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क्रिसिल की रिपोर्ट: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में तीन लाख करोड़ रुपये तक के कारोबार का मौका, जानें डिटेल्स
Wed, 13 Apr 2022 11:01 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 13 Apr 2022 11:01 AM IST
सार
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अगले पांच वर्षों में वित्तीय वर्ष 2026 कर भारत में विभिन्न हितधारकों के लिए लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का मौका पेश करेंगे।
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MG ZS EV 2022 Electric Car
- फोटो : MG Motor (For Reference Only)
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विस्तार
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अगले पांच वर्षों में वित्तीय वर्ष 2026 कर भारत में विभिन्न हितधारकों के लिए लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का मौका पेश करेंगे। रेटिंग एजेंसी Crisil (क्रिसिल) के एक विश्लेषण ने इस ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक Shared mobility (साझा परिवहन व्यवस्था), बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी और पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने को लेकर रुचि और सरकारी समर्थन से ईवी के क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है।
रेटिंग फर्म द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि, इन मौकों में मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के साथ-साथ कंपोनेंट निर्माताओं के लिए विभिन्न व्हीकल सेगमेंट में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का संभावित राजस्व और वाहन फाइनेंसरों के लिए संवितरण के रूप में 90,000 करोड़ रुपये, साझा गतिशीलता और शेष राशि के लिए बीमा लेखांकन शामिल हैं।
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रेटिंग फर्म द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि, इन मौकों में मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के साथ-साथ कंपोनेंट निर्माताओं के लिए विभिन्न व्हीकल सेगमेंट में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का संभावित राजस्व और वाहन फाइनेंसरों के लिए संवितरण के रूप में 90,000 करोड़ रुपये, साझा गतिशीलता और शेष राशि के लिए बीमा लेखांकन शामिल हैं।
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Tata Nexon EV
- फोटो : Reddit
ईवी अपनाने में लगातार बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि ज्यादा से ज्यादा लोग इंटरनल कंब्शन इंजन (आईसीई) वाहनों को छोड़ रहे हैं। वाहन पोर्टल के आंकड़ों से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (3W) की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022 में रजिस्ट्रर किए गए 3W के लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ गई, जो वित्त वर्ष 2018 में 1 प्रतिशत से भी कम थी।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (2W) और बसों के लिए, ये क्रमशः 2% और 4% तक बढ़ गया।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (2W) और बसों के लिए, ये क्रमशः 2% और 4% तक बढ़ गया।
Evtric Motors high-speed electric two-wheelers
- फोटो : EVTRIC Motors
यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार के राजकोषीय और गैर-वित्तीय उपायों से प्रेरित होकर छोटे शहर भी ईवी के मैदान में एंट्री कर रहे हैं। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में इलेक्ट्रिक कारों और 3W की बिक्री में टॉप 10 जिलों का योगदान वित्त वर्ष 2021 में 55-60 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2022 में 25-30 प्रतिशत हो गया। 2W के लिए, यह 40-45 प्रतिशत से गिरकर 15-20 प्रतिशत हो गया।
One Moto Electa Electric Scooter
- फोटो : One Moto
ईंधन की बढ़ती कीमतों और आईसीई वाहनों की उच्च लागत उनके खरीदारी के सामर्थ्य पर असर डाल रही है, और ईवी के लिए सरकारी समर्थन भी एक भूमिका निभा रहा है। अध्ययन के अनुसार, भारत में फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME-India), फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लान और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी केंद्रीय योजनाओं ने देश की ईवी की यात्रा को आगे बढ़ाया है।
कई राज्य सरकारों ने ग्रीनफील्ड मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए डिमांड इंसेंटिव और पूंजी सहायता भी प्रदान की है।
कई राज्य सरकारों ने ग्रीनफील्ड मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए डिमांड इंसेंटिव और पूंजी सहायता भी प्रदान की है।
इलेक्ट्रिक बस सेवा
- फोटो : twitter.com/Jduonline
क्रिसिल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 तक ईवी क्षेत्र में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत, तिपहिया के संदर्भ में 25 से 30 प्रतिशत और कार तथा बसों के मामले में पांच प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता में तेजी बनी रहेगी क्योंकि लोग अब पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह ईवी को पसंद कर रहे हैं।
Tata Tigor EV
- फोटो : Tata Motors
रेटिंग एजेंसी के निदेशक जगन नारायण पद्मनाभन ने कहा, "ईवी के आने से उद्योग में आए नए और मौजूदा दोनों निर्माताओं के लिए मौके हैं। ये मौके इनोवेशन और तेजी से उभर रहे यात्री और माल ढुलाई वाहनों में हैं। ईवी इंडस्ट्री के परिवेश से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार संरचनात्मक रूप से बैटरी स्वैपिंग (अदला-बदली) नीति तैयार करने पर विचार कर रही है। इस तरह की सुविधाएं ईवी क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगी। इसके अलावा फाइनेंसिस की उपलब्धता में सुधार से भी ईवी की स्वीकार्यता बढ़ेगी।"