फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Consumer court orders Ola Electric to pay Rs 1.5 lakh compensation for failing to deliver a pre-booked scooter

Ola: उपभोक्ता अदालत की ओला को फटकार, स्कूटर की डिलीवरी में देरी के लिए 1.5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश

Thu, 10 Oct 2024 04:13 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 10 Oct 2024 04:13 PM IST
सार

एर्नाकुलम उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता को समय पर प्री-बुक किए गए स्कूटर की डिलीवरी न करने पर 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
Consumer court orders Ola Electric to pay Rs 1.5 lakh compensation for failing to deliver a pre-booked scooter
Ola Electric Scooter - फोटो : PTI

विस्तार

एर्नाकुलम उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता को समय पर प्री-बुक किए गए स्कूटर की डिलीवरी न करने पर 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला अलुवा निवासी नीनू ससीन्द्रन द्वारा ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज, बंगलूरू के खिलाफ दायर की गई शिकायत के जवाब में आया है। 
विज्ञापन

शिकायत के अनुसार, नीनू ससीन्द्रन ने अक्तूबर 2021 में अग्रिम राशि का भुगतान कर Ola S1 (ओला एस1) इलेक्ट्रिक स्कूटर बुक किया था। 17 मार्च 2022 को ओला इलेक्ट्रिक ने उन्हें ईमेल के जरिए बताया कि भुगतान विंडो खुली है, लेकिन ओला एस1 मॉडल बंद कर दिया गया है। उन्हें अपग्रेडेड ओला एस1 प्रो की पेशकश की गई, जो उनके बजट में थी। इसके बाद उन्होंने बुकिंग राशि सहित 1,15,332 रुपये का पूरा भुगतान किया। 

यह भी पढ़ें - Ola Electric: बढ़ रही हैं ओला इलेक्ट्रिक की मुश्किलें, सरकार ने प्रमाणन एजेंसी से शिकायतों की जांच करने को कहा
विज्ञापन
विज्ञापन

ऑर्डर कंफर्मेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन समेत सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद कंपनी ने डिलीवरी की अनुमानित तारीख बताई। इसके आधार पर नीनू ससींद्रन ने अपना मौजूदा पेट्रोल स्कूटर बेच दिया। कई बार फॉलो-अप करने के बावजूद स्कूटर डिलीवर नहीं हुआ। 12 मई, 2022 को नीनू ससींद्रन के पति को ओला से होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया, जिसमें डिलीवरी के लिए अतिरिक्त 30,000 रुपये की मांग की गई। 
विज्ञापन

फोन करने वाले पर उन्हें कुछ संदेह हुआ और उन्होंने कॉल काट दिया। जिसके बाद उन्होंने ओला के ग्राहक सहायता से संपर्क किया। उन्हें आश्चर्य हुआ कि कंपनी ने भी वही बात कही कि जब तक तक अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता, तब तक कोई डिलीवरी नहीं की जाएगी। 

ओला के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट, शिकायतकर्ता ने आयोग से संपर्क किया। उन्होंने वाहन की डिलीवरी और कंपनी की सेवा विफलता और अनुचित व्यापार प्रथाओं के कारण हुए मानसिक तनाव और वित्तीय नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की। 

ओला इलेक्ट्रिक ने तर्क दिया कि उनकी वेबसाइट पर तकनीकी समस्या के कारण देय राशि 1,45,692 रुपये के बजाय 1,15,332 रुपये गलत तरीके से प्रदर्शित हुई थी। त्रुटि का पता चलने के बाद, कंपनी ने ससीन्द्रन को शेष 30,360 रुपये देने के बारे में सूचित किया। इसके बावजूद, उन्होंने शेष राशि का भुगतान करने या पूरी धनवापसी के लिए ऑर्डर रद्द करने से इनकार कर दिया। 

आयोग ने फैसला सुनाया कि ओला का तर्क अस्वीकार्य है। और कंपनी को डिलीवरी न होने के लिए नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 1,15,332 रुपये वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, देरी और गलतफहमी के कारण हुई मानसिक पीड़ा, भावनात्मक संकट और वित्तीय कठिनाई के लिए 25,000 रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए। साथ ही कार्यवाही की लागत के रूप में 10,000 रुपये दिए गए। कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed