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No PUCC-No Fuel: एक फरवरी से ओडिशा में बिना PUCC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, परिवहन मंत्री ने फैसले का किया बचाव
Mon, 29 Dec 2025 05:46 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 29 Dec 2025 05:46 PM IST
सार
ओडिशा सरकार ने उस फैसले का बचाव किया जिसमें बिना वैध पीयूसीसी वाली गाड़ियों को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला नया नहीं है। और पहले से ही खराब एयर क्वालिटी के और खराब होने की वजह से इसे टाला नहीं जा सकता था।
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PUC सेंटर
- फोटो : AI
विस्तार
ओडिशा सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी से जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) (पीयूसी) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। राज्य के वाणिज्य और परिवहन मंत्री बिभूति भूषण जेना ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नया आदेश नहीं है। बल्कि वायु गुणवत्ता के लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए एक अनिवार्य कदम है।
पहले से मौजूद नियमों का पालन
मंत्री ने बताया कि इस फैसले को लेकर गलतफहमी फैल रही है। उनके अनुसार, सरकार ने सिर्फ संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पेट्रोल पंपों पर वही वाहन ईंधन ले सकेंगे, जो वैध पीयूसी सर्टिफिकेट दिखा पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह नियम पहले से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
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पहले से मौजूद नियमों का पालन
मंत्री ने बताया कि इस फैसले को लेकर गलतफहमी फैल रही है। उनके अनुसार, सरकार ने सिर्फ संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पेट्रोल पंपों पर वही वाहन ईंधन ले सकेंगे, जो वैध पीयूसी सर्टिफिकेट दिखा पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह नियम पहले से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
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खराब एयर क्वालिटी बनी चिंता का कारण
जनता की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने सवाल उठाया कि लोग इस कदम से इतने परेशान क्यों हैं, जबकि ओडिशा में एयर क्वालिटी इंडेक्स पहले से ही खराब स्थिति में है। उनका कहना था कि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में सरकार के पास सख्त फैसले लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
जुर्माने को लेकर उठे सवाल, सरकार ने दिए संकेत
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जुर्माने की राशि और नियमों के क्रियान्वयन को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता का कहना है कि जुर्माना ज्यादा है और इस पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि नियम 1 फरवरी से लागू जरूर होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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जनता की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने सवाल उठाया कि लोग इस कदम से इतने परेशान क्यों हैं, जबकि ओडिशा में एयर क्वालिटी इंडेक्स पहले से ही खराब स्थिति में है। उनका कहना था कि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में सरकार के पास सख्त फैसले लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
जुर्माने को लेकर उठे सवाल, सरकार ने दिए संकेत
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जुर्माने की राशि और नियमों के क्रियान्वयन को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता का कहना है कि जुर्माना ज्यादा है और इस पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि नियम 1 फरवरी से लागू जरूर होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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दिल्ली में पहले से लागू हैं ऐसे कड़े नियम
ओडिशा का यह फैसला देश की राजधानी दिल्ली में लागू सख्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों से मिलता-जुलता है। दिल्ली में पहले ही बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन न देने का नियम लागू किया जा चुका है। जिसे आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों का हिस्सा माना जाता है।
दिल्ली सरकार की सख्त निगरानी और कानूनी आधार
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में खुद पेट्रोल पंपों का निरीक्षण कर इन नियमों के पालन की जांच की थी। दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत आदेश जारी कर यह अनिवार्य किया है कि केवल वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ही ईंधन दिया जाए।
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ओडिशा का यह फैसला देश की राजधानी दिल्ली में लागू सख्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों से मिलता-जुलता है। दिल्ली में पहले ही बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन न देने का नियम लागू किया जा चुका है। जिसे आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों का हिस्सा माना जाता है।
दिल्ली सरकार की सख्त निगरानी और कानूनी आधार
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में खुद पेट्रोल पंपों का निरीक्षण कर इन नियमों के पालन की जांच की थी। दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत आदेश जारी कर यह अनिवार्य किया है कि केवल वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ही ईंधन दिया जाए।
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बीएस-मानकों और ग्रैप नियमों का सख्त पालन
दिल्ली में जारी अधिसूचना के मुताबिक, केवल बीएस-VI मानकों के अनुरूप और दिल्ली में पंजीकृत वाहनों को ही शहर में प्रवेश की अनुमति है। इसके अलावा, ग्रेप स्टेज-IV (गंभीर से भी ज्यादा) प्रदूषण की स्थिति में निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की एंट्री पर भी रोक लगाई जाती है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से जुड़ा मामला
ये सभी कदम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुरूप हैं, जिसमें एनसीआर क्षेत्र में बीएस-IV मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुमति दी गई थी। सरकारों का मानना है कि ऐसे उपायों के बिना बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
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