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कलर ब्लाइंड लोगों को मिला गाड़ी चलाने का अधिकार, बनवा सकेंगे ड्राइविंग लाइसेंस, मोटर वाहन कानून में बदलाव
Sun, 28 Jun 2020 09:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sun, 28 Jun 2020 09:21 PM IST
सार
- मामूली से मध्यम कलर ब्लाइंड लोग भी अब ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर सकेंगे।
- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन कानून में इसके लिए आवश्यक संशोधन कर गजट अधिसूचना जारी कर दी है।
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car driving
- फोटो : For Representation Only
विस्तार
कार की चाबी झट से उठाकर, कार में बैठकर फर्राटे भरने में कैसा आनंद आता है, यह किसी कार का मालिक बखूबी जानता है। लेकिन दुर्भाग्य से, भारतीय नागरिकों के कुछ वर्गों को अभी तक ऐसा करने के अधिकार से वंचित रखा गया था, जिसमें कलर ब्लाइंड लोग भी शामिल हैं। शुक्र है कि अब यह बदल गया है। मामूली से मध्यम कलर ब्लाइंड लोग भी अब ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर सकेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन कानून में इसके लिए आवश्यक संशोधन कर गजट अधिसूचना जारी कर दी है।
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सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में एक नया संशोधन पेश किया, जिसमें हल्के से मध्यम (कलर ब्लाइंड) लोगों को ड्राइव करने का अधिकार दिया गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी पिछले हफ्ते एक ट्वीट के माध्यम से इस खबर को साझा किया था।
मंत्रालय ने कहा है कि कलर ब्लाइंड लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के फॉर्म-1 और 1ए में बदलाव किया गया है। मंत्रालय ने परिवहन संबंधी सेवाओं खासकर ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर दिव्यांगजन लोगों के लिए कई कदम उठाए हैं।
मंत्रालय ने कहा है कि कलर ब्लाइंड लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के फॉर्म-1 और 1ए में बदलाव किया गया है। मंत्रालय ने परिवहन संबंधी सेवाओं खासकर ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर दिव्यांगजन लोगों के लिए कई कदम उठाए हैं।
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अब तक, किसी भी तरह की कलर ब्लाइंड लोगों को कानूनी रूप से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं थी। और इस तरह भारत में ड्राइव करने की अनुमति नहीं थी। इसके पीछे की सोच यह थी कि रंग चालक का ध्यान आकर्षित करने का एक महत्वपूर्ण तत्व है, इस प्रकार वस्तुओं को महसूस करने के लिए महत्वपूर्ण है। और यह देखते हुए कि रंग, सड़क यातायात इंजीनियरिंग का एक अभिन्न हिस्सा होता है, कलर ब्लाइंड ड्राइवरों को ट्रैफिक सिग्नल लाइट के साथ-साथ अन्य सड़क के संकेतों (रोड साइन) को नहीं देख पाने या भ्रमित होने का खतरा हो सकता है, जो स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए रंगों का उपयोग करते हैं।
इसके अलावा, तकनीकी रूप से भारत में ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया में शारीरिक और चिकित्सा फिटनेस प्रमाणपत्र की जरूरत होती है। इसलिए, कलर ब्लाइंड लोगों को इस तरह अब तक विशेषाधिकार से बाहर रखा गया।
अधिकारियों ने कहा, इस मुद्दे को बहुत ही संवेदना के साथ लिया गया क्योंकि कुछ देशों में एक सीमा तक कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी होते हैं। उन्होंने बताया, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दिल्ली में AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) (एम्स) के चिकित्सा विशेषज्ञों और नेत्र रोग विशेषज्ञों के साथ परामर्श किया और इसके बाद हल्के से मध्यम कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइव करने की अनुमति देने के लिए प्रावधान करने का निर्णय लिया। बात दें कि, इन परिवर्तनों के साथ, व्यापक रूप से कलर ब्लाइंड पीड़ित लोगों को अभी भी ड्राइविंग से प्रतिबंधित किया जाना जारी रहेगा।
पहले ड्राइविंग लाइसेंस के फॉर्म-1 और 1ए में कुछ ऐसे सवाल थे, जो कलर ब्लाइंड लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में बाधा थे, उन्हें अब संशोधित कर दिया गया है। हालांकि, आवेदककर्ता के लिए मेडिकल फिटनेस का सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है।