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600 किमी तय कर वीकेंड पर बच्चों को पढ़ाने गांव आता है यह युवा

Mon, 07 Mar 2016 12:07 AM IST
चांद मोहम्मद/अमर उजाला, देहरादून
चांद मोहम्मद/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 07 Mar 2016 12:07 AM IST
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ashish dabral make Example, got volunteer of the year award.
आशीष डबराल - फोटो : file photo

उत्तराखंड में पहाड़ से पलायन रोकने को वहां शिक्षा का स्तर सुधारने की हर कोशिश में लगे पौड़ी के छोटे से गांव तिमली के युवा आशीष डबराल के समर्पण को ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी ने भी सलाम किया है।

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29 फरवरी को लंदन में आयोजित कार्यक्रम में उनको कंपनी के विश्व के सभी कर्मचारियों में से उनके सामाजिक कार्यों के आधार पर वालंटियर ऑफ़ द ईयर चुना गया।

ब्रिटिश कंपनी में हैं प्रोजेक्ट मैनेजर
बता दें कि तिमली का यह युवा गुड़गांव स्थित ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर तैनात है और हर वीकेंड पर 600 किमी का लंबा सफर तय कर बच्चों को पढ़ाने गांव में पहुंचता है। शिक्षा की दयनीय हालत और उसके कारण बढ़ते पलायन को देख उन्होंने साल 2014 में गांव में तिमली विद्यापीठ स्थापित की थी।
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ब्रिटिश टेलीकॉम चेयरमैन अवार्ड में यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों में कार्यरत कर्मचारियों में से विगत दिसंबर माह में शीर्ष 10 लोगों को उनके सामाजिक कार्यों के आधार पर चुना गया। उसके बाद 29 फरवरी को अवार्ड समारोह में सभी के द्वारा किए गए कार्यों की एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसके आधार पर जजों ने उनको वालंटियर ऑफ़ द ईयर घोषित किया गया।
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एक लाख रुपये पुरस्कार
सिविल सोसाइटी मिनिस्टर रॉब विल्सन, बीटी ग्रुप के चेयरमैन सर माइकल रेक, बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार क्लेयर बालडिंग ने उन्हें पुरस्कृत किया। पुरस्कार स्वरूप डबराल को करीब एक लाख रुपये मिले हैं। अमर उजाला से बातचीत में डबराल ने बताया कि वह इस धनराशि से विद्यापीठ के लिए एक स्कूली वैन खरीदेंगे, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में आसानी होगी।

डबराल ने बताया कि वह जल्द ही कॉलचेस्टर (यूनाइटेड किंगडम) के प्री और प्राइमरी स्कूल में पार्टनरशिप करने जा रहे हैं। यह भागीदारी विद्यापीठ के बच्चों को माडर्न शिक्षा दिलाने और विकास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया क़ि वह स्कूल में योग ध्यान की कक्षाएं भी चलाएंगे।


गांव में तिमली विद्यापीठ की स्थापना से लेकर लंदन में अवार्ड पाने वाले डबराल की इस सफलता के पीछे उनकी पत्नी मेहा, मित्र अशोक घिल्डियाल, शिक्षिका सुमन नेगी और शिक्षक हेमराज असवाल का बड़ा योगदान है। पत्नी हमेशा उनको प्रोत्साहित करती हैं।

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