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जल्द ही कम कीमत में मिलेंगी इलेक्ट्रिक कारें, वित्त मंत्रालय ने दी स्वदेशी बैटरी निर्माण को मंजूरी

Mon, 02 Sep 2019 01:48 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 02 Sep 2019 01:48 PM IST
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Soon you will get cheap electric cars in india, Finance minister given nod for battery manufacturing
electric car indian govt-1 - फोटो : सांकेतिक

वित्त मंत्रालय ने नीति आयोग की उस योजना को मंजूरी दे दी है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों और मोबाइल फोन के लिए बनाई जाने वाली बैटरी पर सब्सिडी दी जाएगी। इसके बाद इस प्रस्ताव को कैबेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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50 GWh के बैटरी निर्माण को मंजूरी  

मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय के तहत आने वाली एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (व्यय वित्त समिति) सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के देश में 50 GWh (गीगावाट घंटे) बैटरी निर्माण की क्षमता के प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया है। अब यह प्रस्ताव कैबिनेट को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद आयोग दिसंबर में निविदाएं आमंत्रित करेगा।

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2022 से प्लांट शुरू

योजना के मुताबिक जल्द ही अनुबंधों को मंजूरी दी जाएगी, ताकि 2022 से प्लांट शुरू हो सकें। आंकड़ों के मुताबिक भारत को 2020 से शुरू होने वाले आगामी 10 वर्षों के लिए 600 गीगावॉट बैटरी की आवश्यकता होगी।

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5,450 रुपये किलोवॉट प्रति घंटा तक आ जाएंगी कीमतें

सरकार को उम्मीद है कि एक बार आगर देश में बैटरियों का निर्माण शुरू हो गया, तो संभव है कि बैटरियों की कीमत 276 डॉलर यानी 19,800 रुपये किलोवॉट प्रति घंटा से घटाकर 76 डॉलर यानी 5,450 रुपये किलोवॉट प्रति घंटा तक आ सकती है। जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में कमी आएगी और अगले तीन-चार सालों में कीमत परंपरागत कंबशन इंजन वाहनों के बराबर पहुंच जाएगी।   

तीन-चार साल में कम हो जाएंगी कीमतें

मौजूदा वक्त में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में अकेले 50 फीसदी से ज्यादा कीमत बैटरियों की होती है। सरकार की योजना है कि सब्सिडी के जरिए स्वदेश में ही निर्माण क्षमता को बढ़ावा दिया जाए। इससे पहले पिछले हफ्ते नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा था कि बैटरी की कीमतों में कमी के कारण अगले तीन-चार साल में इलेक्ट्रिक वाहन की लागत पेट्रोल-डीजल इंजन गाड़ियों के लगभग बराबर हो जाएगी।

भारत में 1,000 लोगों के पास 28 कारें

अमिताभ का कहना था कि भारत में प्रत्येक 1,000 लोगों के पास 28 कारें हैं, जो अमेरिका और यूरोप की तुलना में काफी कम है। वहां  1,000 लोगों पर क्रमश: 980 और 850 गाडियां हैं।

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