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क्रैश टेस्ट और आधुनिक सेफ्टी नियमों में बदलाव: अब कितनी सुरक्षित होंगी नई कारें? जानें सरकार के नए नियम

Thu, 22 Oct 2026 02:44 PM IST
कुलदीप शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुलदीप शर्मा Updated Thu, 22 Oct 2026 02:44 PM IST
सार

- केंद्र सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्हीकल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स में एक बड़ा बदलाव किया है।
- सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए कारों में खास फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर टेस्ट शामिल किया गया है।
- चोरी कम करने के लिए अक्टूबर 2027 से सभी पैसेंजर कारों में 'इमोबिलाइज़र' डिवाइस अनिवार्य हो जाएगा।

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Vehicle Safety Rules Changed Govt Mandates Stricter Crash Tests for New Cars
प्रतीकात्म इमेज - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों के आंकड़ों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने व्हीकल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स में एक बड़ा बदलाव किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब कार निर्माताओं के लिए गाड़ियों में पैसेंजर सेफ्टी के कड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि आप आने वाले समय में नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो जान लीजिए कि ये बदलाव आपकी सवारी को कैसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाने वाले हैं।

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सरकार ने कौन से सबसे बड़े बदलाव किए?

संशोधित प्रावधानों के तहत अब नई कारों को फ्रंटल यानी आगे से टक्कर और साइड क्रैश के दौरान यात्रियों को अधिकतम सुरक्षा देने के लिहाज से तैयार करना होगा। इसके अलावा, पीछे से टक्कर होने की स्थिति में गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की सुरक्षा के मानकों को भी अपग्रेड किया गया है। इससे आग लगने या शॉर्ट सर्किट का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

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कब से लागू होंगे नये नियम?

नई गाड़ियों के डिजाइन में सिर्फ अंदर बैठे लोगों का ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है।

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  • नए वाहन मॉडलों के लिए ये बदलाव 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे।

  • पैदल यात्रियों की सटीक सुरक्षा जांच के लिए फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर टेस्टिंग डिवाइस का अनिवार्य इस्तेमाल 1 अक्टूबर 2032 से प्रभावी होगा।

चोरी रोकने के लिए 'इमोबिलाइज़र'भी किया जरूरी

कार चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सभी M1 कैटेगरी की पैसेंजर कारों में इमोबिलाइज़र की फिटिंग अनिवार्य कर दी है। यह नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू होगा। यह एक ऐसा स्मार्ट एंटी-थिफ्ट डिवाइस है जो ऑथराइज्ड चाबी या स्मार्ट की के बिना गाड़ी को स्टार्ट नहीं होने देता।

इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर भी किया शामिल

हवाई जहाजों की तर्ज पर अब नई कारों में इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर को भी अनिवार्य नियमों में शामिल किया गया है। यह डिवाइस किसी भी दुर्घटना के ठीक पहले और उस दौरान वाहन की स्पीड, ब्रेकिंग और अन्य तकनीकी गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड करेगा, जिससे हादसों के असली कारणों का सटीक पता लगाने में मदद मिलेगी।

कितनी सुरक्षित हो जाएंगी कारें?

सरकार के इन सख्त और आधुनिक सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से साफ है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में उतरने वाली नई कारें मजबूत क्रैश आर्मर, बेहतर सेंसर और हाई-एंड सेफ्टी फीचर्स से लैस होंगी। यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सफर को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगा। इन बदलावों से कंपनियां सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देने के लिए बाध्य हो जाएंगी, जिससे कार ज्यादा सुरक्षित होगी। साथ ही कार दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में भी कमी आएगी।

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