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Diesel Vehicles: भारत में डीजल का भविष्य क्या है? जानें भविष्य में परिवहन का मुख्य ईंधन क्या होगा?
Thu, 12 Feb 2026 06:15 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 12 Feb 2026 06:15 PM IST
सार
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताएं बढ़ रही हैं और भारत 2070 तक नेट जीरो एमिशन हासिल करने का वादा कर रहा है। ऐसे में एक जरूरी सवाल पूछा जा रहा है कि डीजल के बाद क्या आएगा? जानें भारत में कैसे बदलेगा परिवहन का भविष्य।
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Delhi Traffic
- फोटो : PTI
विस्तार
ईंधन के तौर पर डीजल दशकों से भारत की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ रहा है। एसयूवी से लेकर बसों और राज्यों के बीच माल ढोने वाले ट्रकों तक, डीजल इंजनों ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार दी है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चिंताओं और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ अब एक अहम सवाल सामने है। डीजल के बाद भारत का रास्ता क्या होगा?
नीति आयोग की एक हालिया अध्ययन रिपोर्ट इस दिशा में स्पष्ट संकेत देती है। यह रिपोर्ट किसी तात्कालिक डीजल प्रतिबंध की बात नहीं करती, बल्कि शून्य-उत्सर्जन मोबिलिटी की ओर एक चरणबद्ध, व्यावहारिक बदलाव की सिफारिश करती है। इसका जोर अचानक झटका देने पर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होने वाले परिवर्तन पर है।
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नीति आयोग की एक हालिया अध्ययन रिपोर्ट इस दिशा में स्पष्ट संकेत देती है। यह रिपोर्ट किसी तात्कालिक डीजल प्रतिबंध की बात नहीं करती, बल्कि शून्य-उत्सर्जन मोबिलिटी की ओर एक चरणबद्ध, व्यावहारिक बदलाव की सिफारिश करती है। इसका जोर अचानक झटका देने पर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होने वाले परिवर्तन पर है।
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क्या डीजल पर तुरंत प्रतिबंध लगेगा?
रिपोर्ट साफ कहती है कि डीजल रातों-रात खत्म नहीं होने वाला। भारत की परिवहन व्यवस्था, खासकर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन, गहराई से डीजल पर निर्भर है। अचानक प्रतिबंध से लॉजिस्टिक्स, रोजगार और कई उद्योगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसलिए यह अध्ययन एक चरणबद्ध रणनीति सुझाता है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते होंगे, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा और स्वच्छ बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे डीजल का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
रिपोर्ट साफ कहती है कि डीजल रातों-रात खत्म नहीं होने वाला। भारत की परिवहन व्यवस्था, खासकर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन, गहराई से डीजल पर निर्भर है। अचानक प्रतिबंध से लॉजिस्टिक्स, रोजगार और कई उद्योगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसलिए यह अध्ययन एक चरणबद्ध रणनीति सुझाता है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते होंगे, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा और स्वच्छ बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे डीजल का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
भविष्य में परिवहन का मुख्य ईंधन क्या होगा?
नेट जीरो लक्ष्य के तहत भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बिजली सबसे अहम ऊर्जा स्रोत बनेगी। दोपहिया, तीन-पहिया, यात्री कारें और शहरी बसें अपेक्षाकृत तेजी से बैटरी-इलेक्ट्रिक तकनीक अपनाएंगी।
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा पहले ही तेजी से लोकप्रिय हो चुके हैं। बैटरी की लागत में गिरावट और सरकारी प्रोत्साहनों के चलते ईवी अब मुख्यधारा की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट यह चेतावनी भी देती है कि इलेक्ट्रिफिकेशन तभी प्रभावी होगा जब बिजली स्वच्छ स्रोतों से आए। अगर बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी ज्यादा रही, तो पर्यावरणीय लाभ सीमित हो जाएंगे। इसलिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार उतना ही जरूरी है।
नेट जीरो लक्ष्य के तहत भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बिजली सबसे अहम ऊर्जा स्रोत बनेगी। दोपहिया, तीन-पहिया, यात्री कारें और शहरी बसें अपेक्षाकृत तेजी से बैटरी-इलेक्ट्रिक तकनीक अपनाएंगी।
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा पहले ही तेजी से लोकप्रिय हो चुके हैं। बैटरी की लागत में गिरावट और सरकारी प्रोत्साहनों के चलते ईवी अब मुख्यधारा की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट यह चेतावनी भी देती है कि इलेक्ट्रिफिकेशन तभी प्रभावी होगा जब बिजली स्वच्छ स्रोतों से आए। अगर बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी ज्यादा रही, तो पर्यावरणीय लाभ सीमित हो जाएंगे। इसलिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार उतना ही जरूरी है।
भारी ट्रक और लंबी दूरी वाले वाहन क्या करेंगे?
हर वाहन के लिए बैटरी समाधान आसान नहीं है। लंबी दूरी तय करने वाले भारी ट्रकों के लिए रिपोर्ट वैकल्पिक रास्ते सुझाती है। इनमें टिकाऊ बायोफ्यूल और लंबी अवधि में हाइड्रोजन आधारित ईंधन शामिल हैं।
इसके अलावा, भविष्य में प्राकृतिक गैस नेटवर्क को भी स्वच्छ गैसों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। जिससे जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने का रास्ता आसान हो सके।
हर वाहन के लिए बैटरी समाधान आसान नहीं है। लंबी दूरी तय करने वाले भारी ट्रकों के लिए रिपोर्ट वैकल्पिक रास्ते सुझाती है। इनमें टिकाऊ बायोफ्यूल और लंबी अवधि में हाइड्रोजन आधारित ईंधन शामिल हैं।
इसके अलावा, भविष्य में प्राकृतिक गैस नेटवर्क को भी स्वच्छ गैसों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। जिससे जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने का रास्ता आसान हो सके।
क्या सिर्फ ईंधन बदलना ही समाधान है?
अध्ययन का एक अहम पहलू यह है कि यह सिर्फ ईंधन बदलने तक सीमित नहीं है। बल्कि कुल ईंधन मांग घटाने पर भी जोर देता है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन, मजबूत रेल फ्रेट नेटवर्क और स्मार्ट शहरी नियोजन से यात्रा की कुल दूरी कम की जा सकती है।
छोटे आवागमन, बेहतर शहर संरचना और कुशल लॉजिस्टिक्स का मतलब है- कम ईंधन खपत, चाहे वह डीजल हो या बिजली।
अध्ययन का एक अहम पहलू यह है कि यह सिर्फ ईंधन बदलने तक सीमित नहीं है। बल्कि कुल ईंधन मांग घटाने पर भी जोर देता है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन, मजबूत रेल फ्रेट नेटवर्क और स्मार्ट शहरी नियोजन से यात्रा की कुल दूरी कम की जा सकती है।
छोटे आवागमन, बेहतर शहर संरचना और कुशल लॉजिस्टिक्स का मतलब है- कम ईंधन खपत, चाहे वह डीजल हो या बिजली।
तो डीजल का भविष्य क्या है?
डीजल तुरंत गायब नहीं होगा, लेकिन उसकी भूमिका धीरे-धीरे सिमटती जाएगी। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ेगी और स्वच्छ तकनीकें परिपक्व होंगी, डीजल की खपत क्रमशः घटेगी।
आम वाहन खरीदारों के लिए इसका मतलब है कि बदलाव अचानक थोपा नहीं जाएगा। उद्योग के लिए यह संकेत है कि इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म, चार्जिंग नेटवर्क और नई ऊर्जा तकनीकों में निवेश का समय आ गया है। नीति आयोग के मुताबिक, भारत का नेट जीरो सफर किसी एक झटके में नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई योजना, नवाचार और विकास-सततता के संतुलन से तय होगा।
डीजल तुरंत गायब नहीं होगा, लेकिन उसकी भूमिका धीरे-धीरे सिमटती जाएगी। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ेगी और स्वच्छ तकनीकें परिपक्व होंगी, डीजल की खपत क्रमशः घटेगी।
आम वाहन खरीदारों के लिए इसका मतलब है कि बदलाव अचानक थोपा नहीं जाएगा। उद्योग के लिए यह संकेत है कि इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म, चार्जिंग नेटवर्क और नई ऊर्जा तकनीकों में निवेश का समय आ गया है। नीति आयोग के मुताबिक, भारत का नेट जीरो सफर किसी एक झटके में नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई योजना, नवाचार और विकास-सततता के संतुलन से तय होगा।