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सेल्यूट टू रितु सैनीः अपने जख्मों की ताव छुपा दूसरों को दे रहीं ‘इलाज’
अंकित चौहान/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:40 PM IST
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रोहतक की एसिड अटैक पीड़िता रितु सैनी
- फोटो : अमर उजाला
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रोहतक की इस होनहार बेटी को सेल्यूट कीजिए, जो अपने जख्मों की ताव छुपाकर दूसरों को आगे बढ़ने के प्रेरित कर रही है। चार साल पहले एसिड अटैक ने रितु सैनी को इतना निराश कर दिया कि जीने की चाह ही छोड़ दी थी। अपनों से ही मिले इस जख्म को अपनों ने ही मरहम लगाया और हौसला दिया। इस हौसले ने उसे एक नई मंजिल की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।
100 से ज्यादा एसिड अटैक पीड़ितों को नई राह दी और ‘स्टॉप एसिड अटैक’ कैम्पेन से जुड़कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही हैं। रोहतक के प्रेमनगर की रितु सैनी चार साल पहले 10वीं पास करके आगे बढ़ रही थीं। छोटी उम्र में ही वह नेशनल लेवल की वॉलीबाल खिलाड़ी बन गईं थी। 26 मई 2012 को उसके फुफेरे भाई रामनिवास ने ही उस पर तेजाब फेंक दिया था। तेजाब से रितु का पूरा चेहरा झुलस गया और एक आंख भी खराब हो गई।
परिवार वालों ने उसका पूरा इलाज करवाया और ख्याल भी रखा। जब वह दो महीने बाद घर आई तो शीशे में अपना चेहरा देखकर उसने जीने की चाह ही छोड़ दी। परिवार वालों ने उसे समझाया और हिम्मत दी। दो साल पहले ‘स्टॉप एसिड अटैक कैम्पेन से जुड़ीं। इस कैम्पेन ने रितु को जीने का मकसद दिया और अभियान में शामिल हो उसने अपने जैसी 100 से ज्यादा लड़कियों को प्रोत्साहित किया। उनको न केवल जीने की राह दी बल्कि उनके लिए न्याय की लड़ाई भी लड़ रही हैं।
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पीड़ितों तक खुद एप्रोच करती हैं
रितु ने बताया कि एसिड अटैक पीड़ित उनके पास नहीं आते, बल्कि वह खुद देशभर में आरटीआई लगाकर एसिड अटैक पीड़ितों की जानकारी जुटाती है। खुद उनके पास जाकर उन्हें प्रोत्साहित करती है और उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास भी करती है। एसिड पीड़ितों को जिंदगी नीरस ना लगे, इसके लिए आगरा और लखनऊ में कैफे भी खोला है। जहां ड्रेस डिजाइनिंग, लाइब्रेरी, कैफे सब कुछ है और उसकी पूरी जिम्मेदारी सभी एसिड अटैक पीड़ित ही संभालती हैं। यह अभियान यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में चल रहा है।
यूपी और बिहार में ज्यादा अटैक
एसिड अटैक पीड़ित रितु सैनी ने बताया कि पिछले साल आरटीआई की मदद से देश के सभी प्रदेशों से एसिड अटैक पीड़ितों का ब्योरा जुटाया था। इसमें सबसे ज्यादा 84 एसिड अटैक पीड़ित उत्तर प्रदेश में मिले। वहीं बिहार का ऐसी घटनाओं में दूसरा नंबर है। दिल्ली में भी ऐसी घटनाओं की संख्या काफी अधिक है। हरियाणा का 13वां नंबर आता है।
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100 से ज्यादा एसिड अटैक पीड़ितों को नई राह दी और ‘स्टॉप एसिड अटैक’ कैम्पेन से जुड़कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही हैं। रोहतक के प्रेमनगर की रितु सैनी चार साल पहले 10वीं पास करके आगे बढ़ रही थीं। छोटी उम्र में ही वह नेशनल लेवल की वॉलीबाल खिलाड़ी बन गईं थी। 26 मई 2012 को उसके फुफेरे भाई रामनिवास ने ही उस पर तेजाब फेंक दिया था। तेजाब से रितु का पूरा चेहरा झुलस गया और एक आंख भी खराब हो गई।
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परिवार वालों ने उसका पूरा इलाज करवाया और ख्याल भी रखा। जब वह दो महीने बाद घर आई तो शीशे में अपना चेहरा देखकर उसने जीने की चाह ही छोड़ दी। परिवार वालों ने उसे समझाया और हिम्मत दी। दो साल पहले ‘स्टॉप एसिड अटैक कैम्पेन से जुड़ीं। इस कैम्पेन ने रितु को जीने का मकसद दिया और अभियान में शामिल हो उसने अपने जैसी 100 से ज्यादा लड़कियों को प्रोत्साहित किया। उनको न केवल जीने की राह दी बल्कि उनके लिए न्याय की लड़ाई भी लड़ रही हैं।
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पीड़ितों तक खुद एप्रोच करती हैं
रितु ने बताया कि एसिड अटैक पीड़ित उनके पास नहीं आते, बल्कि वह खुद देशभर में आरटीआई लगाकर एसिड अटैक पीड़ितों की जानकारी जुटाती है। खुद उनके पास जाकर उन्हें प्रोत्साहित करती है और उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास भी करती है। एसिड पीड़ितों को जिंदगी नीरस ना लगे, इसके लिए आगरा और लखनऊ में कैफे भी खोला है। जहां ड्रेस डिजाइनिंग, लाइब्रेरी, कैफे सब कुछ है और उसकी पूरी जिम्मेदारी सभी एसिड अटैक पीड़ित ही संभालती हैं। यह अभियान यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में चल रहा है।
यूपी और बिहार में ज्यादा अटैक
एसिड अटैक पीड़ित रितु सैनी ने बताया कि पिछले साल आरटीआई की मदद से देश के सभी प्रदेशों से एसिड अटैक पीड़ितों का ब्योरा जुटाया था। इसमें सबसे ज्यादा 84 एसिड अटैक पीड़ित उत्तर प्रदेश में मिले। वहीं बिहार का ऐसी घटनाओं में दूसरा नंबर है। दिल्ली में भी ऐसी घटनाओं की संख्या काफी अधिक है। हरियाणा का 13वां नंबर आता है।