्रिपल जंप में दूसरा स्थान पाया है। निर्मला दौड़ में भी अव्वल हैं। 800 मीटर दौड़ सहित 1500 मीटर दौड़ में भी मेडल जीत चुकी निर्मला को सोमवार को चौबीसी के एतिहासिक चबूतरे पर सद्भावना यात्रा के दौरान गांधीवादी डॉ. सुब्बाराव ने सम्मानित किया। 50 साल की उम्र में जो जज्बा निर्मला आर्या में है वह कम ही लोगों में देखा जाता है। निर्मला आर्या समाजसेवा के क्षेत्र में भी लगी रहती हैं।
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