फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   e-bikes advantages and disadvantages Study shows e-bikes use lead to drop in crude oil demand electric vehicle

e-bikes: क्या ई-बाइक कच्चे तेल के खिलाफ लड़ाई में बड़ा हथियार हैं? अध्ययन में खुलासा- तेल की मांग में गिरावट

Tue, 28 Nov 2023 07:40 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 28 Nov 2023 07:40 PM IST
सार

किसी भी युद्ध में कई प्रमुख खिलाड़ी होते हैं। जैसे राजा, उसके मंत्री, सेनापति और घुड़सवार। लेकिन लड़ाई अक्सर इस आधार पर जीती या हारी जाती है कि पैदल सैनिकों ने कितनी अच्छी तरह लड़ाई लड़ी। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में, और इलेक्ट्रिक वाहनों की सेना में, ये पैदल सैनिक कहीं न कहीं किसी भी तरह की इलेक्ट्रिक बाइक हो सकते हैं।

विज्ञापन
e-bikes advantages and disadvantages Study shows e-bikes use lead to drop in crude oil demand electric vehicle
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

किसी भी युद्ध में कई प्रमुख खिलाड़ी होते हैं। जैसे राजा, उसके मंत्री, सेनापति और घुड़सवार। लेकिन लड़ाई अक्सर इस आधार पर जीती या हारी जाती है कि पैदल सैनिकों ने कितनी अच्छी तरह लड़ाई लड़ी। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में, और इलेक्ट्रिक वाहनों की सेना में, ये पैदल सैनिक कहीं न कहीं किसी भी तरह की इलेक्ट्रिक बाइक हो सकते हैं।
विज्ञापन


गैर-लाभकारी मीडिया आउटलेट्स के ऑस्ट्रेलिया स्थित नेटवर्क द कन्वर्सेशन के मुताबिक, इस समय दुनिया भर में लगभग 280 मिलियन (28 करोड़) इलेक्ट्रिक बाइक या ई-बाइक हैं। और यह संख्या बढ़ रही है। इस आंकड़े में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के विभिन्न संस्करण शामिल हैं - जैसे मोपेड और स्कूटर से लेकर मोटरसाइकिल तक। और यह आंकड़ा अनुमानित 20 मिलियन (2 करोड़) इलेक्ट्रिक कारों या 13 लाख इलेक्ट्रिक बसों से काफी ज्यादा है। यदि ग्रीन वर्ल्ड बनाने की इस लड़ाई में स्पष्ट आह्वान किया गया है, तो सबसे आक्रामक आक्रमण का नेतृत्व निश्चित रूप से ई-बाइक की बटालियन द्वारा किया जा रहा है।
विज्ञापन


लेकिन ई-बाइक ने इतनी तेज रफ्तार से और कुछ ही वर्षों की अपेक्षाकृत कम समय में लोकप्रियता क्यों हासिल की है? जाहिर तौर पर इस सवाल का जवाब बहुत साफ है। 

e-bikes advantages and disadvantages Study shows e-bikes use lead to drop in crude oil demand electric vehicle
Electric Cycle - फोटो : Social Media
जागरूकता से दिमाग के खेल खेले जाते हैं
जलवायु परिवर्तन से लड़ने के व्यवहार्य तरीके के रूप में ग्रीन मोबिलिटी (हरित गतिशीलता) विकल्पों की चर्चा हर जगह है। निश्चित रूप से, इसके आलोचक भी हैं जो बताते हैं कि बैटरी के लिए महत्वपूर्ण खनिज का खनन धरती के लिए कितना हानिकारक है। या ईवी-निर्माण प्रक्रियाएं कितनी ज्यादा पानी का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन आम सहमति यह है कि शून्य उत्सर्जन ही अच्छा उत्सर्जन है। जबकि ज्यादातर लोग एक साफ और हराभरा ग्रह चाहते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग अपना वेतन आते ही ईवी पर स्विच नहीं कर सकते हैं।

किफायती वाहन अपनाना एक सामरिक कदम है
इलेक्ट्रिक कारें खरीदना महंगा है। हां, वे अभी भी बहुत महंगी हैं, इस बात की परवाह किए बिना हैं कि कोई दुनिया के किस हिस्से में है। और यह विशेष रूप से तब होता है जब इलेक्ट्रिक कारों और इंजन वाली कारों के बीच अपफ्रंट कॉस्ट (अग्रिम खरीद मूल्य) की तुलना की जाती है। अमेरिका में, एक इलेक्ट्रिक कार मॉडल और उसके पारंपरिक समकक्ष (आईसीई) के बीच औसत कीमत का अंतर 3,800 डॉलर या 3.16 लाख रुपये है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क हर माइक्रो सेकंड में इतना कमा सकते हैं लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों के लिए, यह थोड़ा ज्यादा है।

इसके बजाय एक इलेक्ट्रिक मोपेड के बारे में क्या खयाल है? या एक ई-स्कूटर, या एक ई-साइकिल? अपेक्षाकृत किफायती और छोटे शहर-आधारित आवाजाही के लिए उपयुक्त। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन व्यावहारिक, किफायती और निश्चित रूप से उत्सर्जन के बिना होते हैं। और एक मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे की सीमित जरूरतों के साथ, इन्हें इच्छानुसार और लगभग कहीं भी फिर से चार्ज किया जा सकता है।

e-bikes advantages and disadvantages Study shows e-bikes use lead to drop in crude oil demand electric vehicle
Electric Scooters - फोटो : Tier
काले सोने की चमक चुराना
द कन्वर्सेशन के अनुसार, संचयी रूप से, ई-बाइक की लोकप्रियता ने पहले ही दैनिक तेल की मांग में 10 लाख बैरल की कटौती कर दी है। यह प्रतिदिन वैश्विक मांग का लगभग एक प्रतिशत है। या अब तक इलेक्ट्रिक कारों ने जो हासिल किया है उससे चार गुना ज्यादा।

दुनिया भर में कई अध्ययनों ने आगे संकेत दिया है कि बैटरी तकनीक द्वारा संचालित माइक्रो-मोबिलिटी ऑप्शन वास्तव में वैश्विक शहरों में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक मास-ट्रांजिट ऑप्शंस जितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। और लोग बड़े पैमाने पर ऐसे मोबिलिटी ऑप्शंस को स्वीकार भी कर रहे हैं। दिसंबर 2021 में मैकिन्से के सर्वेक्षण में पाया गया कि 70 प्रतिशत उत्तरदाता अपने दैनिक आवागमन के लिए माइक्रो-मोबिलिटी ऑप्शंस का इस्तेमाल करने के इच्छुक थे। माइक्रो-मोबिलिटी अनिवार्य रूप से पांच मील या आठ किलोमीटर तक की दूरी के लिए होती है।

लेकिन छुपी हुई बाधाओं का क्या?
ई-बाइक सुपरहीरो की तरह हैं, है ना? बिल्कुल नहीं। यूरोप के कई शहरों में ई-मोपेड, ई-स्केटबोर्ड और यहां तक कि ई-साइकिल जैसे वैरिएंट के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त नीति है। शहर प्रशासकों का दावा है कि इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। और इसे ठीक से रेगुलेट (विनियमित) करने की जरूरत है। इसके अलावा, मौसम संबंधी कारक भी एक बाधा हैं। क्योंकि जो इलाके बहुत ठंडे या बहुत गर्म होते हैं, वहां के लोग ऐसे विकल्पों को अपनाने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

यह कहे जाने के बावजूद, ई-बाइक न सिर्फ यहां लंबे समय तक रहेंगी। बल्कि उम्मीद है कि वे जल्द ही वैश्विक सड़कों पर कब्जा कर लेंगी।
ई बाइक
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed