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SDV: भारत में तेजी से बढ़ रहा 'सॉफ्टवेयर-फर्स्ट' कारों का क्रेज, 95% खरीदार ज्यादा पैसे देने को तैयार

Wed, 18 Feb 2026 02:25 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Wed, 18 Feb 2026 02:25 PM IST
सार

Deloitte automotive consumer study 2026: डेलॉयट ग्लोबल ऑटोमोटिव कंज्यूमर स्टडी के अनुसार भारत का ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDV) और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है। करीब 95% ग्राहक सेफ्टी, सिक्योरिटी और स्मार्ट इन-कार फीचर्स के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को तैयार हैं।

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Data Shows India’s Auto Market Shifts Toward Software-Defined Vehicles
सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल - फोटो : एआई

विस्तार

भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से सॉफ्टवेयर-फर्स्ट भविष्य की ओर बढ़ रहा है। सॉफ्टवेयर फर्स्ट किसी गाड़ी के डिजाइन और विकास में हार्डवेयर से पहले उसके सॉफ्टवेयर (ओएस, एप्स, फीचर्स) को प्राथमिकता देता है। इसका मतलब ये है कि ग्राहक अब सिर्फ माइलेज या इंजन देख कर कार नहीं लेते बल्कि वो ये भी देखते हैं कि ये कितनी स्मार्ट है? 2026 डेलॉयट ग्लोबल ऑटोमोटिव कंज्यूमर स्टडी के अनुसार, भारत एक 'सॉफ्टवेयर-फर्स्ट' भविष्य की ओर बढ़ रहा है। अब डिजिटल फीचर्स ही कार की पहचान बन रहे हैं। अध्ययन के अनुसार भारत में 95 प्रतिशत ग्राहक अपनी गाड़ियों में सेफ्टी, सिक्योरिटी और वाहन की स्थिति की जानकारी देने वाली तकनीक के लिए अधिक दाम देने के लिए तैयार हैं। यूजर्स का ये बदलता व्यवहार सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल (SDV) की ओर इशारा करता है।
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सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) का बढ़ता प्रभाव

रिपोर्ट की मानें तो भारतीय ग्राहकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब वाहन का मूल्य केवल मैकेनिकल क्षमता से नहीं बल्कि कनेक्टेड फीचर्स, सॉफ्टवेयर अपडेट और डिजिटस, सेवाओं से तय होती हैं। भारत में 95 प्रतिशत खरीदार इन कार फीचर्स जैसे- सुरक्षा, सुरक्षा और गाड़ी की हेल्थ रिपोर्ट के लिए ज्यादा भुगतान करने के लिए तैयार हैं। ये एक सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) युग की शुरुआत है जहां एक कार मैकेनिकल मशीन से ज्यादा एक स्मार्ट डिवाइस है। रिपोर्ट के कुछ मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
  • 81% ग्राहक मानते हैं कि सॉफ्टवेयर-आधारित कारें (SDVs) उनके लिए बहुत मददगार हैं।
  • 84% भारतीय ग्राहक अपनी कारों में एआई-आधारित कस्टमाइजेशन के पक्ष में हैं।
  • 70% लोग बेहतर तकनीक मिलने पर अपनी मौजूदा कार ब्रांड को बदलने के लिए तैयार हैं।
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सुरक्षा और डाटा प्राइवेसी: एक बड़ी चुनौती

इस बदलाव में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय ग्राहक आज भी कार खरीदते समय सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हैं। ज्यादातर ग्राहक सुरक्षा से जुड़े फीचर्स को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। हालांकि एक खतरा डाटा प्राइवेसी को लेकर भी है। कनेक्टेक कारों में डाटा चोरी का खतरा भी बढ़ा है। आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:

  • 73% ग्राहक अपने पर्सनल डिवाइस का डाटा साझा करने को लेकर चिंतित हैं।
  • 72% खरीदारों को अपनी लोकेशन शेयर करने में असुरक्षा महसूस होती है।

इस डाटा से स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे कारें स्मार्ट होंगी, कंपनियों को डाटा पारदर्शिता और सुरक्षा पर ज्यादा काम करने की जरूरत पड़ेगी।

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डीलरशिप पर आज भी भरोसा बरकरार

डिजिटल फीचर्स की लोकप्रियता के बावजूद भारतीय ग्राहक आज भी इंसानी जुड़ाव को ज्यादा तरजीह देते हैं। अभी भी डीलरशिप में फिजिकल चैनल को ज्यादा अहमियत दी जाती है। रिपोर्ट बताती है कि 58 प्रतिशत उपभोक्ता अभी भी डीलर्स पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। साथ ही अधिकृत सर्विस सेंटर मेंटेनेंस के लिए ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में डिजिटल और फिजिकल दोनों अनुभवों की जरूरत पड़ेगी।

ईवी और हाइब्रिड का भविष्य


रिपोर्ट में ग्राहकों में हो रहे बदलाव को भी देखा जा सकता है। लगभग 70 प्रतिशत ग्राहक ऐसे हैं जो नई तकनीक के लिए ब्रांड बदलने के लिए तैयार हैं। जबकि 38 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो पहले ही बेहतर तकनीक वाले ब्रांड्स की तरफ स्विच कर चुके हैं। इसके अलावा, 79 प्रतिशत ग्राहक वाहन निर्माता कंपनियों से सीधे बीमा खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि वाहन खरीदने के लिए सोशल मीडिया और कंपनी की वेबसाइट का रिसर्च में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां तक इंजन विकल्पों की बात है तो रिपोर्ट में ये आंकड़े सामने आए:

  • ICE इंजन: पेट्रोल और डीजल इंजन अभी भी खरीद की पहली पसंद बने हुए हैं।
  • हाइब्रिड: जो लोग बदलाव चाहते हैं वे हाइब्रिड कारों को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
  • ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल): ईवी को लेकर उत्साह तो है लेकिन पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क की कमी, चार्जिंग में लगने वाला समय और बैटरी सुरक्षा जैसी चिंताएं अभी भी बड़ी बाधा हैं।
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