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ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग का कड़ा निर्देश: खराब स्कूटर ठीक करें या ब्याज सहित पूरा पैसा लौटाएं

Sat, 10 Oct 2026 05:38 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 10 Oct 2026 05:38 PM IST
सार

मोहाली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Ola Electric Technologies Pvt Ltd और उसके फेज-2 सर्विस सेंटर को खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर के मामले में कड़ा निर्देश दिया है। जानें क्या है पूरा मामला।

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Mohali Consumer Commission Orders Ola Electric to Repair Defective Scooter or Issue Full Refund with Interest
Consumer Commission orders Ola Electric - फोटो : Amar Ujala

विस्तार
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मोहाली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लंबी सर्विस लापरवाही के मामले में ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Ola Electric) और उसके फेस-2 सर्विस सेंटर के खिलाफ एक सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह ग्राहक के खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह ठीक करके दे। या फिर ब्याज सहित खरीदारी की पूरी रकम वापस करे।
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पूरा मामला क्या है और स्कूटर में क्या खराबी आई थी?

यह मामला बरमाजरा के रहने वाले मुन्ना अली से जुड़ा है, जिन्होंने जुलाई 2024 में ओला इलेक्ट्रिक ऐप के जरिए 85,999 रुपये में स्कूटर खरीदा था। जिसमें 6,818 रुपये का बीमा (इंश्योरेंस) भी शामिल था:
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  • खराबी की शुरुआत: अक्तूबर 2025 में स्कूटर के हब मोटर से तेज और अजीब आवाज आनी शुरू हो गई। ग्राहक ने तुरंत वाहन को अधिकृत सर्विस सेंटर पर पहुंचा दिया। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी समस्या हल नहीं हुई।
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  • सर्विस सेंटर की लापरवाही: ग्राहक ने कई फोन कॉल, ईमेल किए और सर्विस के सेंटर चक्कर लगाए। सर्विस टिकट भी जनरेट हुए, लेकिन स्कूटर बिना किसी मरम्मत के दो महीने से अधिक समय तक सेंटर पर पड़ा रहा। 
  • कहा-सुनी और नुकसान: ग्राहक ने आरोप लगाया कि खुले में पड़े रहने के कारण स्कूटर की बॉडी और पेंट खराब हो गया। जिसके समर्थन में उसने तस्वीरें और वीडियो भी पेश किए।

 

ओला इलेक्ट्रिक की किस लापरवाही के चलते कोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाया?

कानूनी प्रक्रिया के दौरान ओला इलेक्ट्रिक की बड़ी लापरवाही सामने आई:
  • जवाब दाखिल करने में विफलता: ओला इलेक्ट्रिक तयशुदा 45 दिनों की अनिवार्य समय सीमा के भीतर कोर्ट में अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने में असफल रही।
  • डिफेंस का अधिकार खत्म: नतीजतन, जून 2026 में आयोग ने कंपनी का पक्ष रखने का अधिकार समाप्त कर दिया।
  • कमीशन की टिप्पणी: आयोग के अध्यक्ष एस.के. अग्रवाल और सदस्य परमजीत कौर ने इसे स्पष्ट तौर पर 'सेवा में कमी' करार दिया।

 

आयोग के निर्देश के तहत ग्राहक को क्या राहत मिलेगी?

आयोग ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं कि कंपनी को निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:
  • 30 दिन का अल्टीमेटम: अगर कंपनी स्कूटर ठीक करना चाहती है, तो पूरी रिपेयरिंग प्रक्रिया को फोटो और वीडियो के जरिए रिकॉर्ड करना होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
  • रिफंड और ब्याज: यदि सर्विस सेंटर 30 दिनों के भीतर स्कूटर को सड़क पर चलने लायक नहीं बना पाता है। तो कंपनी को 85,999 रुपये की मूल कीमत लौटानी होगी। इस राशि पर दिसंबर 2025 में शिकायत दर्ज होने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
  • मुआवजा और कानूनी खर्च: मानसिक उत्पीड़न, परेशानी और मुकदमे के खर्चे के रूप में कंपनी को अतिरिक्त 25,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
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