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Nitin Gadkari: गाड़ियों की तरह अब ई-रिक्शा को भी मिलेगी सेफ्टी रेटिंग, लागू होंगे NCAP जैसे सेफ्टी स्टैंडर्ड्स
Mon, 08 Sep 2025 03:42 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 08 Sep 2025 03:42 PM IST
सार
Safety Standards For E-Rickshaw: देश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए केंद्र सरकार अब ई-रिक्शा के लिए भी भारत NCAP जैसी सुरक्षा व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा सम्मेलन में यह घोषणा की।
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ई-रिक्शा को भी मिलेगी सेफ्टी रेटिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत में हर साल होने वाले लाखों सड़क हादसों ने सरकार को गंभीर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार ई-रिक्शा के लिए भी भारत NCAP जैसी सुरक्षा रेटिंग प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है।
गडकरी FICCI रोड सेफ्टी अवॉर्ड्स एंड सिम्पोजियम के 7वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार के लिए सबसे अहम मुद्दों में से एक है। देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है।
युवा सबसे अधिक प्रभावित
गडकरी ने बताया कि कुल मौतों में से लगभग 66.4% लोग 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन और दुर्घटना पीड़ितों की तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाना बेहद जरूरी है।
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ई-रिक्शा पर नया सेफ्टी स्टैंडर्ड
गडकरी ने कहा, “ई-रिक्शा की संख्या देशभर में बहुत ज्यादा है। हम यह आकलन कर रहे हैं कि इन वाहनों की सुरक्षा को कैसे बेहतर किया जाए। इसके लिए भारत NCAP जैसी रेटिंग व्यवस्था लागू करने पर काम चल रहा है।”
साल 2023 में गडकरी ने भारत न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) की शुरुआत की थी, जिसके तहत 3.5 टन तक के वाहनों की सुरक्षा मानकों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया।
हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने से मौतें
गडकरी ने चिंता जताते हुए बताया कि केवल हेलमेट का इस्तेमाल न करने से 30,000 मौतें और सीट बेल्ट न लगाने से 16,000 मौतें हर साल होती हैं। इसके चलते देश की जीडीपी का करीब 3% हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं में नुकसान हो जाता है।
सेफ्टी ऑडिट और अपील
उन्होंने बताया कि देशभर में अलग-अलग जगहों पर सड़क सुरक्षा ऑडिट किए गए हैं ताकि दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान हो सके। गडकरी ने लोगों से अपील की कि दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर इलाज से करीब 50,000 जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
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गडकरी FICCI रोड सेफ्टी अवॉर्ड्स एंड सिम्पोजियम के 7वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार के लिए सबसे अहम मुद्दों में से एक है। देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है।
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युवा सबसे अधिक प्रभावित
गडकरी ने बताया कि कुल मौतों में से लगभग 66.4% लोग 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन और दुर्घटना पीड़ितों की तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाना बेहद जरूरी है।
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ई-रिक्शा पर नया सेफ्टी स्टैंडर्ड
गडकरी ने कहा, “ई-रिक्शा की संख्या देशभर में बहुत ज्यादा है। हम यह आकलन कर रहे हैं कि इन वाहनों की सुरक्षा को कैसे बेहतर किया जाए। इसके लिए भारत NCAP जैसी रेटिंग व्यवस्था लागू करने पर काम चल रहा है।”
साल 2023 में गडकरी ने भारत न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) की शुरुआत की थी, जिसके तहत 3.5 टन तक के वाहनों की सुरक्षा मानकों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया।
हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने से मौतें
गडकरी ने चिंता जताते हुए बताया कि केवल हेलमेट का इस्तेमाल न करने से 30,000 मौतें और सीट बेल्ट न लगाने से 16,000 मौतें हर साल होती हैं। इसके चलते देश की जीडीपी का करीब 3% हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं में नुकसान हो जाता है।
सेफ्टी ऑडिट और अपील
उन्होंने बताया कि देशभर में अलग-अलग जगहों पर सड़क सुरक्षा ऑडिट किए गए हैं ताकि दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान हो सके। गडकरी ने लोगों से अपील की कि दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर इलाज से करीब 50,000 जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।