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डीजल की कार को खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये खबर, कहीं बाद में पछताना न पड़ जाए
Sun, 28 Jun 2020 06:43 PM IST
श्रीधर मिश्रा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Sun, 28 Jun 2020 06:43 PM IST
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पेट्रोल-डीजल
- फोटो : pixabay
इतिहास में पहली बार दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों के मुकाबले डीजल की कीमतें बराबर हो गई हैं। पहले तो लोगों को यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन साल 2020 में अब कुछ भी असंभव नहीं है। दरअसल जून 2012 में पेट्रोल की तुलना में डीजल की कीमत प्रति लीटर 32 रुपए कम थी। लेकिन फिर डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती गई और अब डीजल और पेट्रोल की कीमतें एक बराबर हो गई हैं।
दरअसल डीजल से बने वाहनों की भारतीय घरेलू कार बाजार में डिमांड अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके दो सबसे बड़े कारण हैं। पहला डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और दूसरा पेट्रोल की तुलना में डीजल की कीमतों में घटते अंतर।
भारतीय घरेलू यात्री वाहनों में वित्त वर्ष 2012-13 में डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी 58 फीसदी थी। लेकिन वित्तवर्ष 2019-20 में भारतीय घरेलू यात्री वाहनों में डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी घटकर 29 फीसदी पर आ गई। वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में तो यह घटकर 15 फीसदी रह गई। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में डीजल वाहनों की मांग और तेजी से गिरेगी। एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे दो बड़े कारण बताए हैं। पहला कि बीएस-6 नॉर्म्स के कारण अब ज्यादातर कंपनियों ने अपनी डीजल गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। दूसरा पेट्रोल के मुकाबले अब डीजल का भाव भी बराबर हो गया है।
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भारत की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) के एक फैसले को एक्सपर्ट्स अब मास्टर स्ट्रोक के रूप में देख रहे हैं। दरअसल मारुति सुजुकी ने डीजल वाहनों के कारोबार से खुद को अलग कर दिया था। कंपनी अब अपनी पेट्रोल और सीएनजी/हाइब्रिड कारों पर ही फोकस कर रही है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मारुति की तरह ही दूसरी कार कंपनियां भी डीजल कारों के कारोबार को अलविदा कह सकती हैं। यानी आने वाले समय में कंपनियां डीजल कारों को बनाने के बजाए पेट्रोल की कारों पर ज्यादा फोकस करेंगी। इसके अलावा यह भी उम्मीद की जा रही है कि डीजल का भाव बढ़ने से आने वाले समय में दो-पहिया वाहनों की बिक्री में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
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दरअसल डीजल से बने वाहनों की भारतीय घरेलू कार बाजार में डिमांड अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके दो सबसे बड़े कारण हैं। पहला डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और दूसरा पेट्रोल की तुलना में डीजल की कीमतों में घटते अंतर।
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भारतीय घरेलू यात्री वाहनों में वित्त वर्ष 2012-13 में डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी 58 फीसदी थी। लेकिन वित्तवर्ष 2019-20 में भारतीय घरेलू यात्री वाहनों में डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी घटकर 29 फीसदी पर आ गई। वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में तो यह घटकर 15 फीसदी रह गई। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में डीजल वाहनों की मांग और तेजी से गिरेगी। एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे दो बड़े कारण बताए हैं। पहला कि बीएस-6 नॉर्म्स के कारण अब ज्यादातर कंपनियों ने अपनी डीजल गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। दूसरा पेट्रोल के मुकाबले अब डीजल का भाव भी बराबर हो गया है।
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भारत की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) के एक फैसले को एक्सपर्ट्स अब मास्टर स्ट्रोक के रूप में देख रहे हैं। दरअसल मारुति सुजुकी ने डीजल वाहनों के कारोबार से खुद को अलग कर दिया था। कंपनी अब अपनी पेट्रोल और सीएनजी/हाइब्रिड कारों पर ही फोकस कर रही है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मारुति की तरह ही दूसरी कार कंपनियां भी डीजल कारों के कारोबार को अलविदा कह सकती हैं। यानी आने वाले समय में कंपनियां डीजल कारों को बनाने के बजाए पेट्रोल की कारों पर ज्यादा फोकस करेंगी। इसके अलावा यह भी उम्मीद की जा रही है कि डीजल का भाव बढ़ने से आने वाले समय में दो-पहिया वाहनों की बिक्री में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।