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Electric cars: क्या इलेक्ट्रिक कार में सफर करने से मितली बढ़ जाती है? जानें मोशन सिकनेस की वजह

Fri, 27 Feb 2026 11:36 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 27 Feb 2026 11:36 PM IST
सार

दुनियाभर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां आम होती जा रही हैं, लेकिन कई यात्री एक नया सवाल पूछ रहे हैं- क्या इलेक्ट्रिक कार में यात्रा करने से मोशन सिकनेस बढ़ सकती है?

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Do Electric Cars Cause More Motion Sickness Than Petrol Cars?
Electric Car - फोटो : Tesla

विस्तार

दुनियाभर के कई देशों में इलेक्ट्रिक कारों में दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ यात्रियों के मन में एक नया सवाल उठ रहा है। क्या इलेक्ट्रिक कार में यात्रा करने से मोशन सिकनेस ज्यादा हो सकती है? कुछ लोगों का कहना है कि ईवी में बैठने पर उन्हें मितली, चक्कर या सिरदर्द महसूस होता है, जबकि सामान्य पेट्रोल या डीजल कारों में ऐसा नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या सुरक्षा से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक कारों के अलग तरह के ड्राइविंग अनुभव से जुड़ी है।

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मोशन सिकनेस क्या है और यह क्यों होती है?
मोशन सिकनेस तब होती है जब दिमाग को आंखों, शरीर और अंदरूनी कान से मिलने वाले संकेत आपस में मेल नहीं खाते।
उदाहरण के लिए, आंखें रफ्तार देख रही होती हैं लेकिन अंदरूनी कान को वैसा महसूस नहीं होता, या इसका उलटा। इसी भ्रम के कारण मितली, चक्कर, पसीना, थकान और सिरदर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। यह समस्या कार, बस, ट्रेन, नाव और यहां तक कि वर्चुअल वातावरण में भी हो सकती है। कुछ लोग आनुवंशिक कारणों, चिंता, हार्मोनल बदलाव या कान की संवेदनशीलता के कारण ज्यादा प्रभावित होते हैं। 

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क्या इलेक्ट्रिक कारें सामान्य कारों से ज्यादा मोशन सिकनेस पैदा करती हैं?
सीधे तौर पर इलेक्ट्रिक कारें मोशन सिकनेस की वजह नहीं होतीं, लेकिन उनकी कुछ खास विशेषताएं कुछ यात्रियों में इसकी संभावना बढ़ा सकती हैं।
पेट्रोल या डीजल कारों में इंजन की आवाज, गियर बदलने का एहसास और हल्का कंपन होता है। जिससे दिमाग को गाड़ी की गति का अंदाजा मिलता रहता है। इलेक्ट्रिक कारें इन संकेतों को काफी हद तक खत्म कर देती हैं। नतीजा यह होता है कि सफर ज्यादा शांत और स्मूद लगता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह नया अनुभव शरीर को भ्रमित कर सकता है।

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इलेक्ट्रिक कारों में कौन से फैक्टर मितली या चक्कर की वजह बन सकते हैं?
इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी कुछ खास बातें मोशन सिकनेस को बढ़ा सकती हैं:

  • तेज रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग: बिना ज्यादा ब्रेक लगाए अचानक रफ्तार कम होना

  • इंस्टेंट टॉर्क: अचानक तेज एक्सीलरेशन

  • शांत केबिन: इंजन की आवाज न होने से मूवमेंट का अंदाजा कम लगना

  • बेहद स्मूद सस्पेंशन: कंपन कम होने से संतुलन तंत्र भ्रमित होना

  • स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल: मोबाइल या इंफोटेनमेंट स्क्रीन देखने से मितली बढ़ना

ये सभी फैक्टर मिलकर खासकर घुमावदार रास्तों या बार-बार रुकने वाले ट्रैफिक में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

इलेक्ट्रिक कार में मोशन सिकनेस से कैसे बचा जा सकता है?
कुछ आसान उपाय इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं:

  • आगे वाली सीट पर बैठें या खुद ड्राइव करें

  • सड़क की ओर देखें, स्क्रीन पर नजर न टिकाएं

  • ड्राइवर से स्मूद एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग को कहें

  • केबिन में ताजी हवा का प्रवाह रखें

  • सफर से पहले भारी भोजन से बचें

  • लंबी यात्रा में बीच-बीच में ब्रेक लें

कुछ लोगों को एक्यूप्रेशर बैंड या अदरक आधारित उपायों से भी राहत मिलती है।

संवेदनशील यात्रियों के लिए डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों और शरीर के संकेतों को संतुलित रखना सबसे अहम है। स्थिर बैठने की स्थिति बनाए रखें और यात्रा की दिशा के अनुरूप देखें। अगर लक्षण बार-बार या ज्यादा गंभीर हों, तो डॉक्टर मोशन सिकनेस की दवा लेने की सलाह दे सकते हैं, खासकर लंबी यात्राओं के लिए। 
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि समय के साथ ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक कारों की ड्राइविंग शैली के आदी हो जाते हैं और लक्षण अपने आप कम हो जाते हैं। 

क्या इलेक्ट्रिक कारें सच में समस्या बढ़ाती हैं?
इलेक्ट्रिक कारें अपने आप में मोशन सिकनेस को नहीं बढ़ातीं, लेकिन उनका शांत और स्मूद ड्राइविंग अनुभव कुछ लोगों में असहजता पैदा कर सकता है। थोड़ी समझदारी और छोटे बदलावों के साथ ज्यादातर यात्री EV में भी आरामदायक सफर कर सकते हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन आम होते जाएंगे, यात्रियों का शरीर भी इस नए अनुभव के साथ खुद को ढाल लेगा। 

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