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क्या होता है इथेनॉल फ्यूल? जानिये इसके फायदे और नुकसान

Sun, 14 Jul 2019 01:44 PM IST
Bani Kalra ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Bani Kalra Updated Sun, 14 Jul 2019 01:44 PM IST
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Ethanol fuel advantages and disadvantages all you need to know
इथेनॉल - फोटो : Social

हाल ही में TVS मोटर ने अपनी पहली इथेनॉल से चलने वाली बाइक अपाचे RTR 200 Fi E100 को मार्किट में उतारा। इथेनॉल एक प्रकार का फ्यूल है जिसके इस्तेमाल से प्रदूषण कम होता है इस फ्यूल से गाड़ियां भी चलाई जा सकती हैं। आइये जानते हैं इथेनॉल के फायदे...

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ऐसे बनता है इथेनॉल

इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो इथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती।
 

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क्या हैं इथेनॉल के फायदें

इथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है। इसके अलावा इथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। इथेनॉल में 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है। इथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है।

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हमें क्यों है इथेनॉल फ्यूल की जरूरत

इथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है। इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है। कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकलता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। कहने का मतलब इथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।

ब्राजील में क्यों होता है सबसे ज्यादा इस्तेमा

ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां 100 फीसदी इथेनॉल से चलती हैं, यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं। ब्राजील जैसे देश के लिए यह करना आसान इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी उत्तर प्रदेश जितनी है। स्वीडन और कनाडा में भी इथेनॉल पर गाड़ियां चल रही है। कनाडा में तो इथेनॉल के इस्तेमाल पर सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है।

नुकसान

अगर इथेनॉल की डिमांड बढ़ी तो गन्ने की फसल पर ज्यादा फोकस होगा गन्ने की खेती में पानी काफी लगता है और फिलहाल सिंचाई की व्यवस्था अभी भी उतनी बेहतर नहीं है। ऐसे में बैलेंस बनाकर चलना होगा।
 
 
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