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Commercial Vehicles: वर्षों की सुस्ती के बाद ट्रक-बस बाजार में लौट सकती है तेजी, रिपोर्ट में अनुमान
Mon, 26 Jan 2026 06:56 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 26 Jan 2026 06:56 PM IST
सार
नोमुरा ने कहा कि माल ढुलाई दरों में सुधार, GST कटौती से सामर्थ्य बढ़ने और रिप्लेसमेंट डिमांड बढ़ने से भारत का कमर्शियल वाहन सेक्टर अपसाइकिल में प्रवेश कर सकता है।
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DTC BUS
- फोटो : Adobe stock
विस्तार
कई वर्षों तक धीमी रफ्तार से गुजरने के बाद भारत का कमर्शियल व्हीकल (CV) सेक्टर अब सुधार की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। नोमुरा की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर ऑपरेटिंग कंडीशंस और कुछ मजबूत संरचनात्मक कारणों के चलते ट्रक और बस बाजार में चक्रवाती रिकवरी के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं।
अगले 2-3 साल में तेजी पकड़ सकता है बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, यह उछाल अगले दो से तीन वर्षों में धीरे-धीरे आकार ले सकता है। नोमुरा का अनुमान है कि मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल (M&HCV) सेगमेंट में FY26 से FY28 के बीच सालाना 8-10 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। इसे उद्योग के अगले अपसाइकिल की शुरुआत माना जा रहा है।
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अगले 2-3 साल में तेजी पकड़ सकता है बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, यह उछाल अगले दो से तीन वर्षों में धीरे-धीरे आकार ले सकता है। नोमुरा का अनुमान है कि मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल (M&HCV) सेगमेंट में FY26 से FY28 के बीच सालाना 8-10 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। इसे उद्योग के अगले अपसाइकिल की शुरुआत माना जा रहा है।
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फ्लीट ऑपरेटर्स की स्थिति क्यों सुधरी?
रिकवरी की सबसे बड़ी वजह फ्लीट ऑपरेटर्स की बेहतर आर्थिक स्थिति बताई जा रही है। नोमुरा के मुताबिक, मालभाड़ा दरों में मजबूती आई है, जबकि ऑपरेटिंग कॉस्ट लगभग स्थिर बनी हुई है। इसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा है।
हालांकि राजस्व में बहुत तेज बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन फाइनेंसिंग कॉस्ट घटने और बेहतर कैश फ्लो के कारण ऑपरेटर्स की नेट प्रॉफिटेबिलिटी में स्पष्ट सुधार देखा गया है। इससे बैलेंस शीट मजबूत हुई है और नए वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ी है।
टैक्स नीतियों से बढ़ी खरीद की क्षमता?
हालिया जीएसटी दरों में कटौती ने भी मांग को सपोर्ट किया है। इससे ट्रकों की शुरुआती लागत कम हुई है और ईएमआई का दबाव घटा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों से खासकर मीडियम और हेवी सेगमेंट में रिटर्न प्रोफाइल बेहतर हुई है, जिससे खरीदारी धीरे-धीरे लौट रही है।
यह भी पढ़ें - Union Budget 2026: आम बजट से ईवी सेक्टर को बड़ी उम्मीदें, जानें क्या चाहता है इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग?
रिकवरी की सबसे बड़ी वजह फ्लीट ऑपरेटर्स की बेहतर आर्थिक स्थिति बताई जा रही है। नोमुरा के मुताबिक, मालभाड़ा दरों में मजबूती आई है, जबकि ऑपरेटिंग कॉस्ट लगभग स्थिर बनी हुई है। इसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा है।
हालांकि राजस्व में बहुत तेज बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन फाइनेंसिंग कॉस्ट घटने और बेहतर कैश फ्लो के कारण ऑपरेटर्स की नेट प्रॉफिटेबिलिटी में स्पष्ट सुधार देखा गया है। इससे बैलेंस शीट मजबूत हुई है और नए वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ी है।
टैक्स नीतियों से बढ़ी खरीद की क्षमता?
हालिया जीएसटी दरों में कटौती ने भी मांग को सपोर्ट किया है। इससे ट्रकों की शुरुआती लागत कम हुई है और ईएमआई का दबाव घटा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों से खासकर मीडियम और हेवी सेगमेंट में रिटर्न प्रोफाइल बेहतर हुई है, जिससे खरीदारी धीरे-धीरे लौट रही है।
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रिप्लेसमेंट डिमांड क्यों बन रही है अहम?
भारत में ट्रकों की औसत उम्र अब करीब 10 साल तक पहुंच चुकी है, जो ऐतिहासिक रिप्लेसमेंट साइकिल से कहीं ज्यादा है। पुराने वाहन मेंटेन करना महंगा पड़ता है और उनकी ईंधन दक्षता भी कम होती है।
इस वजह से आने वाले वर्षों में रिप्लेसमेंट आधारित डिमांड के मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
भारत में ट्रकों की औसत उम्र अब करीब 10 साल तक पहुंच चुकी है, जो ऐतिहासिक रिप्लेसमेंट साइकिल से कहीं ज्यादा है। पुराने वाहन मेंटेन करना महंगा पड़ता है और उनकी ईंधन दक्षता भी कम होती है।
इस वजह से आने वाले वर्षों में रिप्लेसमेंट आधारित डिमांड के मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
नियम, इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट से मिलेगा और सहारा?
आने वाले समय में सेफ्टी और ब्रेकिंग नॉर्म्स सख्त होने की उम्मीद है, जिससे वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में कई ऑपरेटर्स नियामकीय डेडलाइन से पहले खरीदारी कर सकते हैं, जिससे अल्पकालिक मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में तेजी और एक्सपोर्ट में सुधार को भी सकारात्मक संकेत माना गया है। जीएसटी कटौती के बाद लाइट कमर्शियल व्हीकल (LCV) सेगमेंट में पहले ही सुधार दिखने लगा है। साथ ही, अलग-अलग पावरट्रेन में नए मॉडल लॉन्च भी बाजार को सपोर्ट कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें - Vehicle Scrappage Policy: पुराने वाहनों की विदाई से नया फायदा, स्क्रैपेज नीति के तहत करोड़ों की राहत
आने वाले समय में सेफ्टी और ब्रेकिंग नॉर्म्स सख्त होने की उम्मीद है, जिससे वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में कई ऑपरेटर्स नियामकीय डेडलाइन से पहले खरीदारी कर सकते हैं, जिससे अल्पकालिक मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में तेजी और एक्सपोर्ट में सुधार को भी सकारात्मक संकेत माना गया है। जीएसटी कटौती के बाद लाइट कमर्शियल व्हीकल (LCV) सेगमेंट में पहले ही सुधार दिखने लगा है। साथ ही, अलग-अलग पावरट्रेन में नए मॉडल लॉन्च भी बाजार को सपोर्ट कर सकते हैं।
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कुल मिलाकर क्या संकेत मिलते हैं?
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बेहतर बुनियादी हालात, नीतिगत समर्थन और बढ़ती रिप्लेसमेंट जरूरत ने भारतीय कमर्शियल व्हीकल उद्योग में एक टिकाऊ रिकवरी की संभावनाओं को मजबूत किया है। आने वाले वर्षों में ट्रक और बस बाजार के लिए तस्वीर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सकारात्मक नजर आ रही है।
यह भी पढ़ें - India-EU: भारत में यूरोपीय कारें हो सकती हैं सस्ती, आयात शुल्क में बड़ी कटौती की योजना
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बेहतर बुनियादी हालात, नीतिगत समर्थन और बढ़ती रिप्लेसमेंट जरूरत ने भारतीय कमर्शियल व्हीकल उद्योग में एक टिकाऊ रिकवरी की संभावनाओं को मजबूत किया है। आने वाले वर्षों में ट्रक और बस बाजार के लिए तस्वीर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सकारात्मक नजर आ रही है।
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