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दीपिका ठाकुर: हरियाणा की इस होनहार बेटी को हॉकी टीम की कमान
गुरदीप सिंह सोढी/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Sat, 19 Mar 2016 02:25 PM IST
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कैप्टन दीपिका ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के यमुनानगर जिले की होनहार बेटी दीपिका ठाकुर भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान बनाया गया है। इस उपलब्धि से उनके घर में खुशी का माहौल है। उनके नेतृत्व में अगले महीने न्यूजीलैंड में होने वाले हॉक बे कप के लिए 18 सदस्यीय महिला हॉकी टीम की घोषणा कर दी गई है।
डिफेंडर की पोजीशन पर खेलने वाली दीपिका इससे पहले भारतीय हॉकी टीम की उप कप्तान थीं। दीपिका को कप्तान बनाए जाने पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। शुक्रवार को आजाद नगर स्थित उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। दीपिका इन दिनों बंगलूरू में चल रहे कैंप में प्रेक्टिस कर रही हैं।
अमर उजाला से फोन पर बातचीत में दीपिका ने कहा कि इस साल हमें रियो ओलंपिक में हिस्सा लेना है। रियो से पहले हॉक बे कप हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस टूर्नामेंट में हमारा अच्छा प्रदर्शन ओलंपिक के लिए संजीवनी का काम करेगा। दीपिका को पूरी उम्मीद है कि इस टूर्नामेंट में हमारा प्रदर्शन शानदार रहेगा।
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महिला हॉकी में रहा है शाहाबाद का दबदबा
भारतीय महिला हॉकी टीम में हरियाणा की खिलाड़ियों की लंबी फेहरिस्त है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में हॉकी नर्सरी है। शाहाबाद में ट्रेनिंग ले चुकी कई लड़कियां भारतीय हॉकी टीम की कप्तान बन चुकी हैं। दीपिका से पहले शाहाबाद की रितु रानी भारतीय टीम की कप्तान रही।
वहीं शाहाबाद की सुरेंद्र कौर, ज्योति व संदीप कौर भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हैं। रोहतक की ममता खर्ब भी भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं। अब यमुनानगर की दीपिका ठाकुर ने कप्तान बनकर शाहाबाद के वर्चस्व में ब्रेक लगा दी है।
एशियन गेम्स में कांस्य जीतने वाली टीम की उप कप्तान रही दीपिका
पिछले साल अक्टूबर में भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान में हुए एशियन गेम्स में मेजबान देश की टीम को हराकर कांस्य पदक पर कब्जा किया था। उस समय दीपिका भारतीय टीम की उप कप्तान थीं। डिफेंडर की पोजीशन पर खेलने वाली दीपिका साल 2001 से हॉकी खेल रही हैं। दीपिका अब तक 200 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मैच व आधा दर्जन इंटरनेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं।
यमुनानगर की पेपर मिल के थापर हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान दीपिका ने हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय दीपिका की उम्र 12 साल थी। स्कूल में दीपिका के चचेरे भाई भूपेंद्र सिंह हॉकी कोच थे। उन्होंने ही सबसे पहले दीपिका के हाथ में हॉकी स्टिक पकड़ाई।
हॉकी में उसकी काबलियत को देखते हुए कुछ समय बाद तेजली खेल स्टेडियम के हॉकी कोच देवेंद्र साहनी ने उन्हें हॉकी में माहिर बनाया। इसके बाद दीपिका ने चंडीगढ़ के राजकीय स्कूल में एडमीशन ले लिया, जहां हॉकी की ट्रेनिंग दी जाती थी। यहां से दीपिका भारतीय हॉकी जूनियर फिर सीनियर टीम में चुनी गईं।
दीपिका के पिता भल्लारपुर पेपर मिल में कार्यरत थे। करीब तीन साल पहले उनका निधन हो चुका है। दीपिका रेलवे कोच फैक्टरी कपूरथला में सीनियर क्लर्क हैं। जगाधरी वर्कशाप के खेल सचिव पंकज चुघ व उसके कोच रहे देवेंद्र साहनी ने भी कप्तान बनाए जाने पर दीपिका को बधाई दी।
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डिफेंडर की पोजीशन पर खेलने वाली दीपिका इससे पहले भारतीय हॉकी टीम की उप कप्तान थीं। दीपिका को कप्तान बनाए जाने पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। शुक्रवार को आजाद नगर स्थित उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। दीपिका इन दिनों बंगलूरू में चल रहे कैंप में प्रेक्टिस कर रही हैं।
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अमर उजाला से फोन पर बातचीत में दीपिका ने कहा कि इस साल हमें रियो ओलंपिक में हिस्सा लेना है। रियो से पहले हॉक बे कप हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस टूर्नामेंट में हमारा अच्छा प्रदर्शन ओलंपिक के लिए संजीवनी का काम करेगा। दीपिका को पूरी उम्मीद है कि इस टूर्नामेंट में हमारा प्रदर्शन शानदार रहेगा।
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महिला हॉकी में रहा है शाहाबाद का दबदबा
भारतीय महिला हॉकी टीम में हरियाणा की खिलाड़ियों की लंबी फेहरिस्त है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में हॉकी नर्सरी है। शाहाबाद में ट्रेनिंग ले चुकी कई लड़कियां भारतीय हॉकी टीम की कप्तान बन चुकी हैं। दीपिका से पहले शाहाबाद की रितु रानी भारतीय टीम की कप्तान रही।
वहीं शाहाबाद की सुरेंद्र कौर, ज्योति व संदीप कौर भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हैं। रोहतक की ममता खर्ब भी भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं। अब यमुनानगर की दीपिका ठाकुर ने कप्तान बनकर शाहाबाद के वर्चस्व में ब्रेक लगा दी है।
एशियन गेम्स में कांस्य जीतने वाली टीम की उप कप्तान रही दीपिका
पिछले साल अक्टूबर में भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान में हुए एशियन गेम्स में मेजबान देश की टीम को हराकर कांस्य पदक पर कब्जा किया था। उस समय दीपिका भारतीय टीम की उप कप्तान थीं। डिफेंडर की पोजीशन पर खेलने वाली दीपिका साल 2001 से हॉकी खेल रही हैं। दीपिका अब तक 200 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मैच व आधा दर्जन इंटरनेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं।
यमुनानगर की पेपर मिल के थापर हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान दीपिका ने हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय दीपिका की उम्र 12 साल थी। स्कूल में दीपिका के चचेरे भाई भूपेंद्र सिंह हॉकी कोच थे। उन्होंने ही सबसे पहले दीपिका के हाथ में हॉकी स्टिक पकड़ाई।
हॉकी में उसकी काबलियत को देखते हुए कुछ समय बाद तेजली खेल स्टेडियम के हॉकी कोच देवेंद्र साहनी ने उन्हें हॉकी में माहिर बनाया। इसके बाद दीपिका ने चंडीगढ़ के राजकीय स्कूल में एडमीशन ले लिया, जहां हॉकी की ट्रेनिंग दी जाती थी। यहां से दीपिका भारतीय हॉकी जूनियर फिर सीनियर टीम में चुनी गईं।
दीपिका के पिता भल्लारपुर पेपर मिल में कार्यरत थे। करीब तीन साल पहले उनका निधन हो चुका है। दीपिका रेलवे कोच फैक्टरी कपूरथला में सीनियर क्लर्क हैं। जगाधरी वर्कशाप के खेल सचिव पंकज चुघ व उसके कोच रहे देवेंद्र साहनी ने भी कप्तान बनाए जाने पर दीपिका को बधाई दी।