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तालाबों के संरक्षण की अलख जगा रहे एमबीए डिग्री होल्डर अभिषेक

Thu, 07 Jul 2016 09:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 07 Jul 2016 09:16 PM IST
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Abhishek are engaged in conservation of ponds
- फोटो : Amar Ujala

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वैश्विक स्तर पर जल संरक्षण पिछले कुछ सालों से प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। देश व रियासत में भी सूखे जैसे हालात का कई बार लोगों को सामना करना पड़ा है। सरकारी स्तर पर जल संरक्षण की तरफ कोशिशेंअभी तक नाकाफी साबित हुई हैं। खासतौर से तालाबों के संरक्षण व अस्तित्व खो चुके तालाबों को दोबारा बहाल करने की तरफ दशकों से कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में स्वैच्छिक तौर पर तालाबों के संरक्षण वउन्हें बहाल करने की तरफ अभिषेक शर्मा ने कदम बढ़ाए हैं।

लोगों में जागरूकता लाकर व सरकारी स्तर पर लोगों को साथ लेकर उन्होंने कई तालाबों उद्धार करवाया है। उनका इरादा संभाग में ज्यादा से ज्यादातालाबों को बचाने का है ताकि तेजी से नीचे जा रहे भूजल को ऊपर लाया जा सके। जम्मू विश्वविद्यालय से  अभिषेक शर्मा के अनुसार वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन स्टूडेंट एंड यूथ नई दिल्ली के कार्यकारी सदस्य के रूप में वैश्विक स्तर पर कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के दौरान उन्हें यह समझ में आया कि विश्वमें ज्यादातर देशों के समक्ष गरीबी, आतंकवाद, जातिवाद से ज्यादा बड़ा और साझा विषय जल संरक्षण का है।
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भारत में भी 35 फीसदी जिले सूखे की मार झेल रहे हैं। ऐसे में अगर तालाबों का संरक्षण और अस्तित्व खो रहे तालाबों को बचा लिया जाए तो भू जल के स्तर में अभूतपूर्व सुधार लाने के साथ सूखे जैसे हालात का सामना किया जा सकता है।  जम्मू में जल संरक्षण समन्वय समिति के प्रभारी और आरोग्य भारती के प्रांत संगठन मंत्री के तौर पर वे तालाबों के संरक्षण का प्रयास कर रहे हैं। अभियान की शुरूआत उन्होंने सर्वे से की और पता चला कि संभाग में करीब 330 तालाब थे जिनमें से अभी पंद्रह से बीस का ही अस्तित्व बचा है। नरसिंह धाम तालाब घग्वाल जिसका इतिहास करीब 2000 साल पुराना है। 
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इस तालाब को बृंदा नाम की महिला ने अपने सोने के कंगन बेचकर खुदवाया था ताकि गांव के लोग सूखे से बच सकें। यह तालाब 37 कनाल जमीन पर था जो अब 17 कनाल में सिमट गया है। इस तालाब के संरक्षण की तरफ उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर संबंधित विधायक से मिलकर काम किया। विधायक ने जिला विकास बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को उठाया और अब उम्मीद है कि इस प्राचीन तालाब का उद्धार हो जाएगा। 

जम्मू शहर के बाहरी इलाके सुंजवा का तालाब यहां से महाराजा प्रताप सिंह पानी मंगवाकर पीते थे। उसको बहाल करने की तरफ भी प्रयास शुरू किए हैं। छन्नी में डिल्ली तालाब को बहाल करवाने की तरफ भी काम किया। वर्तमान में नरवाल, नौग्रा तालाब, भोली देवी देव स्थान तालाब, कालीबाड़ी तालाब, कलीठ तालाब, आरआरएल और तवी घाट तालाब को बहाल करवाने की तरफ प्रयास कर रहे हैं।  

अभिषेक का कहना है कि इस काम में उन्हें तवी आंदोलन के संयोजक चंद्र मोहन शर्मा,  ओ पी शर्मा, प्रो. भोला नाथ व सीएम सेठ जैसे व्यक्तियों के से प्रेरणा मिली है और उनके काम करने का तरीका कुछ इस तरह का है कि वह तालाब की निशानदेही करने के बाद सरंपचों व ग्रामीणों से चर्चा कर बीडीओ से बात करते हैं। इसके बाद सबके हस्ताक्षर करवाकर ज्ञापन जिला उपायुक्त और विधायक को दिया जाता है ताकि तालाब संरक्षण की तरफ ठोस कार्य हो सके। 


उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में पांच लाख तालाबों को बहाल करवाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र 90 फीसदी राशि खर्च कर रहा है और रियासत की सरकार को केवल दस फीसदी ही राशि खर्च करनी है। तालाबों के संरक्षण से ग्रामीण स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा रोजगार सृजन भी हो सकता है। प्रस्तुति - संजीव दुबे

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