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Karnatak HC: कर्नाटक हाईकोर्ट ने ‘व्हीलिंग’ पर जताई सख्त नाराजगी, राज्य सरकार से की कड़े कानून बनाने की मांग
Wed, 14 May 2025 01:12 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 14 May 2025 01:12 PM IST
सार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि ‘व्हीलिंग’ जैसे स्टंट को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों को लागू किया जाए और सख्त कदम उठाए जाएं।
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व्हीलिंग स्टंट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI
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विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सड़कों पर बढ़ती 'व्हीलिंग' की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है और इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की जरूरत बताई है। ‘व्हीलिंग’ यानी दोपहिया वाहन के पिछले पहिए पर तेज रफ्तार में स्टंट करना, न सिर्फ चालक और पीछे बैठे यात्रियों की जान को खतरे में डालता है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। न्यायमूर्ति वी. श्रीशनंदा ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मौजूदा कानून इस खतरनाक प्रवृत्ति को रोकने के लिए नाकाफी हैं।
मौजूदा कानूनों में नहीं है सख्ती
फिलहाल ‘व्हीलिंग’ करने वालों पर लापरवाही से गाड़ी चलाने या तेज रफ्तार में वाहन चलाने जैसे आरोप ही लगाए जा सकते हैं, जो कि जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं। न्यायमूर्ति श्रीशनंदा ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम बनाते समय शायद विधायकों ने यह कल्पना नहीं की थी कि कभी कोई दोपहिया वाहन सिर्फ पिछले पहिए पर चलाया जाएगा।
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मौजूदा कानूनों में नहीं है सख्ती
फिलहाल ‘व्हीलिंग’ करने वालों पर लापरवाही से गाड़ी चलाने या तेज रफ्तार में वाहन चलाने जैसे आरोप ही लगाए जा सकते हैं, जो कि जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं। न्यायमूर्ति श्रीशनंदा ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम बनाते समय शायद विधायकों ने यह कल्पना नहीं की थी कि कभी कोई दोपहिया वाहन सिर्फ पिछले पहिए पर चलाया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
राज्य सरकार को दिए सख्त कानून बनाने के निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि ‘व्हीलिंग’ जैसे स्टंट को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों को लागू किया जाए और सख्त कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा, “ऐसी घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है, ऐसे में राज्य और एजेंसियों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस खतरनाक चलन को दबाने के लिए सख्त कदम उठाएं।”
यह भी पढ़ें: दुश्मनों को धूल चटाने की ताकत रखते हैं ये स्वदेशी बख्तरबंद वाहन, जंग में बनते हैं सेना की ढाल
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि युवा मोटरसाइकिल सवार ‘व्हीलिंग’ को बहादुरी समझ बैठते हैं, जबकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह लापरवाही न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि सामाजिक शांति को भी भंग करती है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि ‘व्हीलिंग’ जैसे स्टंट को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों को लागू किया जाए और सख्त कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा, “ऐसी घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है, ऐसे में राज्य और एजेंसियों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस खतरनाक चलन को दबाने के लिए सख्त कदम उठाएं।”
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कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि युवा मोटरसाइकिल सवार ‘व्हीलिंग’ को बहादुरी समझ बैठते हैं, जबकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह लापरवाही न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि सामाजिक शांति को भी भंग करती है।
बाइक स्टंट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI
जमानत याचिका की गई खारिज
अदालत ने यह टिप्पणियां उस समय की जब वह एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी पर आरोप था कि उसने अक्टूबर 2024 में दो पिलियन राइडर्स के साथ व्हीलिंग की और पुलिस के रोकने पर हादसे का शिकार हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ पुलिसकर्मियों से झड़प की बल्कि एक सरकारी मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे पुलिस से व्यक्तिगत विवाद के चलते झूठा फंसाया गया है, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने भी बताया कि आरोपी पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है और घटनास्थल पर हिंसक रवैया अपनाया था।
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न्यायमूर्ति ने दी कानूनी सलाह
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ चार्जशीट दाखिल हो जाने मात्र से जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अगर भविष्य में परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो आरोपी संबंधित अदालत में दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील सादिक एन गुडवाला ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील गिरिजा एस. हीरेमठ ने पक्ष रखा।
अदालत ने यह टिप्पणियां उस समय की जब वह एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी पर आरोप था कि उसने अक्टूबर 2024 में दो पिलियन राइडर्स के साथ व्हीलिंग की और पुलिस के रोकने पर हादसे का शिकार हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ पुलिसकर्मियों से झड़प की बल्कि एक सरकारी मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे पुलिस से व्यक्तिगत विवाद के चलते झूठा फंसाया गया है, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने भी बताया कि आरोपी पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है और घटनास्थल पर हिंसक रवैया अपनाया था।
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न्यायमूर्ति ने दी कानूनी सलाह
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ चार्जशीट दाखिल हो जाने मात्र से जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अगर भविष्य में परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो आरोपी संबंधित अदालत में दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील सादिक एन गुडवाला ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील गिरिजा एस. हीरेमठ ने पक्ष रखा।