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फीका त्योहार: इस साल दीपावली पर मायूस रहा ऑटो सेक्टर, पांच लाख से अधिक ग्राहकों को कारों की डिलीवरी का इंतजार!

Tue, 09 Nov 2021 12:48 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 09 Nov 2021 12:48 PM IST
सार

टू-व्हीलर्स की मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है और यहां तक कि शोरूम में आने वाले ग्राहकों और त्योहारी सीजन में पूछताछ भी पहले के मुकाबले कम रही। कोविड की दूसरी लहर के बाद भी ग्रामीण इलाकों में मांग अभी भी नहीं उठी है...

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The festival season of Navratri-Dussehra and Dhanteras-Diwali this year has been the worst for the car sales
Car sales India - फोटो : AmarUjala (फाइल)

विस्तार

इस साल नवरात्रि-दशहरा और धनतेरस-दिवाली का त्योहार देश के ऑटो सेक्टर के लिए पिछले एक दशक में सबसे खराब रहा है। हर साल नवरात्रि से लेकर दीपावली तक का त्योहारी सीजन वाहन निर्माताओं के लिए काफी उम्मीदों भरा होता है, क्योंकि भारतीय ग्राहक इन दिनों में ही नई गाड़ी खरीदना पसंद करते हैं। लेकिन वाहन निर्माताओं के लिए इस बार का त्योहारी सीजन वैसा नहीं रहा, जैसा कि उन्हें उम्मीद थी। पिछले 30 दिनों की अवधि के दौरान गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में पिछले साल समान अवधि के मुकाबले इस साल दोहरे अंकों की गिरावट आई है। पहले से ही चिप शॉर्टेज सप्लाई की कमी से जूझ रहे ऑटो सेक्टर को मजबूरी में गाड़ियों का प्रोडक्शन घटाना पड़ा, वहीं टू-व्हीलर्स सेक्टर में भी कोई खास मांग नहीं रही।

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ट्रैक्टर की बिक्री भी घटी

ऑटो सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले 30 दिनों में पैसेंजर व्हीकल्स की रीटेल बिक्री में एक तिहाई की कमी आई है। एक अनुमान के मुताबिक इस दौरान 305,000 पैसेंजर व्हीकल्स की डिलीवरी हुई, जबकि पिछले साल इसी दौरान 455,000 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। वहीं सरकार के वाहन पोर्टल से मिले आंकड़ों के मुताबिक 238,776 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि साल 2020 में 305,916 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस तरह इसमें 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

वहीं दोपहिया वाहनों की संख्या 10.7 लाख रही, जो 11 फीसदी कम थी। यहां तक कि ट्रैक्टर की बिक्री भी 13 फीसदी घटी है। वाहन पोर्टल पर देश के 85 फीसदी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) से पंजीकरण का आंकड़ा साझा होता है। हालांकि इन आंकड़ों में 7 से 15 दिन का अंतर होता है, दीपावली तक के सटीक आंकड़े आने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। ऑटो डीलर्स की संस्था फाडा का कहना है कि इस बार का त्योहारी सीजन वाहन डीलर्स के लिए पिछले एक दशक में सबसे बुरा रहा है। उनका कहना है कि हमें त्योहारी सीजन में रिकवरी की उम्मीद थी, लेकिन सेमीकंडक्टर की सप्लाई सुचारू होने में वक्त लग रहा है और इसका असर बिक्री पर साफ दिखाई पड़ रहा है।

पांच लाख से अधिक ग्राहकों को डिलीवरी का इंतजार

फेडरेशन का कहना है कि इस समय एंट्री लेवल गाड़ियों की मांग बेहद कम है, वहीं कॉम्पैक्ट एसयूवी और लग्जरी गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यहां सप्लाई की कमी है। पैसेंजर व्हीकल डीलर्स के पास 120,000 यूनिट्स उपलब्ध थीं, जो 8 से 10 दिनों की डिलीवरी को पूरा करने के लिए पर्याप्त थीं, लेकिन अक्तूबर के आखिर तक धनतेरस और दिवाली से पहले उनके पास आधे से भी कम स्टॉक था। इस बीच, त्योहारों से पहले बुक की गई कारों और एसयूवी की डिलीवरी लेने के लिए पांच लाख से अधिक ग्राहक इंतजार कर रहे थे।

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दोपहिया वाहन खरीदने नहीं पहुंचे ग्राहक

वहीं टू-व्हीलर्स की बात करें, फाडा का कहना है कि मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है और यहां तक कि शोरूम में आने वाले ग्राहकों और त्योहारी सीजन में पूछताछ भी पहले के मुकाबले कम रही। कोविड की दूसरी लहर के बाद भी ग्रामीण इलाकों में मांग अभी भी नहीं उठी है। 30 दिनों के त्योहार की अवधि के दौरान एतिहासिक रूप से कुल वाहन बिक्री में यात्री वाहनों की हिस्सेदारी गिरकर 19 फीसदी बनाम 21.5-22 फीसदी हो गई।

यूपी में 3.5 फीसदी बढ़ा रजिस्ट्रेशन

वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक देश के बाकी हिस्सों की तुलना में उत्तर भारत में मांग अधिक रही है। जनसंख्या के हिसाब से भारत के सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश में व्हीकल रजिस्ट्रेशन में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल जैसे राज्य जिनका देश की कुल वाहनों बिक्री में एक चौथाई से ज्यादा योगदान है, इन राज्यों में रीटेल सेल्स में 6-9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बिहार, दिल्ली, गुजरात, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा - जिनकी कुल मात्रा में 30 फीसदी की हिस्सेदारी है, इन राज्यों में रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में 15-22 फीसदी की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है।

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