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Hindi News ›   Delhi ›   BS-III and BS-IV Trucks Entering Delhi Cause 62% of Truck PM2.5 Emissions: IIT Delhi & TERI Report

Delhi Pollution: दिल्ली आने वाले BS-3 और BS-4 ट्रक फैला रहे हैं 62% जानलेवा PM2.5 प्रदूषण, रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 30 Jun 2026 08:13 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 30 Jun 2026 08:13 PM IST
सार

दिल्ली में प्रवेश करने वाले BS-III और BS-IV ट्रक राजधानी के ट्रकों से होने वाले कुल PM2.5 उत्सर्जन का 62 प्रतिशत हिस्सा पैदा कर रहे हैं। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

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BS-III and BS-IV Trucks Entering Delhi Cause 62% of Truck PM2.5 Emissions: IIT Delhi & TERI Report
Delhi Pollution - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहे हैं। अब दिल्ली की आबो-हवा को लेकर एक नई और बेहद चौंकाने वाला अध्ययन सामने आया है। सोमवार को जारी हुई एक विशेष विश्लेषण रिपोर्ट ‘टुवर्ड्स क्लीनर फ्रेट इन दिल्ली: असेसिंग इंटरस्टेट ट्रक एमिशंस एंड मिटिगेशन स्ट्रैटेजीज’ में पाया गया है कि, दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले पुराने तकनीक के ट्रक यहां की हवा में सबसे ज्यादा जहर घोल रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली आने वाले कुल ट्रकों में से सिर्फ BS-III और BS-IV मानक वाले ट्रक ही ट्रकों से होने वाले कुल PM2.5 उत्सर्जन का 62 फीसदी हिस्सा पैदा कर रहे हैं।

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यह महत्वपूर्ण अध्ययन 'एयर पोल्यूशन एक्शन ग्रुप' (A-PAG), 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली' (IIT Delhi) और 'द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट' (TERI) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। 

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दिल्ली की हवा में रोजाना ट्रकों से कितना PM2.5 प्रदूषण घुल रहा है?

रिपोर्ट ने दिल्ली में हर दिन ट्रकों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के आंकड़ों का एक सटीक और बेहद गंभीर वर्गीकरण पेश किया है:

  • रोजाना का कुल प्रदूषण: दिल्ली में हर दिन प्रवेश करने वाले सभी ट्रकों से कुल मिलाकर 52.18 किलोग्राम PM2.5 का उत्सर्जन होता है।

  • BS-III ट्रकों की हिस्सेदारी: कुल ट्रकों में संख्या कम होने के बावजूद, पुराने BS-III ट्रक हर दिन अकेले 17.9 किलोग्राम PM2.5 हवा में छोड़ रहे हैं।

  • BS-IV ट्रकों की हिस्सेदारी: मध्यम श्रेणी के BS-IV ट्रकों के कारण रोजाना 14.47 किलोग्राम PM2.5 का उत्सर्जन हो रहा है।

  • BS-VI ट्रकों की हिस्सेदारी: सबसे नई और साफ तकनीक होने के बावजूद, अधिक संख्या होने के कारण BS-VI ट्रक 19.81 किलोग्राम PM2.5 उत्सर्जित कर रहे हैं।

दिल्ली आने वाले कुल 16,900 ट्रकों में किस श्रेणी के कितने वाहन हैं?

इस विश्लेषण से यह भी साफ हुआ है कि दिल्ली की सड़कों पर रोजाना दौड़ने वाले भारी वाहनों में कौन सी तकनीक कितनी मात्रा में मौजूद है:

  • रोजाना एंट्री: दिल्ली में रोजाना लगभग 16,900 भारी-भरकम ट्रक प्रवेश करते हैं।

  • 62% वाहन पर्यावरण अनुकूल: इन कुल ट्रकों में से लगभग 62 फीसदी ट्रक नए और सख्त BS-VI (BS-6) नियमों का पालन करने वाले हैं।

  • 28% वाहन मध्यम श्रेणी के: दिल्ली आने वाले ट्रकों में 28 फीसदी हिस्सेदारी BS-IV वाहनों की है।

  • 10% वाहन सबसे पुराने: महज 10 फीसदी ट्रक ही ऐसे हैं जो सबसे पुराने और प्रदूषणकारी BS-III या उससे भी पुरानी तकनीक पर चल रहे हैं।

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प्रदूषण फैलाने में इन भारी ट्रकों का समय और गंतव्य क्या होता है?

अध्ययन में ट्रकों के दिल्ली आने के समय और उनके अंतिम पड़ाव को लेकर कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं:

  • परिवहन प्रदूषण में बड़ी हिस्सेदारी: दिल्ली में रोजाना होने वाले कुल ट्रांसपोर्ट उत्सर्जन (यातायात प्रदूषण) में इन भारी ट्रकों की हिस्सेदारी 23 फीसदी है।

  • रात और सुबह का खतरनाक स्तर: सबसे डरावनी बात यह है कि तड़के सुबह और रात के समय इन ट्रकों की हिस्सेदारी कुल ट्रांसपोर्ट प्रदूषण में अचानक बढ़कर 61 फीसदी तक पहुंच जाती है।

  • 92% ट्रकों की मंजिल दिल्ली ही है: दिल्ली आने वाले 92 फीसदी भारी ट्रकों का अंतिम गंतव्य खुद दिल्ली ही होता है।

  • सिर्फ 8% ट्रांजिट ट्रैफिक: केवल 8 फीसदी ट्रक ही ऐसे होते हैं जो दिल्ली को सिर्फ एक "बायपास" या ट्रांजिट रूट (रास्ते से गुजरने) की तरह इस्तेमाल करते हैं। इनमें से भी अधिकांश ट्रक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के राज्यों से ही शुरू होते हैं। और वहीं के किसी अन्य राज्य में जा रहे होते हैं।

TERI की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अंजू गोयल का बयान: इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "माल ढुलाई शहरों की सीमाओं को नहीं मानती। दिल्ली में प्रवेश करने वाले अधिकांश ट्रक एनसीआर राज्यों से ही चलते हैं और वहीं लौट जाते हैं, जिसका मतलब है कि दिल्ली अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकती। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों के नीति निर्माताओं को एक साथ मिलकर एक साझा और डेटा-आधारित रोडमैप पर काम करने की सख्त जरूरत है।"

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की गई हैं?

इस अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर रिपोर्ट में सात प्रमुख सिफारिशें की गई हैं, जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार है:

  • कम उत्सर्जन क्षेत्र बनाना: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि दिल्ली में एक ऐसा 'लो-इमिशन जोन' बनाया जाए, जहां केवल BS-VI, सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक (EV) ट्रकों को ही प्रवेश की अनुमति हो।

  • 2027 तक का लक्ष्य: इस कड़े नियम के जरिए साल 2027 तक हवा में सबसे ज्यादा जहर घोलने वाले पुराने वाहनों को पूरी तरह से बाहर करने की जरूरत है।

  • 51% तक कम हो जाएगा प्रदूषण: रिपोर्ट का दावा है कि अगर यह कदम सफलतापूर्वक उठाया जाता है, तो साल 2027 तक ट्रकों से होने वाले PM2.5 उत्सर्जन में 51 फीसदी तक की भारी कमी लाई जा सकती है।
     

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