सड़क दुर्घटनाएं: पूरी दुनिया में अमेरिका में होते हैं सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट, लेकिन भारत में होती हैं सर्वाधिक मौतें
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अमेरिका में एक साल में 22 लाख से ज्यादा छोटी-बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है अमेरिका की तुलना में भारत मे होने वाली सड़क दुर्घटनाएं तकरीबन चार गुना कम होती हैं, लेकिन मृतकों की संख्या एक साल में डेढ़ लाख से ज्यादा होती है। वहीं अमेरिका में 22 लाख से ज्यादा होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या महज 34 हजार ही है। केंद्रीय सड़क परिवहन औए राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में सड़क हादसों में होने वाली मौत की प्रमुख वजह में ओवरस्पीडिंग, वाहनों की घटिया क्वॉलिटी और सड़क पर चलने वाले नियमों का पालन ना करना शामिल है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपने देश और दुनिया के अन्य मुल्कों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया। इस अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाए अमेरिका में होती हैं फिर जापान में होती है उसके बाद भारत का नंबर आता है। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में हर साल औसतन 22 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जबकि जापान में तकरीबन पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और भारत में यह आंकड़ा चार लाख अस्सी हजार के करीब है।
तुलनात्मक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में होने वाली 22 लाख सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या एक साल में 37 हजार के करीब है। जबकि भारत में चार लाख अस्सी हजार सड़क दुर्घटनाओं में तकरीबन 30 फीसदी यानी डेढ़ लाख लोग अपनी जान गवा देते हैं। यह आंकड़ा पूरी दुनिया में पहले नंबर पर है। जबकि पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा जापान में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जापान में पांच लाख छोटी बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और यहां सड़क दुर्घटनाओं से मरने वालों का आंकड़ा सालभर में महज साढ़े चार हजार ही है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अपने देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाएं और उसमें जान गंवाने वालों की प्रमुख वजह ओवरस्पीडिंग और यातायात नियमों का पालन ना करना तथा वाहन की घटिया गुणवत्ता शामिल है। मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी कहती है कि वाहनों की गुणवत्ता भी बेहतर ना होने के चलते सड़क पर दुर्घटनाएं होती हैं और लोग अपनी जान गंवाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका की जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी के रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट से जुड़ कर भारत में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काम करने वाले डॉक्टर प्रदीप कहते हैं यातायात नियमों का पालन ना करने की वजह से भारत में सबसे ज्यादा लोगों की जान जाती है।
इसके अलावा उनका कहना है रोड इंजीनियरिंग भी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। सड़कों की ऐसी डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग ऐसी हुई है जो लोगों की दुर्घटनाओं का न सिर्फ कारण बनती है बल्कि मौत का भी एक बड़ा कारण बनती है। प्रदीप ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए सर्वे की रिपोर्ट को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भी सौंपा गया है। जिसमें सड़क इंजीनियरिंग और रोड सेफ्टी के मानको को बेहतर किए जाने के सुझाव दिए गए हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इंटरनेशनल रोड फेडरेशन के वर्ल्ड रोड स्टैटिस्टिक्स से जुटाए गए आंकड़ों के बाद भारत में सड़क दुर्घटनाओं की कमी के लिए बहुत सारे उपायों पर काम करना शुरू किया है। सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश में लोगों को सड़क यातायात के नियमों के लिहाज से वाहन चलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, बल्कि सड़क इंजीनियरिंग के लिए पूरे देश भर में खासतौर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट को चिन्हित कर उन्हें सुधारा भी जा रहा है। इसके अलावा भारत में वाहन बनाने वाली ऑटोमोबाइल कंपनियों को सुरक्षा के मानकों में कोई भी कमी ना रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसकी जांच पड़ताल के लिए बाकायदा मंत्रालय ने विशेषज्ञों का पूरा पैनल तक नियुक्त किया है। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक वाहनों की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच भी होती रहती है। हालांकि मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि देश में दुर्घटना होने की प्रमुख वजह में वाहनों की घटिया गुणवत्ता भी शामिल है।
सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता फैला रहे आशुतोष सोती कहते हैं कि हमारे देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में लोग सही वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। यही एक प्रमुख वजह है कि सड़क दुर्घटनाओं में चोटिल होने वाले लोग अपनी जान गंवा देते हैं। आशुतोष के मुताबिक हमें अपने देश में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात के नियमों का पालन तो करना ही चाहिए। इसके अलावा देश के हर राजमार्ग पर ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर उन्हें दुरुस्त किया जाना चाहिए। आशुतोष के मुताबिक वाहनों की गुणवत्ता को जांचने के लिए और उनको बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार ने जो प्रयास किए हैं उसकी लगातार मॉनिटरिंग होती रहनी चाहिए।