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कार में कोरोना वायरस से ऐसे बचें, चारों खिड़कियां बंद हो तो खतरा सबसे ज्यादा
Fri, 22 Jan 2021 11:48 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 22 Jan 2021 11:48 AM IST
सार
विशेषज्ञों के अनुसार किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ 20 मिनट तक कार में राइड करना, स्कूल की क्लास या रेस्त्रां में संक्रमित व्यक्ति के साथ एक घंटे तक बैठने से भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि कार में हवा निकलने का स्थान नहीं होता।
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Coronavirus in Car
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
साल 2020 में दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने संक्रमण के जोखिम वाले विभिन्न स्थानों का खूब अध्ययन किया, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी कार के संबंध में कम शोध किए गए। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार कार का आकार छोटा होने के कारण, इनमें शारीरिक दूूूरी का पालन करना लगभग ना मुमकिन है। ऐसे में छोटे-छोटे एयरोसोल पार्टिकल अथवा एयरोसोल (सांस लेते समय अथवा बोलते समय निकलने वाले छोटे कण) से कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यहां जानिए कार ड्राइव करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे इस वायरस की चपेट में आने से बचा जा सके।
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कोरोना वायरस
- फोटो : पिक्साबे
कार में होने वाले संक्रमण के खतरे को जानने के लिए मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के भौतिकशास्त्री वर्गीस मथाई और ब्राउन यूनिवर्सिटी के उनके तीन साथियों असिमांशुदास, जेफरी बैली और कीनेथ ब्रेउर ने एक कम्यूटर मॉडल के जरिए यह जानने की कोशिश की है कि कार में वायरस का फैलाव कैसे कम हो सकता है।
कार में पीछे की तरफ ज्यादा होता है एयर प्रेशर
कार में ड्राइवर सीट और पीछे की तरफ क्रॉस में खिड़की खुली रखी जाए तो संक्रमण का खतरा कम होता है। ड्राइवर और पीछे की सीट पर क्रॉस में एक ही व्यक्ति के बैठने से भी खतरा कम होता है।
कार में पीछे की तरफ ज्यादा होता है एयर प्रेशर
कार में ड्राइवर सीट और पीछे की तरफ क्रॉस में खिड़की खुली रखी जाए तो संक्रमण का खतरा कम होता है। ड्राइवर और पीछे की सीट पर क्रॉस में एक ही व्यक्ति के बैठने से भी खतरा कम होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
संक्रमित के साथ हवादार जगह में बैठने से संक्रमण का खतरा कम
पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी में एयर क्वालिटी एक्सपर्ट रिचर्ड कोरसी ने विभिन्न परिस्थितियों में सांस के जरिए व्यक्ति के शरीर के अंदर जाने वाले एयरोसोल को मापने के लिए खुद का मॉडल डेवलप किया। उन्होंने पाया कि किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ 20 मिनट तक कार में राइड करना, स्कूल की क्लास या रेस्त्रां में संक्रमित व्यक्ति के साथ एक घंटे तक बैठने से भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि कार में हवा निकलने का स्थान नहीं होता।
पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी में एयर क्वालिटी एक्सपर्ट रिचर्ड कोरसी ने विभिन्न परिस्थितियों में सांस के जरिए व्यक्ति के शरीर के अंदर जाने वाले एयरोसोल को मापने के लिए खुद का मॉडल डेवलप किया। उन्होंने पाया कि किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ 20 मिनट तक कार में राइड करना, स्कूल की क्लास या रेस्त्रां में संक्रमित व्यक्ति के साथ एक घंटे तक बैठने से भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि कार में हवा निकलने का स्थान नहीं होता।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
आधी खिड़कियां खोलने से भी मिलता है पूरा फायदा
फालोअप स्टडी में यह भी पाया गया कि कार कि चारों खिड़कियों को यदि आधा भी खोल दिया जाए तो यह भी उतना ही प्रभावी है जितना पूरी खिड़कियां खोलना। मथाई के अनुसार कम से कम दो विपरीत खिड़कियों को भी यदि खोल दिया जाए तो कोराना वायरस संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। यह कारगर उपाय है।
फालोअप स्टडी में यह भी पाया गया कि कार कि चारों खिड़कियों को यदि आधा भी खोल दिया जाए तो यह भी उतना ही प्रभावी है जितना पूरी खिड़कियां खोलना। मथाई के अनुसार कम से कम दो विपरीत खिड़कियों को भी यदि खोल दिया जाए तो कोराना वायरस संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। यह कारगर उपाय है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
चारों खिड़कियां बंद हो तो खतरा सबसे ज्यादा
शोधकर्ताओं ने एयरोसोल के मूवमेंट को जानने के लिए कार के अंदर के एयरफ्लो को मापा। इसके लिए कार की खिड़कियों को अलग-अलग कॉम्बिनेशन में खोला और बंद किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि चारों खिड़कियां बंद होने पर एयरफ्लो सबसे कम था। यानी इस स्थिति में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।
शोधकर्ताओं ने एयरोसोल के मूवमेंट को जानने के लिए कार के अंदर के एयरफ्लो को मापा। इसके लिए कार की खिड़कियों को अलग-अलग कॉम्बिनेशन में खोला और बंद किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि चारों खिड़कियां बंद होने पर एयरफ्लो सबसे कम था। यानी इस स्थिति में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
संक्रमित के साथ कार में 20 मिनट की राइड भी खतरनाक
शोधकर्ताओं ने 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही एक कार का अध्ययन किया। इसमें आगे की तरफ बाईं ओर चालक और पीछे की सीट पर दाईं तरफ एक यात्री बैठा था। इस तरह कार में शारीरिक दूरी पर्याप्त होती है। पाया गया कि चलती हुई कार के बाहर जो हवा घूमती है वह कार के अंदर एक दबाव बनाती है। पीछे की तुलना में आगे की तरफ हवा का दबाव कम होता है। हवा पीछे से आगे की ओर सर्कुलेट होती है।
शोधकर्ताओं ने 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही एक कार का अध्ययन किया। इसमें आगे की तरफ बाईं ओर चालक और पीछे की सीट पर दाईं तरफ एक यात्री बैठा था। इस तरह कार में शारीरिक दूरी पर्याप्त होती है। पाया गया कि चलती हुई कार के बाहर जो हवा घूमती है वह कार के अंदर एक दबाव बनाती है। पीछे की तुलना में आगे की तरफ हवा का दबाव कम होता है। हवा पीछे से आगे की ओर सर्कुलेट होती है।