ऑटोमोबाइल डीलर्स ने लॉकडाउन के दौरान किया ‘खेल’, BS4 वाहनों को ऐसे लगाया ठिकाने!
- जब एक-एक नाम पते पर कई गाड़ियां आरटीओ रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंची तब हुआ खुलासा
- तीन मई को खत्म होना है लॉकडाउन, लेकिन एक मई तक ही कराना था रजिस्ट्रेशन
- 31 मार्च तक अगर डीलर सेल लेटर जारी न करते तो करोड़ों के वाहन हो जाते कबाड़
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने छह अप्रैल को आदेश दिया था कि ऑटोमोबाइल डीलर लॉकडाउन खुलने के बाद बीएस4 स्टॉक में से केवल 10 फीसदी वाहन ही बेच सकते हैं। इससे पहले बीएस4 वाहनों को रजिस्टर करने की आखिरी तारीख 31 मार्च थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ छूट दी थी। करोड़ों रुपये के बीएस4 वाहनों के कबाड़ होने के डर से घबराए वाहन डीलर्स ने लॉकडाउन के दौरान ऐसे वाहनों को ठिकाने लगाने के जुगाड़ ढूंढ लिए।
स्टाफ, घरवालों को ‘बेची’ गाड़ियां
डीलर्स ने स्टॉक में पड़े बीएस4 वाहनों को खुद ही खरीद कर रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया। डीलर्स ने तरकीब निकालते हुए इन वाहनों को अपने स्टाफ, परिजनों के नाम से रजिस्टर्ड करवा दिया। ये हाल किसी एक शहर का नहीं है बल्कि लगभग सभी राज्यों में डीलर्स ने इस हथकंडे को अपनाया है। डीलर्स का कहना है कि इसकी वजह है कि अधिकांश ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों ने डीलर्स से बीएस4 वाहनों को वापस लेने से मना कर दिया था। जिसके चलते डीलर्स की मजबूरी बन गई कि कैसे इन वाहनों को ठिकाने लगाए। मार्च तक के Federation of Automobiles Dealers Association (FADA), फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के मुताबिक देश में ही अकेले बिना बिके बीएस4 दोपहिया वाहनों की संख्या 6 से 8 लाख के बीच थी, जिनकी कीमत 6400 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।उड़ गई थी नींद
डीलर्स का कहना है कि इन वाहनों ने हमारी रातों की नींदे उड़ा दी थीं, क्योंकि लॉकडाउन के चलते कंपनियों के शोरूम बंद हैं और सरकार पहले ही एक मई तक बीएस4 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा तय कर चुकी है, ऐसे में ये सभी वाहन कबाड़ हो जाते। उनका कहना है कि इन वाहनों को कबाड़ होने से बचाने और नुकसान कम करने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। आलम यह है कि एक-एक व्यक्ति के नाम पर 15 गाड़ियां तक रजिस्टर कराई गई हैं। यहां तक कि महिलाओं के नाम पर कई-कई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है।
नहीं है मार्जिन की चिंता
डीलर्स के मुताबिक अगर दोपहिया वाहनों की बात करें, तो रजिस्ट्रेशन, टैक्स और इंश्योरेंस को छोड़ दें तो गाड़ियों की कीमत एक लाख रुपये तक है और अगर इनका रजिस्ट्रेशन नहीं कराते तो बहुत बड़ा घाटा झेलना पड़ता, जो मौजूदा मंदी और लॉकडाउन की परिस्थितियों को देखते हुए संभव नहीं था। वहीं अब डीलर्स का कहना है कि उन्हें इन वाहनों के लिए ग्राहकों का इंतजार है। अब इन गाड़ियों को सेकंड हैंड के तौर पर बेचा जाएगा। उनका कहना है कि यह ग्राहकों के लिए भी फायदेमंद होगा कि उन्हें शून्य किमी चली गाड़ियां कम कीमत में मिलेंगी। उनका कहना है कि हमें मार्जिन की चिंता नहीं है, कम से कम हमारी लागत तो वसूल हो जाए।ग्राहकों के लिए फायदेमंद
ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लीगल तरीका है जिससे डीलर्स को ज्यादा नुकसान नहीं सहना पड़ेगा। ऐसे वाहनों को वाजिब कीमत पर सेकंड-हैंड वाहनों के तौर पर बेचा जा सकता है। अगर कोई ग्राहक फिलहाल कीमत का 30 फीसदी चुकाने की स्थिति में नहीं है, तो वह बाद में 20 फीसदी चुका कर यूज्ड गाड़ी के तौर पर खरीद सकता है। इस तरह से डीलर 10 फीसदी तक बचा सकते हैं। वहीं बीएस4 स्टॉक को सेकंड हैंड की तरह बेचना डीलर और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि ग्राहक अगर सेकंड हैंड रजिस्टर्ड व्हीकल खरीदता है, तो उसे 0 किमी चला हुआ बिल्कुल नया वाहन मिलेगा। वहीं एक अप्रैल 2020 के बाद वैसे ही बीएस6 वाहनों की कीमतों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी होनी है, ऐसे में वह नई कीमत चुकाने से बच जाएगा।