{"_id":"699c4a537b4ba0dafb0342c7","slug":"bought-new-motorcycle-faced-gear-issue-in-3-days-consumer-court-raps-service-centre-2026-02-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Consumer Commission: नई बाइक बनी मुसीबत, बार-बार खराबी पर कंज्यूमर कोर्ट का सख्त आदेश","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Consumer Commission: नई बाइक बनी मुसीबत, बार-बार खराबी पर कंज्यूमर कोर्ट का सख्त आदेश
Mon, 23 Feb 2026 06:08 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 23 Feb 2026 06:08 PM IST
सार
कंज्यूमर कमीशन ने कहा कि शिकायत करने वाले (श्रीजीत) का कहना है कि मैकेनिकल या मैन्युफैक्चरिंग में छिपी हुई खराबी वाली गाड़ी को बेचकर और उसे एकदम नया दिखाकर, दूसरी पार्टियों ने गलत जानकारी दी है और गलत ट्रेड प्रैक्टिस की है।
विज्ञापन
Bike riding problem
- फोटो : AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केरल के कदम्बाजीपुरम निवासी श्रीजीत एम ने 2 मई 2025 को 68,762 रुपये में एक बिल्कुल नई मोटरसाइकिल खरीदी थी। लेकिन महज तीन दिन के भीतर ही बाइक के गियर सिस्टम में गंभीर खराबी सामने आ गई। गियर न तो ठीक से ऊपर-नीचे हो रहे थे और कई बार चलते-चलते अपने आप बदल जा रहे थे। जो राइडर और पीछे बैठे व्यक्ति, दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता था।
विज्ञापन
गियर की समस्या कितनी खतरनाक थी?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीजीत ने बताया कि यह बाइक उन्होंने कामकाज के लिए खरीदी थी। पहली बार जब गियर फंस गया, तब वे अपनी मां के साथ यात्रा कर रहे थे और बाल-बाल हादसे से बचे। इस घटना ने उन्हें डरा दिया और बाइक को असुरक्षित महसूस कराया। गियर का अचानक बदलना चलते वाहन में गंभीर जोखिम पैदा करता है।
सर्विस सेंटर ने समस्या क्यों नहीं सुलझाई?
समस्या सामने आते ही उन्होंने बाइक सर्विस सेंटर में दी। जांच हुई, पर खराबी बार-बार लौट आती। नतीजतन, पहली फ्री सर्विस (12 जून 2025) से पहले ही उन्हें 35 दिनों में पांच बार सर्विस सेंटर जाना पड़ा।
17 जून 2025 को उन्हें एक एसएमएस मिला, जिसमें असुविधा के लिए माफी और समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन मरम्मत या रिप्लेसमेंट फिर भी नहीं हुआ।
यह भी पढ़ें - Toll Refund: 33 घंटे के जाम के बाद बड़ा फैसला, 1 लाख से ज्यादा वाहन मालिकों को मिलेगा ₹5.16 करोड़ का टोल रिफंड
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीजीत ने बताया कि यह बाइक उन्होंने कामकाज के लिए खरीदी थी। पहली बार जब गियर फंस गया, तब वे अपनी मां के साथ यात्रा कर रहे थे और बाल-बाल हादसे से बचे। इस घटना ने उन्हें डरा दिया और बाइक को असुरक्षित महसूस कराया। गियर का अचानक बदलना चलते वाहन में गंभीर जोखिम पैदा करता है।
सर्विस सेंटर ने समस्या क्यों नहीं सुलझाई?
समस्या सामने आते ही उन्होंने बाइक सर्विस सेंटर में दी। जांच हुई, पर खराबी बार-बार लौट आती। नतीजतन, पहली फ्री सर्विस (12 जून 2025) से पहले ही उन्हें 35 दिनों में पांच बार सर्विस सेंटर जाना पड़ा।
17 जून 2025 को उन्हें एक एसएमएस मिला, जिसमें असुविधा के लिए माफी और समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन मरम्मत या रिप्लेसमेंट फिर भी नहीं हुआ।
यह भी पढ़ें - Toll Refund: 33 घंटे के जाम के बाद बड़ा फैसला, 1 लाख से ज्यादा वाहन मालिकों को मिलेगा ₹5.16 करोड़ का टोल रिफंड
विज्ञापन
विज्ञापन
वैकल्पिक वाहन मिला, पर परेशानी क्यों बढ़ी?
श्रीजीत के मुताबिक, बाइक उनके पास रहने से ज्यादा समय सर्विस सेंटर में रही। हर बार मरम्मत के दौरान उन्हें अलग-अलग सेकंड-हैंड बाइक दी गई। बाद में, कई मौकों पर सर्विस सेंटर ने वे बाइक री-सेल के लिए वापस ले लीं, जिससे वे बिना किसी वाहन के रह गए और उनकी परेशानी और बढ़ गई।
उपभोक्ता आयोग में शिकायत कब और क्यों की गई?
लगातार शिकायतों के बावजूद खराबी दूर न होने पर श्रीजीत ने 21 अगस्त 2025 को पलक्कड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज की। उस समय भी बाइक सर्विस सेंटर में ही थी।
उन्होंने दलील दी कि गियर की खराबी सुरक्षा जोखिम है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दोष की श्रेणी में आती है। साथ ही, वारंटी शर्तों के अनुसार उचित देखभाल न होना सेवा में कमी है।
श्रीजीत के मुताबिक, बाइक उनके पास रहने से ज्यादा समय सर्विस सेंटर में रही। हर बार मरम्मत के दौरान उन्हें अलग-अलग सेकंड-हैंड बाइक दी गई। बाद में, कई मौकों पर सर्विस सेंटर ने वे बाइक री-सेल के लिए वापस ले लीं, जिससे वे बिना किसी वाहन के रह गए और उनकी परेशानी और बढ़ गई।
उपभोक्ता आयोग में शिकायत कब और क्यों की गई?
लगातार शिकायतों के बावजूद खराबी दूर न होने पर श्रीजीत ने 21 अगस्त 2025 को पलक्कड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज की। उस समय भी बाइक सर्विस सेंटर में ही थी।
उन्होंने दलील दी कि गियर की खराबी सुरक्षा जोखिम है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दोष की श्रेणी में आती है। साथ ही, वारंटी शर्तों के अनुसार उचित देखभाल न होना सेवा में कमी है।
आयोग ने निर्माता को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया?
आयोग में अध्यक्ष विनय मेनन वी., सदस्य श्रीमती विद्या ए. और सदस्य श्री कृष्णनकुट्टी एन.के. शामिल थे। आयोग ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट सिद्ध करने के लिए एक्सपर्ट इंस्पेक्शन रिपोर्ट पेश नहीं की गई।
इसलिए, वाहन की कीमत लौटाने या नया वाहन बदलने की मांग स्वीकार नहीं की गई और निर्माता को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।
सर्विस सेंटर की भूमिका पर आयोग का क्या निष्कर्ष रहा?
आयोग ने पाया कि सर्विस सेंटर ने समय पर और प्रभावी सेवा नहीं दी। वे पेश भी नहीं हुए और कोई प्रतिवाद दाखिल नहीं किया। रिकॉर्ड में मौजूद उनके जवाब से समस्या स्वीकारने और समाधान का आश्वासन तो दिखा, लेकिन वास्तविक समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने कहा कि इससे श्रीजीत को मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान और असुविधा हुई, जो सेवा में कमी है।
आयोग में अध्यक्ष विनय मेनन वी., सदस्य श्रीमती विद्या ए. और सदस्य श्री कृष्णनकुट्टी एन.के. शामिल थे। आयोग ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट सिद्ध करने के लिए एक्सपर्ट इंस्पेक्शन रिपोर्ट पेश नहीं की गई।
इसलिए, वाहन की कीमत लौटाने या नया वाहन बदलने की मांग स्वीकार नहीं की गई और निर्माता को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।
सर्विस सेंटर की भूमिका पर आयोग का क्या निष्कर्ष रहा?
आयोग ने पाया कि सर्विस सेंटर ने समय पर और प्रभावी सेवा नहीं दी। वे पेश भी नहीं हुए और कोई प्रतिवाद दाखिल नहीं किया। रिकॉर्ड में मौजूद उनके जवाब से समस्या स्वीकारने और समाधान का आश्वासन तो दिखा, लेकिन वास्तविक समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने कहा कि इससे श्रीजीत को मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान और असुविधा हुई, जो सेवा में कमी है।
अंतिम फैसला क्या रहा?
22 जनवरी 2026 को शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की गई। आदेश के अनुसार-
यह भी पढ़ें - 2026 Isuzu V-Cross: इसुजु वी-क्रॉस पिकअप ट्रक भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या है खास
22 जनवरी 2026 को शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की गई। आदेश के अनुसार-
- सर्विस सेंटर को बाइक की खराबी दूर कर उसे सड़क पर चलने लायक बनाना होगा या
- इसके विकल्प के तौर पर 25,000 रुपये मरम्मत लागत देनी होगी
- 20,000 रुपये मुआवजा (सेवा में कमी के लिए) और 5,000 रुपये मुकदमे का खर्च देना होगा
- राशि 45 दिनों में न देने पर 500 रुपये प्रति माह (या उसका भाग) अतिरिक्त देय होगा
यह भी पढ़ें - 2026 Isuzu V-Cross: इसुजु वी-क्रॉस पिकअप ट्रक भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या है खास