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चंदन कुमार माइती: मास्टरी के साथ बाल तस्करों के खिलाफ संघर्ष

Tue, 01 May 2018 11:26 AM IST
चंदन कुमार माइती
चंदन कुमार माइती Updated Tue, 01 May 2018 11:26 AM IST
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Chandan Kumar Maiti- Govt School Headmaster fight Against Child Traffickers
chandan kumar maiti

दक्षिण चौबीस परगना पश्चिम बंगाल के उन जिलों में शामिल है, जो एक खास, लेकिन घिनौनी वजह से देश में बदनाम है। दरअसल यहां मानव तस्करी के काले कारोबार को धड़ल्ले से अंजाम दिया जाता है। यहां के बच्चों, उसमें भी विशेषकर लड़कियों को उत्तर भारतीय राज्यों में बेच दिया जाता है, जहां अधेड़ों के साथ उनकी शाद कर दी जाती है। इसी जिले में स्थित है कृष्णचंद्रपुर हाई स्कूल। और मैं इस स्कूल का हेडमास्टर हूं। मैं हमेशा से उन बच्चों पर खास ध्यान देता रहा हूं, जो पढ़ाई के प्रति गंभीर होते हैं।

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पिछले साल की बात है। पश्चिम बंगाल के ग्रामीण अंचल की एक किशोरी ने अपने पति को सिर्फ इसलिए तलाक दे दिया था, क्योंकि उसके पति ने उसे पढ़ने से रोका था। चाय बेचने वाले गरीब बाप ने मजबूरियों के चलते अपनी बेटी की शादी उस वक्त कर दी थी, जब वह नौवीं में पढ़ती थी। एक किशोरी को शादी के बाद अचानक से ही अपने पति और ससुराल वालों की सेवा में जुटना पड़ गया, जो कि पढ़ाई से दूर होने की पर्याप्त वजह थी। लेकिन वह बच्ची इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं थी।
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एक बार जब वह अपने मायके गई, तो उसने वहीं रुकने का फैसला किया और उसके भीतर दोबारा स्कूल जाने की चाहत जगी। उसने मेरे स्कूल में दाखिला लिया। मैं उसकी कहानी से बहुत प्रभावित हुआ, फलस्वरूप मैंने उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
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बहुत जल्द एक और घटना घटी। मुझे किसी गुमनाम व्यक्ति का पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि मेरे स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं कक्षा की एक छात्रा की किसी सरकारी योजना से प्राप्त सहायता राशि की मदद से शादी की जा रही है। किसी नाबालिग की शादी कानूनन अवैध है।

दो घटनाओं ने मेरी सोच को काफी हद तक प्रभावित किया

मैंने तत्काल जरूरी कदम उठाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से वह शादी रुकवाई। जब लड़की के परिवार ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों की दुहाई दी, तो मैंने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने की पेशकश की और उसे छात्रावास में भर्ती कर लिया। बेहद कम अंतराल के बीच घटी इन दो घटनाओं ने मेरी सोच को काफी हद तक प्रभावित किया।

अब मैं ढूंढ-ढूंढकर ऐसे बच्चों की मदद करने लगा, जिन्हें वास्तव में मेरी जरूरत थी। ऐसा ही एक और बच्चा था, जिसने अपने परिवार की गरीबी के कारण स्कूल आना छोड़ दिया था और अपने पिता के साथ खेतों में मजदूरी करता था। मैं उसे वापस स्कूल ले आया और इसकी व्यवस्था की कि उसे कभी दोबारा स्कूल न छोड़ना पड़े।

अभी कुछ दिनों पहले की ही बात है, मैंने पंद्रह साल की एक बच्ची अपने स्कूल के हॉस्टल में जगह दी है। मथुरापुर की इस बच्ची की पचास साल के एक कश्मीरी व्यक्ति के साथ जबर्दस्ती शादी कर दी गई थी। जब किसी तरह कश्मीर घाटी से निकलकर यह बच्ची वापस अपने घर पहुंची, तो इसके घरवालों ने इसे पहचानने से ही इन्कार कर दिया। यह बच्ची भी पहले मेरे स्कूल में पढ़ती थी। जब वह अपना दुखड़ा लेकर मेरे पास आई, तो मैंने उसे पनाह तो दी ही, साथ ही उसकी हरसंभव न्यायिक मदद का भी इंतजाम किया है। चुपचाप अपने काम से मतलब रखने पर भी मुझे इज्जत मिलेगी, लेकिन मैं समाज की तमाम गड़बड़ियों में अड़ंगा डालकर कई तरह के जोखिम उठाता हूं। क्योंकि मुझे पता है कि बच्चों का भविष्य केवल किताबों से ही बनेगा।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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