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Auto Sector: अमेरिका में महंगी सैलरी के बावजूद नहीं मिल रहे मैकेनिक, फोर्ड सीईओ की चेतावनी, एलन मस्क ने यह कहा
Tue, 18 Nov 2025 07:05 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 18 Nov 2025 07:05 PM IST
सार
दिग्गज अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी Ford (फोर्ड) के सीईओ जिम फार्ले ने अमेरिका के जॉब मार्केट पर गंभीर चिंता जताई है।
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Tesla CEO Elon Musk and Ford Motor Company CEO Jim Farley
- फोटो : X/Ford
विस्तार
दिग्गज अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी Ford (फोर्ड) के सीईओ जिम फार्ले ने अमेरिका के जॉब मार्केट पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कंपनी 1,20,000 डॉलर (लगभग 1 करोड़ रुपये सालाना) की सैलरी देने के बावजूद 5,000 मैकेनिक पद भर नहीं पा रही है। फार्ले के मुताबिक यह सैलरी अमेरिका की औसत आय से लगभग दोगुनी है, फिर भी लोग इन नौकरियों के लिए तैयार नहीं हैं।
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"अमेरिका मुश्किल में है" - फोर्ड सीईओ
फार्ले ने अपने पॉडकास्ट 'ऑफिस आवर्स: बिजनेस एडिशन' में कहा, "अमेरिका बड़ी मुश्किल में है। हमारे यहां इमरजेंसी सर्विसेज, ट्रकिंग, फैक्ट्री वर्कर्स, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और ट्रेड वर्कर्स जैसी नौकरियों के लिए 10 लाख से ज्यादा नौकरी खाली पड़े हैं। लेकिन स्किल्ड वर्कर (कुशल लोग) नहीं मिल रहे।"
उन्होंने कहा कि आज ट्रेड स्कूल नहीं हैं और युवा पीढ़ी के लिए ट्रेनिंग में निवेश नहीं किया जा रहा। जबकि पहले ऐसे स्किल्ड वर्कर्स ही अमेरिका के मिडल क्लास को मजबूत बनाते थे।
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फार्ले ने अपने पॉडकास्ट 'ऑफिस आवर्स: बिजनेस एडिशन' में कहा, "अमेरिका बड़ी मुश्किल में है। हमारे यहां इमरजेंसी सर्विसेज, ट्रकिंग, फैक्ट्री वर्कर्स, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और ट्रेड वर्कर्स जैसी नौकरियों के लिए 10 लाख से ज्यादा नौकरी खाली पड़े हैं। लेकिन स्किल्ड वर्कर (कुशल लोग) नहीं मिल रहे।"
उन्होंने कहा कि आज ट्रेड स्कूल नहीं हैं और युवा पीढ़ी के लिए ट्रेनिंग में निवेश नहीं किया जा रहा। जबकि पहले ऐसे स्किल्ड वर्कर्स ही अमेरिका के मिडल क्लास को मजबूत बनाते थे।
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असली समस्या: स्किल की कमी
नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफेक्चर्रस के बोर्ड मेंबर रिच गैरेटी के अनुसार समस्या सिर्फ लोग न मिलने की नहीं, बल्कि सही स्किल्स न मिलने की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश तकनीकी स्कूल और कॉलेज तकनीक की तेज प्रगति के साथ अपडेट नहीं हो रहे। जिसकी वजह से छात्र आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार नहीं हो पा रहे।
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नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफेक्चर्रस के बोर्ड मेंबर रिच गैरेटी के अनुसार समस्या सिर्फ लोग न मिलने की नहीं, बल्कि सही स्किल्स न मिलने की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश तकनीकी स्कूल और कॉलेज तकनीक की तेज प्रगति के साथ अपडेट नहीं हो रहे। जिसकी वजह से छात्र आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार नहीं हो पा रहे।
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बेरोजगारी कम, लेकिन 4 लाख मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स खाली
अमेरिका में बेरोजगारी दर सिर्फ 4.3 प्रतिशत है, फिर भी 4 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खाली पड़ी हैं। फोर्ड ने नए ऑटो टेक्नीशियंस को ट्रेनिंग देने के लिए 4 मिलियन डॉलर का स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया है, लेकिन सीईओ का मानना है कि यह काफी नहीं है।
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अमेरिका में बेरोजगारी दर सिर्फ 4.3 प्रतिशत है, फिर भी 4 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खाली पड़ी हैं। फोर्ड ने नए ऑटो टेक्नीशियंस को ट्रेनिंग देने के लिए 4 मिलियन डॉलर का स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया है, लेकिन सीईओ का मानना है कि यह काफी नहीं है।
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एलन मस्क की प्रतिक्रिया- "लोग कठिन काम नहीं करना चाहते"
वहीं एक अन्य अमेरिकी दिग्गज ईवी निर्माता कंपनी Tesla (टेस्ला) के सीईओ एलन मस्क ने भी इस मुद्दे पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में शारिरीक रूप से कठिन काम करने वाले लोग कम हो रहे हैं। और बहुत से लोग ट्रेड स्किल सीखने के लिए ट्रेनिंग लेने को तैयार नहीं हैं।
यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2034 तक ऑटो टेक्नीशियन जॉब्स में सिर्फ 3-4 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। लेकिन हर साल 67,000 नई भर्तियां करनी पड़ेंगी, क्योंकि पुराने वर्कर्स रिटायर हो रहे हैं।
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यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2034 तक ऑटो टेक्नीशियन जॉब्स में सिर्फ 3-4 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। लेकिन हर साल 67,000 नई भर्तियां करनी पड़ेंगी, क्योंकि पुराने वर्कर्स रिटायर हो रहे हैं।
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