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Nitin Gadkari: सरकार की साल के आखिर तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढा मुक्त बनाने की तैयारी, गडकरी ने किया एलान
Thu, 28 Sep 2023 08:31 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 28 Sep 2023 08:31 PM IST
सार
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति पर काम कर रही है कि साल के आखिर तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर कोई गड्ढे न हों और बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मोड पर सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि ऐसी परियोजनाएं बेहतर तरीके से बनाए रखी जाती हैं।
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Nitin Gadkari
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति पर काम कर रही है कि साल के आखिर तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर कोई गड्ढे न हों और बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मोड पर सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि ऐसी परियोजनाएं बेहतर तरीके से बनाए रखी जाती हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा नितिन गडकरी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
इस साल दिसंबर के आखिर तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को मजबूत कर रहा है।
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इस साल दिसंबर के आखिर तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को मजबूत कर रहा है।
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National Highways
- फोटो : Social Media
आम तौर पर, सड़क निर्माण तीन तरीकों से किया जाता है - बीओटी, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी), और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम)।
"ईपीसी मोड के तहत जो सड़कें बनाई जाती हैं, उन्हें काफी पहले से ही रखरखाव की जरूरत पड़ती है। जबकि बीओटी मोड के तहत, सड़कें बेहतर बनती हैं क्योंकि ठेकेदार जानता है कि उसे अगले 15-20 वर्षों तक रखरखाव की लागत वहन करनी होगी।
"ईपीसी मोड के तहत जो सड़कें बनाई जाती हैं, उन्हें काफी पहले से ही रखरखाव की जरूरत पड़ती है। जबकि बीओटी मोड के तहत, सड़कें बेहतर बनती हैं क्योंकि ठेकेदार जानता है कि उसे अगले 15-20 वर्षों तक रखरखाव की लागत वहन करनी होगी।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने अपने मंत्रालय की विभिन्न पहलों पर एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "इसलिए हमने बड़े पैमाने पर बीओटी मोड के तहत सड़कों के निर्माण का फैसला किया है।"
यह देखते हुए कि बारिश से राजमार्गों को नुकसान हो सकता है, जिसकी वजह से गड्ढे हो सकते हैं, गडकरी ने कहा कि मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों का सुरक्षा ऑडिट कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति बनाई जा रही है कि राष्ट्रीय राजमार्ग गड्ढों से मुक्त हों और इस परियोजना को सफल बनाने के लिए युवा इंजीनियरों को शामिल किया जाएगा।
यह देखते हुए कि बारिश से राजमार्गों को नुकसान हो सकता है, जिसकी वजह से गड्ढे हो सकते हैं, गडकरी ने कहा कि मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों का सुरक्षा ऑडिट कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति बनाई जा रही है कि राष्ट्रीय राजमार्ग गड्ढों से मुक्त हों और इस परियोजना को सफल बनाने के लिए युवा इंजीनियरों को शामिल किया जाएगा।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मंत्रालय ने 1,46,000 किलोमीटर की लंबाई वाले पूरे राष्ट्रीय राजमार्गों की मैपिंग कर ली है और इस साल दिसंबर तक गड्ढों को हटाने के लिए प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को मजबूत कर रहा है।
बीओटी परियोजनाओं में, निजी निवेशक 20-30 वर्षों की रियायती अवधि में राजमार्ग परियोजनाओं के फाइनेंसिंग, निर्माण और संचालन का जोखिम उठाते हैं। फिर डेवलपर्स यूजर चार्ज या टोल के जरिए निवेश की वसूली करते हैं।
ईपीसी परियोजनाओं में, सरकार राजमार्ग के निर्माण के लिए डेवलपर को भुगतान करती है जबकि टोल राजस्व सरकार को मिलता है।
बीओटी परियोजनाओं में, निजी निवेशक 20-30 वर्षों की रियायती अवधि में राजमार्ग परियोजनाओं के फाइनेंसिंग, निर्माण और संचालन का जोखिम उठाते हैं। फिर डेवलपर्स यूजर चार्ज या टोल के जरिए निवेश की वसूली करते हैं।
ईपीसी परियोजनाओं में, सरकार राजमार्ग के निर्माण के लिए डेवलपर को भुगतान करती है जबकि टोल राजस्व सरकार को मिलता है।