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High Court: बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को हाईकोर्ट की फटकार, लोन वसूली के लिए रिकवरी एजेंट कार नहीं छीन सकते
Thu, 25 May 2023 12:33 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 25 May 2023 12:33 PM IST
सार
पटना हाईकोर्ट ने उन बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को जमकर फटकार लगाई है, जो कार लोन की ईएमआई समय पर नहीं चुका पाने वाले ग्राहकों के वाहनों को जबरन जब्त करने के लिए रिकवरी एजेंटों की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
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Patna High Court
- फोटो : For Reference Only
विस्तार
पटना हाईकोर्ट ने उन बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को जमकर फटकार लगाई है, जो कार लोन की ईएमआई समय पर नहीं चुका पाने वाले ग्राहकों के वाहनों को जबरन जब्त करने के लिए रिकवरी एजेंटों की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। उच्च न्यायालय ने दोषी बैंकों और वित्त कंपनियों में से हर एक पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद ने 19 मई को एक फैसले में कहा कि रिकवरी एजेंटों द्वारा वाहनों की जब्ती अवैध है और जीवन और आजीविका के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
रिट याचिकाओं के एक समूह का निपटारा करते हुए, न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि यदि ग्राहक ईएमआई के भुगतान में चूक करता है तो बैंक और वित्त कंपनियां वाहन को जब्त करने के लिए रिकवरी एजेंटों की सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। उन्होंने पुलिस को ऐसे वसूली एजेंटों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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उच्च न्यायालय ने पाया कि व्हीकल लोन (वाहन ऋण) सिर्फ बैंकों और वित्त कंपनियों द्वारा सेक्युरिटीजेशन (प्रतिभूतिकरण) के प्रावधानों का पालन करके वसूल किया जाना चाहिए। जो बैंकों और वित्त कंपनियों को चूक करने वाले ग्राहक की गिरवी रखी गई संपत्ति का भौतिक कब्जा हासिल करके वापस नहीं किए गए लोन की वसूली करने का अधिकार देता है।
उच्च न्यायालय का फैसला ईएमआई के भुगतान में चूक करने वाले ग्राहकों के वाहनों को जबरन जब्त करने पर पांच रिट याचिकाओं का निस्तारण करते हुए आया।
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न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद ने 19 मई को एक फैसले में कहा कि रिकवरी एजेंटों द्वारा वाहनों की जब्ती अवैध है और जीवन और आजीविका के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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रिट याचिकाओं के एक समूह का निपटारा करते हुए, न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि यदि ग्राहक ईएमआई के भुगतान में चूक करता है तो बैंक और वित्त कंपनियां वाहन को जब्त करने के लिए रिकवरी एजेंटों की सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। उन्होंने पुलिस को ऐसे वसूली एजेंटों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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उच्च न्यायालय ने पाया कि व्हीकल लोन (वाहन ऋण) सिर्फ बैंकों और वित्त कंपनियों द्वारा सेक्युरिटीजेशन (प्रतिभूतिकरण) के प्रावधानों का पालन करके वसूल किया जाना चाहिए। जो बैंकों और वित्त कंपनियों को चूक करने वाले ग्राहक की गिरवी रखी गई संपत्ति का भौतिक कब्जा हासिल करके वापस नहीं किए गए लोन की वसूली करने का अधिकार देता है।
उच्च न्यायालय का फैसला ईएमआई के भुगतान में चूक करने वाले ग्राहकों के वाहनों को जबरन जब्त करने पर पांच रिट याचिकाओं का निस्तारण करते हुए आया।