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ट्रैक्टरों में डीजल खपत घटाने को बनेंगे नियम

Thu, 30 Nov 2017 05:43 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Thu, 30 Nov 2017 05:43 PM IST
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Oil Ministry forms panel to lay down diesel use rules for tractors
tractors
नई दिल्ली। ट्रैक्टरों की डीजल खपत पर नियम बनाने के लिए केंद्रीय तेल मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस कवायद का मकसद ट्रैक्टरों में डीजल की खपत को घटाना है। देश में हर साल जितना डीजल खपत होती है, उसका करीब 7.7 फीसदी हिस्सा ट्रैक्टरों में उपयोग होता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव इस नौ सदस्यीय संचालन समिति के अध्यक्ष होंगे। मंत्रालय से जारी हुए एक आदेश में कहा गया है कि समिति छह महीने में एक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और नियमों के विकास के लिए एक खाका तैयार करने पर 15 महीने में आखिरी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
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ट्रैक्टरों का कई कार्यों में उपयोग होता है और हर कार्य के लिए औसत डीजल खपत अलग-अलग होती है। रोटावेटर पर इसकी डीजल खपत हर घंटे 7-8 लीटर हो सकती है, जबकि ट्रेलर पर यह वजन के साथ प्रति लीटर 5-7 किलोमीटर की माइलेज दे सकता है। अल्टरनेटर या स्ट्रॉ रीपर जैसे स्थैतिक कार्यों में एक ट्रैक्टर हर घंटे 6-7 लीटर तक डीजल पी सकता है।
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डीजल सर्वाधिक खपत वाला ईंधन
डीजल देश में सर्वाधिक खपत होने वाला ईंधन है। अप्रैल से अक्तूबर तक देश में 8.2 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग हुआ, जिसमें 56 फीसदी से अधिक हिस्सा डीजल का था। कुल डीजल उपयोग की करीब 57 फीसदी खपत वाहनों में होती है। ट्रकों में इसकी खपत 28.25 फीसदी है, जबकि ट्रैक्टरों, कृषि उपकरणों और कृषि पंप सेटों में डीजल की खपत 13 फीसदी है और एसयूवी में इसकी खपत 13.15 फीसदी है।


समिति नियमों का खाका तैयार करेगी
मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि आयातित कच्चे तेल पर देश की बढ़ती निर्भरता और ट्रैक्टरों में डीजल खपत का स्तर 7.7 फीसदी जैसे तथ्यों को देखते हुए सरकार ईंधन/डीजल की मितव्ययिता (कम खपत) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के नियम बनाना जरूरी समझती है। समिति भारत में ट्रैक्टरों के ईंधन खपत नियमों के लिए खाका का विकास करेगी और चरणबद्ध कार्यान्वयन तय करेगी। समिति ट्रैक्टरों के लिए श्रेणी आधार पर नियमों की सिफारिश करेगी और ईंधन खपत की माप के लिए तरीका निर्धारित करेगी। समिति वैश्विक स्तर पर भी अपनाए गए नियमों और भारतीय परिस्थितियों के लायक उसे ढाले जा सकने की संभावना तथा उसके प्रभाव की समीक्षा करेगी।

समिति कानून बनाने पर देगी सुझाव
समिति जरूरी कानून या नियम बनाने या अधिसूचना जारी करने पर विचार करेगी और संबंधित सरकार को इसके लिए सिफारिश करेगी या जरूरी हो तो पहले से मौजूद कानून, नियम या अधिसूचना में संशोधन का सुझाव देगी। समिति के सदस्यों में भारी उद्येाग विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के एक प्रतिनिधि, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के महानिदेशक, पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निदेशक और ट्रैक्टर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रसिडेंट को भी शामिल किया गया है। 
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