ग्राहक से ज्यादा रकम वसूलना कार डीलरशिप को पड़ा भारी, अदालत ने लगाई फटकार, कहा वापस दे 70 हजार
उपभोक्ता फोरम ने कहा कि डीलरशिप व्यापार में अनुचित व्यवहार और सेवा में खामी की दोषी है। अदालत ने डीलरशिप को 70 हजार रुपये शिकायतकर्ता को देने को कहा...
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जिला उपभोक्ता अदालत ने टाटा मोटर्स की एक डीलरशिप पर 70 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। फोरम ने डीलरशिप पर ये जुर्माना ग्राहक से अधिक राशि वसूलने के चलते लगाया है। निजामाबाद जिले में ममिदापल्ली इलाके के रहने वाले शिकायतकर्ता जानकीराम के. ने नवंबर 2019 में टाटा टियागो XZ वैरियंट खरीदा था। उन्होंने यह कार टाटा मोटर्स की आधिकारिक डीलरशिप कॉनकोर्ड मोटर्स से खरीदी थी।
40 हजार हजार रुपये अतिरिक्त लिए
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस कार के बदले 5.19 लाख रुपये की रकम का भुगतान डीलर को किय़ा। कार खरीदते समय उन्होंने चार लाख रुपये का लोन कराया, लोन लेते समय उनसे 40 हजार हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि डिफेंस कर्मी होने के नाते वे छूट यानी सब्सिडी के हकदार थे।
कंपनी ने नहीं सुनी
व्हीकल की डिलीवरी लेने के बाद उन्होंने डीलरशिप से कई बार अनुरोध किया कि उनसे अतिरिक्त वसूली गई राशि को वापस दिया जाए। डीलरशिप ने शुरुआत में तो उनसे कहा कि वे उन्हें रिफंड के बारे में सूचित करेंगे, लेकिन 19 अप्रैल 2019 को डीलरशिप ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि कार खरीदते समय उनसे कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं ली गई है।
टाटा मोटर्स ने जिम्मेदारी डीलर पर डाली
जिसके बाद जानकीरान के. ने उपभोक्ता फोरम का रुख किया। ईटी की खबर के मुताबिक उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा कि डीलरशिप पांच महीने बीत जाने के बाद भी उनसे ली गई अतिरिक्त धनराशि वापस नहीं लौटाना चाहती है। इसका कॉनकॉर्ड मोटर्स ने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं टाटा मोटर्स ने लिखित जवाब में कहा कि वह कार और यूटिलिटी व्हीकल्स निर्माता कंपनी है और वह ग्राहकों को सीधे गाड़ी नहीं बेचती है।
व्यापार में अनुचित व्यवहार और सेवा में खामी की दोषी
वहीं शिकायतकर्ता ने कॉनकॉर्ड मोटर्स से आए ईमेल्स को भी अदालत में पेश किया, जिसमें डीलरशिप ने सब्सिडी की ऱकम देने से इंकार किया था। फोरम ने माना कि कैंटीन स्टोर की 65 हजार रुपये की रसीद और 40 हजार रुपये की कैश रसीद से ग्राहक की खरीद की पुष्टि होती है। उपभोक्ता फोरम ने कहा कि डीलरशिप व्यापार में अनुचित व्यवहार और सेवा में खामी की दोषी है। अदालत ने डीलरशिप को 70 हजार रुपये शिकायतकर्ता को देने को कहा, जिसमें 40 हजार रुपये की सब्सिडी राशि, 25 हजार रुपये का मुआवजा और पांच हजार रुपये का कानूनी खर्च देने का आदेश दिया।