Ford का झटका: भौचक्के हैं ग्राहक और डीलर, अगर आपके पास है फोर्ड की कार तो क्या हैं विकल्प
Ford India Exit Plan: डीलर्स के पास तकरीबन 1,000 गाड़ियों की इन्वेंट्री है और उन्होंने इस इन्वेंट्री के लिए बैंकों से 150 करोड़ रुपयों का लोन लिया हुआ है। अगर लोन नहीं चुकाया तो इससे डीलर्स की आर्थिक हालत बिगड़ सकती है, क्योंकि फोर्ड के अचानक ही इस तरह से भारत छोड़ने के एलान से ग्राहक भी अब मौजूदा गाड़ियों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे...
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25 सालों का सफर एक झटके में खत्म कर देने के फोर्ड इंडिया के एलान के बाद डीलर्स और ग्राहक सकते में है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने फोर्ड के इस तरह भारत छोड़ने के एलान पर नाराजगी जताई है। कार निर्माण में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी कंपनी और रेवेन्यू के मामले में चौथी सबसे बड़ी कंपनी फोर्ड ने भारत में 90 के दशक में कारोबार शुरू किया था। कंपनी का कहना है कि पिछले 10 सालों में कंपनी को दो बिलियन अमेरिका डॉलर का घाटा हुआ है। फोर्ड ने घरेलू बाजार में गाड़ियों का निर्माण बंद दिया है, जबकि 2022 की दूसरी तिमाही से निर्यात भी बंद कर देगी।
ग्राहकों के वाहनों की सर्विस जारी रहेगी
हालांकि फोर्ड इंडिया अपने कर्मचारियों, डीलर्स, यूनियन, सप्लायर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करने में जुटी है। फाडा के प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी का कहना है कि वे फोर्ड इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनुराग मेहरोत्रा से इस बारे में चर्चा कर रहे हैं। उनका कहना है कि फोर्ड ने डीलर्स को भरोसा दिलाया है कि ग्राहकों के वाहनों की सर्विस जारी रखेगी। वहीं फोर्ड के इस आश्वासन से डीलर खुश नहीं हैं, क्योंकि इस समय कंपनी के 391 आउटलेट्स के साथ 170 फोर्ड डीलर जुड़े हुए हैं और इन डीलरशिप्स को बनाने में 2,000 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की है। डीलर्स का कहना है कि केवल वाहनों की सर्विसिंग के जरिए इस रकम की भरपाई करना मिश्किल है। फाडा का कहना है कि इन डीलरशिप्स से तकरीबन 40 हजार लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी।
गाड़ी खरीदने के लिए लिया है लोन
वहीं डीलर्स की चिंता इस बात को लेकर भी है कि उनके पास तकरीबन 1,000 गाड़ियों की इन्वेंट्री है और उन्होंने इस इन्वेंट्री के लिए बैंकों से 150 करोड़ रुपयों का लोन लिया हुआ है। अगर लोन नहीं चुकाया तो इससे डीलर्स की आर्थिक हालत बिगड़ सकती है, क्योंकि फोर्ड के अचानक ही इस तरह से भारत छोड़ने के एलान से ग्राहक भी अब मौजूदा गाड़ियों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे। यहां तक कि इन गाड़ियों पर भारी छूट और ऑफर देकर भी ग्राहकों को खरीदने के लिए लुभाना मुश्किल है।
पांच सालों में पांच बड़ी कंपनियां देश छोड़ कर गईं
फाडा का कहना है कि कंपनी के इस एलान से उन डीलर्स को खासा झटका लगा है जो हाल ही में कंपनी से जुड़े थे और मोटा खर्च करके डीलरशिप हासिल की थी। क्योंकि पांच महीने पहले तक कंपनी नए डीलर्स को अपने नेटवर्क में शामिल कर रही थी। वहीं अब फाडा ने डीलर्स के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए सरकार के दखल की मांग की है। फाडा का कहना है कि पिछले कुछ सालों से देश से कंपनियों के छोड़ कर जाने का ट्रेंड बढ़ा है, चाहें इसके लिए कोई भी वजह हों। पिछले कुछ सालों में Harley davidson, Mans Trucks, UN Lohia, Fiat, General Motors जैसी कंपनियों के अलावा कई इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियां रातोंरात हवा हो गईं।
सरकार से की ये एक्ट लाने की मांग
फाडा ने सरकार ने मांग की है कि जल्द से जल्द एक समर्पित फ्रेंचाइजी संरक्षण अधिनियम (Franchisee Protection Act) को लाया जाए। उनके मुताबिक चीन, रूस, जापान, आस्ट्रेलिया, इटली, स्वीडन, ब्राजील, मेक्सिको, मलेशिया और इंडोनेशिया में इस तरह के नियम हैं और कंपनियों के छोड़ कर जाने की स्थिति में उन पर वित्तीय असर कम पड़ता है। गौरतलब है कि उद्योगों के लिए बनी संसदीय समिति पहले ही ऑटोमोबाइल डीलर्स के लिए फ्रेंचाइजी संरक्षण अधिनियम लाने का प्रस्ताव दे चुकी है। वहीं इस तरह के एक्ट के आने से इस पूरे सिस्टम में शामिल जिनमें निर्माता, ऑटो डीलर्स और ग्राहकों को फायदा पहुंचेगा। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि देश की संसद कब इस तरह के एक्ट पर अपनी मुहर लगाती है।
मौजूदा ग्राहकों का क्या होगा
फोर्ड ने इस एलान के बाद एक तरह से Figo, Aspire, Freestyle, EcoSport और Endeavour को बंद कर दिया है क्योंकि ये गाड़ियां तभी तक बेची जाएंगी जब तक मौजूदा स्टॉक डीलरशिप के पास रहेगा। और अगर आप ईकोस्पोर्ट फेसलिफ्ट और न्यू-जेन एंडेवर की प्रतीक्षा कर रहे थे, तो ये वाहन अब भारत में नहीं लाए जाएंगे। हालांकि, मौजूदा ग्राहकों के लिए एक उम्मीद की किरण ये है कि कंपनी ने बिक्री के बाद सर्विस और वारंटी कवरेज प्रदान करने का वादा किया है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा इन्वेंट्री खत्म होने के बाद कंपनी की डीलरशिप्स को सर्विसिंग या सीबीयू (Completely Built Units) वाहनों को बेचने के लिए उपयोग किया जाएगा। हालांकि, कंपनी के इस कदम से फोर्ड कारों की रीसेल वेल्यू पर असर पड़ेगा और बामुश्किल ही खरीदार मिलेंगे, हालांकि कंपनी ने स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता का आश्वासन दिया है।