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EV Report: सड़कों पर 59 लाख गाड़ियां पर चार्जिंग स्टेशन सिर्फ 26 हजार, क्यों पिछड़ रहा है इंफ्रास्ट्रक्चर?

Sun, 19 Apr 2026 04:57 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sun, 19 Apr 2026 04:57 PM IST
सार

EV charging infrastructure India 2026: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की रफ्तार जितनी तेज है, उतनी ही बड़ी चुनौती इसके चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर खड़ी हो गई है। लोग ईवी तो खरीद रहे हैं, लेकिन रेंज एंग्जायटी (रास्ते में चार्जिंग खत्म होने का डर) अभी भी एक बड़ा रोड़ा है। इस लेख में जानें भारत में ईवी की मौजूदा स्थिति क्या है? और चार्जिंग की समस्या को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

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India’s EV Boom: 5.9 Million Vehicles Road but Only 26,000 Public Chargers
ev charging - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Range anxiety in electric vehicles: भारत में वर्ष 2025 में ईवी की बिक्री 23 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई है, जिससे अब कुल संख्या 59 लाख हो गई है। हालांकि, देश में केवल 26 हजार पब्लिक चार्जर्स हैं, जिसका मतलब है कि हर 225 गाड़ियों पर सिर्फ एक चार्जर उपलब्ध है। चीन जैसे देशों के मुकाबले, जहां एक चार्जर प्रति 7 वाहन है, इस रेस में भारत अभी बहुत पीछे है। चुनौती अब सिर्फ संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि सही जगह पर हाई-स्पीड चार्जर्स लगाने की है।
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लोग ईवी खरीद तो रहे हैं, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर बैटरी खत्म हो गई, तो क्या रास्ते में चार्जर मिलेगा? मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग की समस्या और हाईवे पर धीमे चार्जर्स इस अनुभव को थोड़ा मुश्किल बना देते हैं। हालांकि टाटा मोटर्स के डेटा के अनुसार, रेंज एंग्जायटी धीरे-धीरे कम हो रही है क्योंकि 95% रोड नेटवर्क अब कवर हो चुका है, लेकिन विश्वसनीयता और चार्जिंग स्पीड अभी भी एक मुद्दा है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौतियां और समाधान
जानकारों के मुताबिक भारत के ज्यादातर चार्जर्स 25-30 kW क्षमता के हैं, जबकि नई कारें 60 kW से ज्यादा सपोर्ट करती हैं। इससे चार्जिंग में ज्यादा समय लगता है। यहां पर हैरानी की बात यह है कि देश में औसत चार्जर इस्तेमाल मात्र 4-5% ही है। टाटा पावर के अनुसार, चुनौती चार्जर्स लगाने की नहीं, बल्कि उन्हें सही जगह पर लगाने की है। वहीं, मुंबई-अहमदाबाद जैसे रूट पर अब 180 kW के हाई-स्पीड चार्जर्स लगाए जा रहे हैं, जो मात्र 15-30 मिनट में 80% तक चार्ज कर देते हैं। एक 60 kW DC फास्ट चार्जर को लगाने का खर्च 15-20 लाख रुपये तक आता है, जिससे निजी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा निवेश है।
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स्केल से प्रिसीजन की ओर
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब फोकस प्रिसीजन पर है। यानी जहां सबसे ज्यादा जरूरत हो, वहां सही स्पीड वाले चार्जर्स लगाए जाएं। शहरी इलाकों में लोग होम-चार्जिंग पर निर्भर रहेंगे, जबकि हाईवे पर हाई-स्पीड मल्टी-बे हब्स की जरूरत होगी जहां एक साथ कई गाड़ियां चार्ज हो सकें।

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