देश की प्रमुख कार कंपनी शिकायतकर्ता को देगी 6 लाख रुपये का मुआवजा, जानें क्या है वजह
कभी कार के ब्रेक फेल, सस्पेंशन में खराबी तो कभी पावर विंडो में दिक्कत जैसे समस्याएं आम हो गईं। शिकायतकर्ता ने लगातार कंपनी को उन दिक्कतों के बारे में सूचित किया। लेकिन कार के वारंटी पीरियड में होने के बाद भी कंपनी ने कोई ध्यान नहीं दिया...
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ठाणे के शख्स ने बड़े शौक से आठ लाख रुपये की सेडान कार खरीदी, ये सोच कर कि वह अपने परिवार के साथ मौज-मस्ती करेगा और उसका सामाजिक रुतबा बढ़ेगा, लेकिन उसके लिए कार खरीदना दुस्वप्न साबित हुआ। उलटे वह कई सालों तक शोरूम के चक्कर काटता रहा, लेकिन कार में दिक्कतें खत्म नहीं हुई। आखिरकार उपभोक्ता आयोग की मदद से उसे न्याय मिल पाया।
वारंटी में थी कार
खबर के मुताबिक ठाणे के धनेश मोठे ने 2012 में स्कोडा ऑटो की डीलरशिप जेएमडी ऑटो प्रा. लि. से स्कोडा रैपिड सेडान कार खरीदी। आठ लाख रुपये की कीमत वाली रैपिड शुरुआत से ही दिक्कतें आनी शुरू हो गई। कभी कार के ब्रेक फेल, सस्पेंशन में खराबी तो कभी पावर विंडो में दिक्कत जैसे समस्याएं आम हो गईं। अपनी शिकायत में धनेश ने लिखा कि उन्होंने लगातार कंपनी को उन दिक्कतों के बारे में सूचित किया। लेकिन कार के वारंटी पीरियड में होने के बाद भी कंपनी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
सोशल मीडिया पर भी की शिकायत
उपभोक्ता अदालत में जाने से पहले धनेश ने कई बार स्कोडा को सोशल मीडिया के जरिए भी सूचित किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- फरवरी 2012 में अपनी पहली शिकायत में उन्होंने बताया कि डिलीवरी लेने के पहले हफ्ते में ही ब्रेक की समस्या आ गई, जिसके चलते पूरा दिन उऩका सर्विस स्टेशन में बीता।
- इसके बाद जुलाई 2012 में कार के ब्रेक फेल हो गए और उसे सर्विस स्टेशन ले जाना पड़ा। कंपनी ने समस्या को जाने बिना केवल ब्रेक पैड और डिस्क ब्रेक बदल दिए।
- अप्रैल 2013 में फिर कार के ब्रेक फेल हो गए, लेकिन कंपनी ने बिना समस्या को जाने केवल ब्रेक पैड और डिस्क ब्रेक बदल दिए। कंपनी ने यह जानने की कोशिश नहीं कि बार-बार ब्रेक फेल होने की वजह क्या है।
- इसके बाद सितंबर में फिर कार के गियर बॉक्स में खराबी के चलते फिर सर्विस स्टेशन लाना पड़ा। कंपनी ने कार का निरीक्षण किया, रिपेरिंग के बाद यह कहते हुए वापस कर दी कि गियरबॉक्स अब ठीक काम कर रहा है और ब्रेक्स की सफाई कर दी है। लेकिन दो दिन के भीतर ही फिर से ब्रेक्स ने काम करना बंद कर दिया।
बनाया डेडिकैटेड फेसबुक ग्रुप
कंपनी के रवैये से आहत हो तक धनेश ने कंपनी के फेसबुक पेज के अलावा स्कोडा यूके के फेसबुक पेज पर भी शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि उन्होंने माई फाइट एगेंस्ट स्कोडा इंडिया के नाम से डेडिकैटेड फेसबुक ग्रुप भी बनाया। जिसके बाद उन्होंने उपभोक्ता अदालत का रुख किया। अपनी शिकायत में उन्होंने खराब कार को बदलने की मांग की।
नहीं दिया नई कार देने का आदेश
कई साल की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एसजेड पवार और सदस्य पूनम वी मर्हिषी ने कार कंपनी को दोषी ठहराते हुए डीलरशिप को सेवा में कोताही बरतने के लिए उन्हें कार मालिक को छह लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसमें कार की 75 फीसदी राशि यानी नौ फीसदी के ब्याज के साथ 6,10,078 रुपये, जिसमें 10 हजार रुपये शिकायतकर्ता को अतिरिक्त देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता पहले ही 60 हजार किमी तक कार चला चुका है ऐसे में पूरी राशि या बदले में नई कार देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है।